ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता हम स्वीकार नहीं करेंगे:डॉ. अभिषेक वर्मा
डॉ. अभिषेक वर्मा, जो राष्ट्रीय संयोजक एनडीए और शिवसेना के प्रमुख राष्ट्रीय समन्वयक हैं, ने ‘‘ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता, हम नहीं स्वीकार करेंगे’’ विषय पर एक विस्तृत बयान दिया है। वे भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं और हिंदुत्व के संरक्षण तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रबल पक्षधर हैं। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर उनकी वीरता और अदम्य साहस को याद करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता न स्वीकार करने के अपने दृढ़ वचन को दोहराया है।
डॉ. वर्मा ने कहा कि भारत की आज़ादी की लड़ाई में रानी लक्ष्मीबाई ने जो पराक्रम और देशभक्ति दिखाई, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनका यह नारा कि “हम ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता स्वीकार नहीं करेंगे” आज भी स्वतंत्रता, स्वाभिमान और स्वदेशी भावनाओं की भावना को जीवित रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान भारत को भी इसी जज़्बे के साथ विदेशी और आंतरिक दमन के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।
अपने बयान में डॉ. अभिषेक वर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम की महान गाथाओं को याद करते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने न केवल युद्धभूमि में, बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्तर पर भी भारत को एकजुट रखने का काम किया। उन्होंने कहा कि हमें उनकी गाथाओं से निरंतर प्रेरणा लेकर अपने देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा करनी चाहिए।
डॉ. वर्मा ने युवाओं से अपील की कि वे देशभक्ति की भावना को जीवित रखें और किसी भी तरह की विदेशी अधीनता, शोषण या संस्कृतिक आक्रमण का प्रतिकार करें। उन्होंने कहा, “ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता को न सिर्फ हमारे पूर्वजों ने अस्वीकार किया था, बल्कि आज भी हम किसी भी प्रकार के दमन, विदेशी हस्तक्षेप और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की अवहेलना को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”
हालांकि आज भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है, फिर भी वे कहते हैं कि आज की वैश्विक राजनीति में आर्थिक, सैन्य और सांस्कृतिक क्षेत्र में विदेशी दबावों से सावधान रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें आत्मनिर्भरता को अपनाना होगा और देश के संसाधनों, संस्कृति तथा जनता की रक्षा के लिए तेज़ और समर्पित प्रयास जारी रखने होंगे।
डॉ. अभिषेक वर्मा ने इस अवसर पर रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर न केवल उनके साहस को नमन किया, बल्कि यह भी कहा कि उनकी गाथाएँ सदैव भारतीय जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। उन्होंने कहा, ‘‘रानी लक्ष्मीबाई का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा त्याग, साहस और समर्पण ही भारत की ताकत हैं, और हमें सदैव इन्हीं मूल्यों के प्रति समर्पित रहना चाहिए।’’

अंत में, उन्होंने यह संदेश दिया कि ‘‘हम किसी भी परिस्थिति में ब्रिटिश अधीनता की पुनरावृत्ति नहीं स्वीकार करेंगे, क्योंकि भारतीय आत्मा स्वतंत्रता और स्वाभिमान की दीप्ति से प्रकाशित है। हम रानी लक्ष्मीबाई के आदर्शों को अपनाते हुए हर प्रकार की विदेशी हिंसा, उत्पीड़न और सामाजिक अन्याय से लड़ते रहेंगे।’’
डॉ. अभिषेक वर्मा का यह बयान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करता है और भारत के युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और उनका संरक्षण करने के लिए प्रेरित करता है।
यह विस्तृत समाचार डॉ. अभिषेक वर्मा के राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण के आधार पर तैयार किया गया है, जो उन्होंने ‘‘ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता, हम नहीं स्वीकार करेंगे’’ के संदर्भ में व्यक्त किया है। इनके अलावा उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साहस और देशभक्ति को विशेष रूप से याद किया है।
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