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अखिल भारतीय अनुराग साहित्य अलंकरण समारोह में राज्यपाल ने विभिन्न राज्यों से चयनित 31 साहित्यकारों को सम्मानित किया
अच्छा साहित्य समाज में पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाता है- राज्यपाल

राज्य की राजधानी में आयोजित अखिल भारतीय अनुराग साहित्य अलंकरण समारोह में साहित्य जगत का भव्य संगम देखने को मिला। समारोह के मुख्य अतिथि राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने कहा कि अच्छा साहित्य समाज में पथ प्रदर्शक की भूमिका निभाता है और विद्रूपताओं को मिटाता है। राज्यपाल शनिवार को दौसा जिले के लालसोट में अशोक शर्मा राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय मेंने देश के विभिन्न राज्यों से चयनित 31 प्रतिष्ठित साहित्यकारों को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया।

कार्यक्रम का आयोजन अनुराग साहित्य संस्थान द्वारा किया गया, जिसमें हिंदी, उर्दू, संस्कृत और क्षेत्रीय भाषाओं के लेखकों, कवियों, कथाकारों और शोधकर्ताओं ने भाग लिया। समारोह का उद्देश्य साहित्य सृजन को प्रोत्साहित करना और समाज में साहित्य की भूमिका को सशक्त करना रहा।

राज्यपाल ने शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा के माध्यम से ही पिछड़े, जनजाति एवं घुमंतू वर्ग के लोग बराबरी के स्तर पर आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि देश में नई शिक्षा नीति सबको आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करेगी। उन्होंने कहा कि हमारा देश दुनिया में अग्रणी बन रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 29 देशों ने अपना सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया है। इससे स्पष्ट है कि भारत विश्व गुरु एवं विश्व का नेता है। उन्होंने इसमें साहित्यकारों से भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाने का आह्वान किया। 

इससे पहले राज्यपाल श्री बागडे ने अनुराग सेवा संस्थान के 31 वर्ष पूर्ण होने के उपलक्ष्य में आयोजित अखिल भारतीय अनुराग साहित्य अलंकरण समारोह में विभिन्न राज्यों से चयनित 31 साहित्यकारों को शॉल ओढ़ाकर एवं स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। 

🏛️ राज्यपाल का संबोधन

सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि

“साहित्य समाज का दर्पण होता है। यह न केवल विचारों को दिशा देता है, बल्कि सामाजिक चेतना को भी जागृत करता है। आज जिन साहित्यकारों को सम्मानित किया गया है, उन्होंने अपनी लेखनी के माध्यम से देश और समाज को नई दृष्टि दी है।”

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में साहित्य की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो गई है, क्योंकि यह युवा पीढ़ी को संस्कार, संवेदना और राष्ट्रबोध से जोड़ने का कार्य करता है।

📚 देशभर से चयनित साहित्यकार

इस अवसर पर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, पश्चिम बंगाल, झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित विभिन्न राज्यों से चयनित साहित्यकारों को सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न और अंगवस्त्र प्रदान कर सम्मानित किया गया। चयन प्रक्रिया में साहित्यिक गुणवत्ता, सामाजिक सरोकार और निरंतर योगदान को विशेष रूप से महत्व दिया गया।

🎤 साहित्यिक सत्र और काव्य पाठ

समारोह के दौरान साहित्यिक संगोष्ठी और काव्य पाठ का भी आयोजन किया गया, जिसमें साहित्यकारों ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत कीं। श्रोताओं ने रचनाओं की सराहना करते हुए तालियों से साहित्यकारों का उत्साहवर्धन किया।

👥 गणमान्य अतिथियों की उपस्थिति

कार्यक्रम में कई वरिष्ठ साहित्यकार, शिक्षाविद्, विश्वविद्यालयों के कुलपति, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में साहित्य प्रेमी उपस्थित रहे। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी ऐसे आयोजनों के माध्यम से साहित्यकारों को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया जाएगा।

समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ और आयोजकों ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया।