Breaking News
प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) जयंती विशेष: संघ के चतुर्थ सरसंघचालक की अमर गाथा
आज 29 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेंद्र सिंह जी की 104वीं जयंती है।

आज 29 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक प्रो. राजेंद्र सिंह जी की 104वीं जयंती है। प्रयागराज में जन्मे रज्जू भैय्या के नाम से विख्यात इस महान व्यक्तित्व ने विज्ञान के क्षेत्र में अपनी विद्वता के साथ-साथ राष्ट्र निर्माण में अद्वितीय योगदान दिया।

प्रारंभिक जीवन और शिक्षा

प्रो. राजेंद्र सिंह का जन्म 29 जनवरी 1922 को प्रयागराज के बेलका गाँव में एक प्रतिष्ठित परिवार में हुआ था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भौतिकी में एमएससी करने वाले रज्जू भैय्या प्रख्यात गणितज्ञ हरिशचंद्र के सहपाठी रहे। 1943 से 1967 तक वे उसी विश्वविद्यालय में भौतिकी विभाग के प्राध्यापक व बाद में विभागाध्यक्ष रहे। डॉ. होमी भाभा ने उन्हें परमाणु अनुसंधान के लिए आमंत्रित किया, किंतु उन्होंने संघ कार्य को प्राथमिकता दी।

संघ संगठन में योगदान

1942 में भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान संघ से जुड़े रज्जू भैय्या ने तीव्र गति से संगठन में प्रगति की। 1946 में प्रयाग विभाग कार्यवाह, 1949 में संभाग कार्यवाह, 1954 में उत्तर प्रदेश प्रांत प्रचारक बने। आपातकाल (1975-77) में भूमिगत रहकर लोकतंत्र पुनर्स्थापना आंदोलन चलाया। 11 मार्च 1994 को डॉ. बालासाहेब देवरस ने उन्हें सरसंघचालक पद सौंपा। 10 वर्षों तक इस दायित्व का निर्वहन करते हुए 2000 में श्री कुप्पाहल्ली सीताराम सुदर्शन को उत्तराधिकारी घोषित किया।

विशेष उपलब्धियाँ

रज्जू भैय्या संघ के पहले गैर-मराठी, गैर-ब्राह्मण सरसंघचालक थे। अयोध्या आंदोलन के दौरान स्वयंसेवकों को दृढ़ रहने का संदेश दिया। नानाजी देशमुख को मंत्री पद त्यागकर जनता पार्टी महासचिव बनने की प्रेरणा दी। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से जटिल सामाजिक समस्याओं का सरल समाधान प्रस्तुत करते थे। लाल बहादुर शास्त्री से निकट संपर्क रहने पर भी संघ को चुना।

निधन और स्मृति

14 जुलाई 2003 को पुणे में इनका स्वर्गवास हुआ। प्रयागराज में प्रो. राजेंद्र सिंह (रज्जू भैय्या) स्मृति सेवा न्यास इनकी स्मृति को जीवंत रखता है। आज संघ परिवार सहित राष्ट्रभक्त उनके चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर रहा है। रज्जू भैय्या का संदेश – “व्यवस्था परिवर्तन ही राष्ट्र परिवर्तन का आधार है” – आज भी प्रासंगिक है।

जनकल्याण, राष्ट्रप्रेम व धर्मरक्षा के लिए संपूर्ण जीवन समर्पित करने वाले कुशल संगठनकर्ता, समाज सुधारक तथा ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ’ के चौथे सरसंघचालक परम पूज्य प्रो० राजेन्द्र सिंह ‘रज्जू भैया’ जी की जयंती पर उन्हें शत-शत नमन |

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से की मुलाकात
स्वास्थ्य सेवाओं, मेट्रो विस्तार एवं ऊर्जा से जुड़े विषयों पर की अहम चर्चा

जयपुर, 28 जनवरी। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा एवं केंद्रीय आवासन, शहरी कार्य एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से शिष्टाचार भेंट की। 

मुख्यमंत्री ने केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री श्री नड्डा से मुलाकात के दौरान प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण, आधारभूत स्वास्थ्य ढांचे के विस्तार एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की। साथ ही, उन्होंने प्रदेशवासियों को सुलभ और बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के संबंध में भी सार्थक संवाद किया।

मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने केंद्रीय आवासन, शहरी कार्य एवं ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल से मेट्रो विस्तार, शहरी यातायात एवं ऊर्जा से जुड़े विभिन्न विषयों को लेकर मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने प्रदेश को ऊर्जा आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में विकसित किए जा रहे बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम एवं नवीन ट्रांसमिशन तंत्र के सुदृढ़ीकरण सहित ऊर्जा क्षेत्र के अन्य पहलुओं पर अहम चर्चा की।

UGC Bill 2026: उच्च शिक्षा में बड़े बदलाव की तैयारी, कॉलेजों में भेदभाव रोकने के लिए लागू हुए सख्त नियम; जानें सब कुछ
नई दिल्ली/राजस्थान। भारत सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने...

नई दिल्ली/राजस्थान। भारत सरकार और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव लाने के उद्देश्य से “उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी विनियम, 2026” (Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026) को प्रभावी कर दिया है। 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित ये नियम अब देश के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के लिए अनिवार्य होंगे।

इन नए नियमों का मुख्य लक्ष्य कैंपस में होने वाले जातिगत, धार्मिक और लैंगिक भेदभाव को जड़ से खत्म करना है। हालांकि, इन प्रावधानों को लेकर देशभर में बहस और विरोध का सिलसिला भी शुरू हो गया है।

UGC Bill 2026 की मुख्य विशेषताएं

यूजीसी के इन नए दिशा-निर्देशों में कई ऐसे प्रावधान किए गए हैं जो छात्रों की सुरक्षा और समानता को सुनिश्चित करते हैं:

  • समान अवसर केंद्र (Equal Opportunity Centre): अब हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक ‘इक्वल ऑपर्च्युनिटी सेंटर’ बनाना अनिवार्य होगा। यह केंद्र वंचित वर्गों (SC, ST, OBC, महिला, दिव्यांग) के छात्रों और कर्मचारियों को मार्गदर्शन प्रदान करेगा।
  • इक्विटी कमेटी का गठन: प्रत्येक संस्थान में एक विशेष समिति होगी जिसमें आरक्षित वर्गों और महिलाओं का प्रतिनिधित्व अनिवार्य होगा। यह समिति भेदभाव की शिकायतों की जांच करेगी।
  • 24×7 हेल्पलाइन: छात्रों की समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए चौबीसों घंटे चलने वाली हेल्पलाइन और ऑनलाइन शिकायत प्रणाली शुरू की जाएगी।
  • कड़ी कार्रवाई का प्रावधान: यदि कोई संस्थान इन नियमों का उल्लंघन करता है, तो यूजीसी उसकी फंडिंग (Grant) रोक सकता है या उसकी मान्यता भी रद्द कर सकता है।
  • OBC को भी मिला दायरा: 2012 के पुराने नियमों की तुलना में, 2026 के नए नियमों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) को भी जाति-आधारित भेदभाव के सुरक्षा दायरे में स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है।

क्यों हो रहा है विरोध?

जहाँ सरकार इसे ‘सामाजिक न्याय’ की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं कई संगठन और छात्र समूह इसका विरोध कर रहे हैं। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

  1. सामान्य वर्ग की चिंताएं: आलोचकों का तर्क है कि इन नियमों में सामान्य श्रेणी (General Category) के छात्रों के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं हैं।
  2. दुरुपयोग का डर: कुछ शिक्षाविदों का मानना है कि नियमों की अस्पष्ट परिभाषा के कारण इनका गलत इस्तेमाल हो सकता है, जिससे कैंपस का माहौल तनावपूर्ण होने की आशंका है।
  3. रोलेट एक्ट से तुलना: कुछ प्रदर्शनकारियों ने इन सख्त नियमों की तुलना ब्रिटिश काल के ‘रोलेट एक्ट’ से की है, उनका कहना है कि यह संस्थानों की स्वायत्तता पर हमला है।
  4. न्यायालय में चुनौती: सुप्रीम कोर्ट ने इन नियमों के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करने के लिए सहमति दे दी है, जिससे आने वाले दिनों में यह कानूनी मोड़ ले सकता है।

राजस्थान पर असर

राजस्थान के प्रमुख विश्वविद्यालयों जैसे राजस्थान विश्वविद्यालय (Jaipur), JNVU (Jodhpur) और मोहनलाल सुखाड़िया विश्वविद्यालय (Udaipur) में भी इन नियमों को लागू करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। राज्य के हजारों छात्रों के लिए अब शिकायत निवारण का एक मजबूत तंत्र उपलब्ध होगा।

#UGCBill2026 #EducationNews #HigherEducation #UGCNewRules #RajasthanEducation #LiveRajasthan #SocialJustice #UniversityUpdates #UGCControversy