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नाहरगढ़ जैविक उद्यान में रविवार को उमड़ा सैलानियों का सैलाब
2 हजार 316 सैलानियों ने किया शेर–बाघ का दीदार

जयपुर, 30 नवंबर। राजधानी जयपुर का नाहरगढ़ जैविक उद्यान रविवार को पर्यटकों की भारी भीड़ से गुलजार रहा। सुहावने मौसम, अवकाश के उत्साह और प्राकृतिक सुंदरता के आकर्षण ने बड़ी संख्या में लोगों को उद्यान की ओर खींचा। एसीएफ श्री देवेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि रविवार को कुल 2 हजार 316 पर्यटकों ने उद्यान पहुंचकर यहां के समृद्ध वन्यजीव संसार और प्राकृतिक जैव विविधता का नजदीकी अवलोकन किया। इनमें से लायन सफारी और टाइगर सफारी दिनभर भीड़ का मुख्य केंद्र बनी रही। वहीं, कुल 460 सैलानियों ने इन दोनों सफारियों का प्रत्यक्ष अनुभव लेते हुए शेर और बाघ के शक्तिशाली, चंचल और रोमांचकारी व्यवहार को करीब से देखा। बाघों की गगनभेदी गर्जना, शेरों के शाही तेवर और उनकी विशिष्ट चाल-ढाल ने पर्यटकों को रोमांच से भर दिया, जिसमें कई आगंतुकों ने इस अनुभव को जीवन का यादगार पल बताया।

नाहरगढ़ जैविक उद्यान इन दिनों न केवल जयपुरवासियों बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले पर्यटकों का पसंदीदा गंतव्य बनकर उभरा है। इसका मुख्य कारण है वन विभाग द्वारा किया जा रहा सुरक्षित, सुव्यवस्थित और पर्यटक-हितैषी प्रबंधन। उप वन संरक्षक श्री विजयपाल सिंह के निर्देशन में पर्यटकों की सुरक्षा, सफाई, टिकटिंग, मार्गदर्शन, भीड़ नियंत्रण और सफारी संचालन पर विशेष ध्यान दिया गया। रविवार को एसीएफ श्री देवेंद्र सिंह राठौड़ और रेन्जर श्री शुभम शर्मा ने दोनों सफारियों की सघन मॉनिटरिंग करते हुए संपूर्ण व्यवस्थाओं का विस्तृत निरीक्षण किया।

रेन्ज अधिकारी शुभम शर्मा की देखरेख में टूरिज्म मैनेजमेंट टीम द्वारा सफारी रूटों की नियमित निगरानी, वाहनों की समयबद्ध उपलब्धता, टिकटिंग काउंटरों पर पारदर्शी व तेज सेवा, पर्यटकों को दिशा-निर्देश, पगडंडियों व पाथवे की स्वच्छता तथा भीड़ प्रबंधन जैसी व्यवस्थाओं को प्रभावी रूप से लागू किया गया, जिससे पर्यटकों का अनुभव और अधिक सुविधाजनक, सुरक्षित और आनंददायक रहा।

वन विभाग की सतत निगरानी और उत्कृष्ट प्रबंधन के चलते नाहरगढ़ जैविक उद्यान आज राजस्थान के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों में अग्रणी स्थान रखता है। यह स्थल न केवल मनोरंजन का माध्यम है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण, प्राकृतिक आवासों की सुरक्षा, पर्यावरण शिक्षा और जैव विविधता संरक्षण के महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का एक जीवंत केंद्र भी बन चुका है। उद्यान का प्राकृतिक वातावरण, हरियाली और वन्यजीवों का सहज व्यवहार पर्यटकों को प्रकृति से जोड़ने का अनूठा अवसर प्रदान करता है, जो उनके लिए अविस्मरणीय अनुभव बनकर उभरता है।

देश ने 357 मिलियन टन खाद्यान्न उत्पादन का बनाया ऐतिहासिक रिकॉर्ड
वोकल फॉर लोकल की भावना बनी देश के करोड़ों लोगों के जीवन का हिस्सा

 प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को ‘मन की बात‘ कार्यक्रम की 128वीं कड़ी में देशवासियों को संबोधित किया। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने सांगानेर कैंप कार्यालय में आमजन के साथ ‘मन की बात‘ कार्यक्रम को सुना। 

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कृषि क्षेत्र में भारत ने बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए 357 मिलियन टन के खाद्यान्न उत्पादन का ऐतिहासिक रिकॉर्ड बनाया है। उन्होंने कहा कि 10 साल पहले की तुलना में भारत का खाद्यान्न उत्पादन 100 मिलियन टन और बढ़ गया है। 

मोदी ने कहा कि देश में डेढ़ लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा शहद का उत्पादन हो रहा है और शहद का निर्यात भी तीन गुना से ज्यादा बढ़ गया है। उन्होंने देश के विभिन्न इलाकों में स्थानीय लोगों एवं संस्थाओं द्वारा शहद उत्पादन की भी चर्चा की। उन्होंने कोयम्बटूर में आयोजित विशाल नैचुरल फार्मिंग सम्मेलन को भारत की प्राचीन परंपराओं का हिस्सा बताते हुए इसे निरंतर बढ़ावा देने की अपील की।

प्रधानमंत्री ने जी-20 शिखर सम्मेलन के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि देशवासियों की ओर से उन्होंने विश्व के नेताओं को जो उपहार भेंट किए, उसमें वोकल फॉर लोकल की भावना का विशेष ध्यान रखा। श्री मोदी ने बताया कि उन्होंने कनाडा के प्रधानमंत्री को चांदी के अश्व की प्रतिकृति भेंट की जो राजस्थान के उदयपुर की बेहतरीन शिल्पकला को दर्शाती है। उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता जताई कि वोकल फॉर लोकल की भावना को देश के करोड़ों लोगों ने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। 

प्रधानमंत्री ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महाभारत अनुभव केंद्र में 3डी लाइट एण्ड साउण्ड शो के माध्यम से महाभारत की गाथा के प्रस्तुतीकरण के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा कि कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में यूरोप और मध्य एशिया सहित विश्व के कई देशों के लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। श्री मोदी ने काशी के नमो घाट पर आयोजित होने वाले चौथे काशी-तमिल संगमम में अधिक से अधिक भागीदारी कर ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना मजबूत करने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री ने विभिन्न खेलों में भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय महिला क्रिकेट टीम द्वारा आईसीसी महिला विश्व कप, महिला कबड्डी खिलाड़ियों द्वारा कबड्डी वर्ल्ड कप तथा महिला टीम द्वारा ब्लाइंड क्रिकेट वर्ल्ड कप जीतना ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने डेफलिम्पिक्स तथा वर्ल्ड बॉक्सिंग कप फाइनल में भी भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन की भरपूर सराहना की।

मोदी ने कहा कि 4 दिसम्बर को मनाया जाने वाला नौसेना दिवस हमारे सैनिकों के अदम्य साहस और पराक्रम को सम्मान देने का एक खास दिन है। उन्होंने कहा कि देश में विभिन्न स्थानों पर नौसेना से संबंधित संग्रहालय है जहां नौसेना के इतिहास के बारे में जानकारी मिलती है। उन्होंने आईएनएस ‘माहे’ को भारतीय नौसेना में शामिल करने, हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन एमआरओ फैसिलिटी शुरू होने तथा स्काईरूट स्टार्टअप के इन्फिनिटी कैम्पस की स्थापना को भारत की नई सोच, इनोवेशन और युवा शक्ति का प्रतिबिम्ब बताया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया के कई देशों में विन्टर टूरिज्म अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में भी उत्तराखण्ड जैसे राज्यों में इसकी अपार संभावनाएं है। उन्होंने कहा कि हिमालय की वादियां एडवेन्चर्स गेम्स और डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए प्रसिद्ध हो रही हैं। 

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि मन की बात कार्यक्रम प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के देशवासियों से आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक है। इस कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री देश की गौरवशाली उपलब्धियों के बारे में हमें बताते हैं। वे हमेशा स्वदेशी उत्पादों को प्रोत्साहित करने के साथ ही देशवासियों में एक भारत श्रेष्ठ भारत की भावना को प्रबल करते हैं।

मन की बात की 128वीं कड़ी में प्रधानमंत्री के सम्बोधन का मूल पाठ
मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार। ‘मन की बात’ में आपका एक बार फिर स्वागत है। नवंबर का महीना बहुत सी प्रेरणाएं लेकर आया, कुछ दिन पहले ही 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ पर central...

मेरे प्यारे देशवासियो, नमस्कार।

‘मन की बात’ में आपका एक बार फिर स्वागत है। नवंबर का महीना बहुत सी प्रेरणाएं लेकर आया, कुछ दिन पहले ही 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस’ पर central hall में विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। वंदेमातरम् के 150 वर्ष होने पर पूरे देश में होने वाले कार्यक्रमों की शानदार शुरुआत हुई। 25 नवंबर को अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण हुआ। इसी दिन कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पांचजन्य स्मारक का लोकार्पण हुआ।

साथियो,

कुछ दिन पहले ही मैंने हैदराबाद में दुनिया की सबसे बड़ी लीप इंजन MRO facility का उ‌द्घाटन किया है। Aircrafts की Maintenance, repair and overhaul के sector में भारत ने ये बहुत बड़ा कदम उठाया है। पिछले हफ्ते मुंबई में एक कार्यक्रम के दौरान INS ‘माहे’ को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। पिछले ही हफ्ते भारत के space ecosystem को Skyroot के Infinity campus ने नई उड़ान दी है। ये भारत की नई सोच, innovation और Youth Power का प्रतिबिंब बना है।

साथियो,

कृषि क्षेत्र में भी देश ने बड़ी उपलब्धि हासिल की। भारत ने 357 मिलियन टन के खा‌द्यान्न उत्पादन के साथ एक ऐतिहासिक record बनाया है। Three hundred and fifty seven million ton! 10 साल पहले की तुलना में भारत का खा‌द्यान्न उत्पादन 100 मिलियन टन और बढ़ गया है। खेलों की दुनिया में भी भारत का परचम लहराया है। कुछ दिन पहले ही भारत को कॉमनवेल्थ खेलों की मेजबानी का भी ऐलान हुआ। ये उपलब्धियाँ देश की हैं, देशवासियों की है। और ‘मन की बात’ देश के लोगों की ऐसी उपलब्धियों को, लोगों के सामूहिक प्रयासों को जन-सामान्य के सामने लाने का, एक बेहतरीन मंच है।

साथियो,

अगर मन में लगन हो, सामूहिक शक्ति पर टीम की तरह काम करने पर विश्वास हो, गिरकर फिर से उठ खड़े होने का साहस हो, तो कठिन-से-कठिन काम में भी सफलता सुनिश्चित हो जाती है। आप उस दौर की कल्पना करिए, जब satellite नहीं थीं, GPS system नहीं था, navigation की कोई सुविधाएं नहीं होती थीं। तब भी हमारे नाविक बड़े-बड़े जहाज लेकर समंदर में निकल जाते थे, और तय स्थानों पर पहुंचते थे। अब समंदर से आगे बढ़कर दुनिया के देश अंतरिक्ष की अनंत ऊंचाई को नाप रहे हैं। चुनौती वहां भी वही है, ना GPS system है, ना संचार की वैसी व्यवस्थाएं हैं, फिर हम कैसे आगे बढ़ेंगे?

साथियो,

कुछ दिनों पहले social media पर एक Video ने मेरा ध्यान खींचा। ये video ISRO की एक अनोखी drone प्रतियोगिता का था। इस Video में हमारे देश के युवा और खासकर हमारे Gen-Z मंगल ग्रह जैसी परिस्थितियों में drone उड़ाने की कोशिश कर रहे थे। drone उड़ते थे, कुछ पल संतुलन में रहते थे, फिर अचानक जमीन पर गिर पड़ते थे। जानते हैं क्यों ? क्योंकि यहां जो drone उड़ रहे थे, उनमें GPS का सपोर्ट बिल्कुल नहीं था। मंगल ग्रह पर GPS संभव नहीं इसलिए drone को कोई बाहरी संकेत या guidance नहीं मिल सकता। drone को अपने कैमरे और Inbuilt software के सहारे उड़ना था। उस छोटे-से drone को जमीन के pattern पहचानने थे, ऊंचाई मापनी थी, बाधाएं समझनी थी, और खुद ही सुरक्षित उतरने का रास्ता ढूंढना था। इसलिए drone भी एक के बाद एक गिरे जा रहे थे।

साथियो,

इस प्रतियोगिता में, पुणे के युवाओं की एक टीम ने कुछ हद तक सफलता पाई उनका drone भी कई बार गिरा, crash हुआ पर उन्होंने हार नहीं मानी। कई बार के प्रयास के बाद इस team का drone मंगल ग्रह की परिस्थिति में कुछ देर उड़ने में कामयाब रहा।

साथियो,

ये Video देखते हुए, मेरे मन में एक और दृश्य उभर आया। वो दिन जब चंद्रयान-2 संपर्क से बाहर हो गया था। उस दिन पूरा देश, और खासकर वैज्ञानिक कुछ पल के लिए निराश हुए थे। लेकिन साथियो, असफलता ने उन्हें रोका नहीं। उसी दिन उन्होंने चंद्रयान-3 की सफलता की कहानी लिखनी शुरू कर दी। यही कारण है कि जब चंद्रयान-3 ने सफल landing की, तो वो सिर्फ एक mission की सफलता नहीं थी। वो तो असफलता से निकलकर बनाए गए विश्वास की सफलता थी। इस Video में जो युवा दिख रहे हैं, उनकी आंखों में मुझे वही चमक दिखाई दी। हर बार जब मैं हमारे युवाओं की लगन और वैज्ञानिकों के समर्पण को देखता हूँ, तो मन उत्साह से भर जाता है। युवाओं की यही लगन, विकसित भारत की बहुत बड़ी शक्ति है।

मेरे प्यारे देशवासियो,

आप सभी शहद की मिठास से जरूर परिचित होंगे, लेकिन, अक्सर हमें ये नहीं पता चलता इसके पीछे कितने लोगों की मेहनत है, कितनी परंपराएँ हैं, और प्रकृति के साथ कितना सुंदर तालमेल है।

साथियो,

जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में वन तुलसी यानि सुलाई, सुलाई के फूलों से यहाँ की मधुमक्खियाँ बेहद अनोखा शहद बनाती हैं। ये सफेद रंग का शहद होता है जिसे रामबन सुलाई honey कहा जाता है। कुछ वर्षों पहले ही रामबन सुलाई honey को GI Tag मिला है। इसके बाद इस शहद की पहचान पूरे देश में बन रही है।

साथियो,

दक्षिण कन्नड़ा जिले के पुत्तुर में वहाँ की वनस्पतियाँ शहद उत्पादन के लिए उत्कृष्ट मानी जाती हैं। यहाँ ‘ग्रामजन्य’ नाम की किसान संस्था इस प्राकृतिक उपहार को नई दिशा दे रही है। ‘ग्रामजन्य’ ने यहाँ एक आधुनिक processing unit बनाया, lab, bottling, storage और digital tracking जैसी सुविधाएँ जोड़ी गईं। अब यही शहद branded उत्पाद बनकर गाँवों से शहरों तक पहुँच रहा है। इस प्रयास का लाभ ढाई हजार से अधिक किसानों को मिला है।

साथियो,

कर्नाटका के ही तुमकुरु जिले में ‘शिवगंगा कालंजिया’ नाम की संस्था का प्रयास भी बहुत सराहनीय है। इनके द्वारा यहाँ हर सदस्य को शुरुआत में दो bee-boxes दिए जाते हैं। ऐसा करके इस संस्था ने अनेकों किसानों को अपने अभियान से जोड़ दिया है। अब इस संस्था से जुड़े किसान मिलकर शहद निकालते हैं, बेहतरीन packaging करते हैं और स्थानीय बाजार तक पहुंचाते हैं। इससे उन्हें लाखों की कमाई भी हो रही है। ऐसा ही एक उदाहरण नागालैंड के cliff-honey hunting का है। नागालैंड के चोकलांगन गाँव में खियामनि-याँगन जनजाति सदियों से शहद निकालने का काम करती आई हैं। यहाँ मधुमक्खियों पेड़ों पर नहीं बल्कि ऊँची चट्टानों पर अपने घर बनाती हैं। इसलिए शहद निकालने का काम भी बहुत जोखिम भरा होता है। इसलिए यहाँ के लोग मधुमक्खियों से पहले सौम्यता से बात करते हैं, उनसे अनुमति लेते हैं। उन्हें बताते हैं की आज वे शहद लेने आए हैं, इसके बाद शहद निकालते हैं।

साथियो,

आज भारत honey production में नए रिकार्ड बना रहा है। 11 साल पहले देश में honey का उत्पादन 76 हजार मीट्रिक टन था। अब ये बढ़कर डेढ़ लाख मीट्रिक टन से भी ज्यादा हो गया है। बीते कुछ वर्षों में शहद का export भी तीन गुना से ज्यादा बढ़ गया है। Honey Mission कार्यक्रम के तहत खादी ग्रामोद्योग ने भी सवा 2 लाख से ज्यादा bee-boxes लोगों में बांटे हैं। इससे हजारों लोगों को रोजगार के नए अवसर मिले हैं। यानि देश के अलग-अलग कोनों में शहद की मिठास भी बढ़ रही है। और ये मिठास किसानों की आय भी बढ़ा रही है।  

मेरे प्यारे देशवासियो,

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ था, ये हम सभी जानते हैं। लेकिन युद्ध के इस अनुभव को अब आप वहाँ महाभारत अनुभव केंद्र में भी साक्षात महसूस कर सकते हैं। इस अनुभव केंद्र में महाभारत की गाथा को 3D, Light & Sound Show और digital technique से दिखाया जा रहा है। 25 नवंबर को जब मैं कुरुक्षेत्र गया था तो इस अनुभव केंद्र के अनुभव ने मुझे आनंद से भर दिया था।

साथियो,

कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता  महोत्सव में शामिल होना भी मेरे लिए बहुत विशेष रहा। मैं ये देखकर बहुत प्रभावित हुआ कि कैसे दुनियाभर के लोग दिव्य ग्रंथ गीता से प्रेरित हो रहे हैं। इस महोत्सव में यूरोप और सेंट्रल एशिया सहित विश्व के कई देशों के लोगों की भागीदारी रही है।

इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब में पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर गीता की प्रस्तुति की गई है। यूरोप के लातविया में भी एक यादगार गीता महोत्सव आयोजित किया गया। इस महोत्सव में लातविया, एस्टोनिया, लिथुआनिया और अल्जीरिया के कलाकारों ने बढ़-चढ़ करके हिस्सा लिया।  

साथियो,

भारत की महान संस्कृति में शांति और करुणा का भाव सर्वोपरि रहा है। आप दूसरे विश्व युद्ध की कल्पना कीजिए, जब चारों ओर विनाश का भयावह माहौल बना हुआ था। ऐसे मुश्किल समय में गुजरात के नवानगर के जाम साहब, महाराजा दिग्विजय सिंह जी ने जो महान कार्य किया, वो आज भी हमें प्रेरणा देता है। उस समय जाम साहब, किसी सामरिक गठबंधन या युद्ध की रणनीति को लेकर नहीं सोच रहे थे। बल्कि उनकी चिंता ये थी कि कैसे विश्व युद्ध के बीच पोलिश यहूदी बच्चों की रक्षा हुई। उन्होंने गुजरात में तब हजारों बच्चों को शरण देकर उन्हें नया जीवन दिया, जो आज भी एक मिसाल है। कुछ दिन पहले दक्षिणी इजराइल के मोशाव नेवातिम में जाम साहब की प्रतिमा का अनावरण किया गया। यह बहुत ही विशेष सम्मान था। पिछले वर्ष पोलैंड के वारसॉ में मुझे जाम साहब के स्मारक पर श्रद्धा सुमन अर्पित करने का सौभाग्य मिला था। मेरे लिए वो क्षण अविस्मरणीय रहेगा।

मेरे प्यारे देशवासियो,

कुछ दिनों पहले मैं Natural Farming के एक विशाल सम्मेलन में हिस्सा लेने कोयंबटूर गया था। दक्षिण भारत में Natural Farming को लेकर हो रहे प्रयासों को देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ। कितने ही युवा Highly Qualified Professional अब Natural Farming Field को अपना रहे हैं। मैंने वहाँ किसानों से बात की, उनसे अनुभव जाने। Natural Farming भारत की प्राचीन परंपराओं का हिस्सा रही है और हम सभी का कर्तव्य है कि धरती माँ की रक्षा के लिए इसे निरंतर बढ़ावा दें।

साथियो,

विश्व की सबसे पुरानी भाषा और विश्व के सबसे प्राचीन शहरों में से एक शहर, इन दोनो का संगम हमेशा अद्भुत होता है। मैं बात कर रहा हूँ – ‘काशी तमिल संगमम’ की। 2 दिसंबर से काशी के नमो घाट पर चौथा काशी-तमिल संगमम शुरू हो रहा है। इस बार के काशी-तमिल संगमम की थीम बहुत ही रोचक है – Learn Tamil – तमिल करकलम्। काशी-तमिल संगमम उन सभी लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बन गया है जिन्हें तमिल भाषा से लगाव है। काशी के लोगों से जब भी बात होती है तो वो हमेशा बताते हैं कि काशी-तमिल संगमम का हिस्सा बनना उन्हें बहुत अच्छा लगता है। यहाँ उन्हें कुछ नया सीखने और नए-नए लोगों से मिलने का अवसर मिलता है। इस बार भी काशीवासी पूरे जोश और उत्साह के साथ तमिलनाडु से आने वाले अपने भाई-बहनों का स्वागत करने के लिए बहुत उत्सुक हैं। मेरा आप सभी से आग्रह है कि आप काशी-तमिल संगमम का हिस्सा जरूर बनें। इसके साथ ही ऐसे और भी मंचों के बारे में सोचें, जिनसे ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना मजबूत हो। यहाँ मैं एक बार फिर कहना चाहूँगा:

तमिल कलाच्चारम उयर्वानद्

तमिल मोलि उयर्वानद्

तमिल इन्दियाविन पेरूमिदम्। 

(English Translation)

Tamil culture is great.

Tamil language is great.

Tamil is the pride of India

मेरे प्यारे देशवासियो,

जब भारत के सुरक्षा तंत्र को मजबूती मिलती है, तो हर भारतीय को गर्व होता है। पिछले हफ्ते मुंबई में INS ‘माहे’ को भारतीय नौसेना में शामिल किया गया। कुछ लोगों के बीच इसके स्वदेशी design को लेकर खूब चर्चा रही। वहीं, पुडुचेरी और मालाबार coast के लोग इसके नाम से ही खुश हो गए। दरअसल, इसका ‘माहे’ नाम उस स्थान माहे के नाम पर रखा गया है, जिसकी एक समृद्ध ऐतिहासिक विरासत रही है। केरला और तमिलनाडु के कई लोगों ने इस बात पर गौर किया कि इस युद्धपोत का crest उरुमी  और कलारिपयट्टू की पारंपरिक लचीली तलवार की तरह दिखाई पड़ता है। ये हम सबके लिए गर्व की बात है कि हमारी नौसेना बहुत ही तेजी से आत्मनिर्भरता की ओर कदम बढ़ा रही है। 4 दिसम्बर को हम नौसेना दिवस भी मनाने जा रहे हैं। ये अवसर हमारे सैनिकों के अदम्य साहस और पराक्रम को सम्मान देने का एक खास दिन है।

साथियो,

जो लोग Navy से जुड़े tourism में रुचि रखते हैं, उनके लिए हमारे देश में बहुत सी जगह हैं, जहां जाकर उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिलेगा। देश के पश्चिमी तट पर गुजरात के सोमनाथ के पास एक जिला है-दीव। दीव में ‘INS खुखरी’ को समर्पित ‘Khukhri  Memorial and Museum’ है। वहीं, Goa में ‘naval aviation museum’ है, जो Asia में अपनी तरह का अनूठा संग्रहालय है। Fort Kochi के INS द्रोणाचार्य में ‘Indian Naval Maritime Museum’ है। यहाँ हमारे देश की Maritime history और Indian Navy के evolution को देखा जा सकता है। श्रीविजयापुरम जिसे पहले Port Blair कहा जाता था, वहाँ ‘समुद्रिका- Naval Marine Museum’ उस क्षेत्र के समृद्ध इतिहास को सामने लाने के लिए जाना जाता है। कारवार के रवीन्द्रनाथ टैगोर beach पर Warship Museum में मिसाइलों और हथियारों की replica रखी गई हैं। विशाखापत्तनम में भी एक submarine, helicopter और aircraft museum है, जो Indian Navy से जुड़ा है। मैं आप सभी से, विशेषकर military history में रुचि रखने वाले लोगों से आग्रह करता हूँ कि आप इन museums को देखने जरूर जाएँ।   

मेरे प्यारे देशवासियो,

सर्दियाँ आ गई हैं और साथ ही सर्दियों से जुड़े Tourism का भी समय आ गया है। दुनिया के कई देशों ने सर्दियों में होने वाले Tourism को, Winter Tourism को अपनी अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा आधार बना दिया है। अनेक देशों में दुनिया के सबसे सफल Winter Festival और Winter Sports model हैं। इन देशों ने Skiing, Snow-boarding, Snow Trekking, Ice Climbing और Family Snow Parks जैसे अनुभवों को अपनी पहचान बनाया है। इन्होंने अपने winter festivals को भी वैश्विक आकर्षण में बदला है।

साथियो,

हमारे देश में भी winter tourism की हर क्षमता मौजूद है। हमारे पास पहाड़ भी हैं, संस्कृति भी है और adventure की असीम संभावनाएँ भी हैं। मुझे खुशी है। इन दिनों उत्तराखंड का winter tourism लोगों को बहुत आकर्षित कर रहा है। सर्दियों के मौसम में औली, मुनस्यारी, चोपटा और डेयारा जैसी जगहें खूब popular हो रही हैं। अभी कुछ सप्ताह पहले पिथौरागढ़ ज़िले में साढ़े चौदह हजार फुट से अधिक की ऊंचाई पर आदि कैलाश में राज्य की पहली High Altitude Ultra Run Marathon का आयोजन किया गया था। इसमें देश भर के 18 राज्यों से 750 से ज्यादा athletes ने हिस्सा लिया था। 60 किलोमीटर लंबी ‘आदि कैलाश परिक्रमा रन’ का प्रारंभ कड़कड़ाती सर्दी में सुबह पाँच बजे हुआ था। इतनी ठंड के बावजूद भी लोगों का उत्साह देखते ही बनता था। आदि कैलाश की यात्रा पर जहाँ तीन साल पहले तक मात्र दो हजार से कम पर्यटक आते थे, अब यह संख्या भी बढ़कर तीस हजार से अधिक हो गई है।

साथियो,

कुछ ही हफ्तों में उत्तराखंड में Winter Games का आयोजन भी होना है। देशभर के खिलाड़ी, adventure प्रेमी और खेलों से जुड़े लोग इस आयोजन को लेकर उत्साहित हैं। Skiing हो या Snow-boarding, बर्फ पर होने वाले कई खेलों की तैयारियाँ शुरू हो चुकी हैं। उत्तराखंड ने winter tourism को बढ़ाने के लिए connectivity और infrastructure पर भी focus किया है। Homestay को लेकर नई policy भी बनाई गई है।

साथियो,

सर्दियों में Wed in India अभियान की भी अलग धूम होती है। सर्दियों की सुनहरी धूप हो, पहाड़ से उतरते कोहरे की चादर हो, Destination Wedding के लिए पहाड़ भी अब खूब popular हो रहे हैं। कई शादियां तो अब खास तौर पर गंगा जी के किनारे हो रही हैं।

साथियो,

सर्दियों के इन दिनों में हिमालय की वादियाँ एक ऐसे अनुभव का हिस्सा बन जाती हैं, जो जीवन भर साथ रहता है। अगर आप इस सर्दी में कहीं जाने का विचार कर रहे हैं। तो हिमालय की वादियों का विकल्प जरूर रखिएगा।

साथियो,

कुछ हफ्ते पहले मैं भूटान गया था। ऐसे दौरों में अलग अलग प्रकार के संवाद और चर्चाओं का अवसर मिलता है। अपनी इस यात्रा में मैंने भूटान के राजा, वर्तमान राजा के पिताजी जो खुद भी पहले राजा रह चुके हैं, वहां के प्रधानमंत्री और अन्य लोगों से मुलाकातें की। इस दौरान हर किसी से एक बात जरूर सुनने को मिली। सभी लोग वहाँ Buddhist relics यानि भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेष भेजे जाने को लेकर भारतवासियों का आभार जता रहे थे। मैंने जब भी यह सुना, तो मेरा हृदय गर्व से भर उठा।

साथियो,

भगवान बुद्ध के पावन अवशेषों को लेकर कई अन्य देशों में भी ऐसा ही उत्साह देखने को मिला है। पिछले महीने ही National Museum से इन पवित्र अवशेषों को रूस के कलमीकिया ले जाया गया था। यहां बौद्ध धर्म का विशेष महत्व है। मुझे बताया गया कि इनके दर्शन के लिए रूस के दूरदराज से भी बहुत बड़ी संख्या में लोग वहां पहुंचे। इन पवित्र अवशेषों को मंगोलिया, वियतनाम और थाइलैंड भी ले जाया जा चुका है। हर जगह लोगों का भारी उत्साह देखने को मिला है। इनके दर्शन के लिए थाइलैंड के राजा भी पहुंचे थे। पूरे विश्व में भगवान बुद्ध के पवित्र अवशेषों के प्रति इस प्रकार का गहरा जुड़ाव देखकर मन भावविभोर हो उठता है। यह सुनकर बहुत अच्छा लगता है कि कैसे इस तरह की कोई पहल दुनियाभर के लोगों को आपस में जोड़ने का माध्यम बन जाती है। 

मेरे प्यारे देशवासियो,

मैं आप सभी से हमेशा ‘vocal for local’ के मंत्र को साथ लेकर चलने की बात करता हूँ। अभी कुछ दिनों पहले G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जब विश्व के कई नेताओं को उपहार देने की बात आई, तो मैंने फिर कहा – ‘vocal for local’। मैंने देशवासियों की ओर से विश्व के नेताओं को जो उपहार भेंट किए, उसमें इस भावना का विशेष ध्यान रखा गया। G-20 के दौरान, मैंने दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति को नटराज की कांस्य प्रतिमा भेंट की। ये तमिलनाडु के तंजावुर की सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी चोल कालीन शिल्पकला का अद्भुत  उदाहरण है। कनाडा के प्रधानमंत्री को चांदी के अश्व की प्रतिकृति दी गई। यह राजस्थान के उदयपुर की बेहतरीन शिल्पकला को दर्शाती है। जापान के प्रधानमंत्री को चांदी की बुद्ध की प्रतिकृति भेंट की गई। इसमें तेलंगाना और करीमनगर की प्रसिद्ध Silver Craft की बारीकी का पता चलता है। इटली की प्रधानमंत्री को फूलों की आकृतियों वाला silver mirror उपहार में दिया। ये भी करीमनगर की ही पारंपरिक धातु शिल्पकला को प्रदर्शित करता है। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को मैंने Brass उरली भेंट की, ये केरला के मन्नार का एक उत्कृष्ट शिल्प है। मेरा उद्देश्य था कि दुनिया भारतीय शिल्प, कला और परंपरा के बारे में जानें। और हमारे कारीगरों की प्रतिभा को Global मंच मिले।

साथियो,

मुझे खुशी है कि ‘vocal for local’ की भावना को देश के करोड़ों लोगों ने अपने जीवन का हिस्सा बना लिया है। इस साल जब आप त्योहारों की खरीदारी के लिए बाजार में गए होंगे, तो एक बात आप सभी ने महसूस की होगी। लोगों की पसंद, और घरों में आने वाले सामानों में, एक साफ संकेत दिखाई दे रहा था कि देश स्वदेशी की ओर लौट रहा है। लोग अपने मन से भारतीय उत्पादों को चुन रहे थे। इस बदलाव को छोटे से छोटे दुकानदार ने भी महसूस किया। इस बार युवाओं ने भी ‘vocal for local’ अभियान को गति दी। आने वाले कुछ दिन में Christmas और नए वर्ष पर खरीदारी का नया दौर शुरू होने वाला है। मैं आपको फिर याद दिलाउँगा, ‘vocal for local’ का मंत्र याद रखें, खरीदे वही जो देश में बना हो, बेचें वही जिसमें किसी देशवासी की मेहनत लगी हो।                    

मेरे प्यारे देशवासियो,

भारतीय खेलों के लिहाज से ये महीना super hit रहा है। इस महीने की शुरुआत भारतीय महिला टीम द्वारा आईसीसी महिला विश्व कप जीतने से शुरू हुई। लेकिन उसके बाद भी मैदान पर और ज्यादा action देखने को मिला है। कुछ दिन पहले ही Tokyo में Deaf-Olympics हुए हैं, जहाँ भारत ने अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 20 medals जीते हैं। हमारी महिला खिलाड़ियों ने भी कबड्डी वर्ल्ड कप जीतकर इतिहास ही रच दिया। पूरे tournament में उन्होंने बेहतरीन प्रदर्शन करके, हर भारतवासी का मन जीत लिया। World Boxing Cup Finals में भी हमारे खिलाड़ियों का प्रदर्शन शानदार रहा, जहां उन्होंने 20 medals जीते।

साथियो,

जिस बात की और भी अधिक चर्चा हो रही है, वो है हमारी महिला टीम का Blind Cricket World Cup जीतना। बड़ी बात यह है कि हमारी इस टीम ने बिना एक भी मैच हारे, इस tournament को जीता है। देशवासियो को इस टीम के हर खिलाड़ी पर बहुत गर्व है। मेरी इस टीम से प्रधानमंत्री निवास पर मुलाकात हुई। वाकई इस टीम का हौंसला, उनका जज़्बा हमें बहुत कुछ सिखाता है। यह विजय हमारे खेल इतिहास की सबसे बड़ी जीतों में से एक है, जो हर भारतीय को प्रेरित करती रहेगी।

साथियो,

आजकल हमारे देश में Endurance Sports की एक नई खेल संस्कृति भी तेजी से उभर रही है। Endurance Sports से मेरा मतलब, ऐसी sports activities से है, जिनमें आपकी limits की परख होती है। कुछ साल पहले तक Marathon और Bikethon जैसे खास event कुछ विशेष लोगों तक ही सीमित थे। लेकिन अब बहुत कुछ बदल चुका है। मुझे बताया गया है कि देशभर में हर महीने 1500 से ज्यादा Endurance Sports का आयोजन होता है। इन events में हिस्सा लेने के लिए athletes दूर-दूर तक जाते हैं।

साथियो,

Endurance Sports का ही एक उदाहरण है – Ironman Triathlon आप कल्पना करिए, यदि आपको यह बताया जाए कि आपके पास एक दिन से भी कम समय है और आपको ये तीन काम करने हैं: समंदर में 4 किलोमीटर तक तैरना, 180 किलोमीटर साइकिल चलाना और करीब 42 किलोमीटर की marathon दौड़ लगाना। तो आप सोचेंगे कि ये कैसे संभव है। लेकिन फौलादी हौंसले वाले लोग इस काम को भी सफलतापूर्वक कर ले जाते हैं। इसलिए इसे Ironman Triathlon कहा जाता है।

गोवा में हाल ही में ऐसा ही एक आयोजन किया गया। आजकल इस तरह के आयोजनों में भी लोग बढ़-चढ़कर भागीदारी कर रहे हैं। ऐसी कई और प्रतियोगिताएं भी हैं, जो हमारे युवा साथियों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही हैं। आजकल कई लोग Fit India Sundays on Cycle जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के लिए साथ आ रहे हैं। ये सब ऐसी चीजें हैं, जिनसे fitness को बढ़ावा मिल रहा है।  

साथियो,

आपसे हर महीने मिलना मेरे लिए हमेशा एक नया अनुभव होता है। आपकी गाथाएं, आपके प्रयास, मुझे नए सिरे से प्रेरित करते हैं। अपने संदेशों में आप जो सुझाव भेजते हैं, जो अनुभव साझा करते हैं, उससे हमें इस कार्यक्रम में भारत की विविधता को समेट लेने की प्रेरणा मिलती है। जब हम अगले महीने मिलेंगे तब 2025 खत्म होने वाला होगा। देश के ज्यादातर हिस्सों में अब ठंड भी तेज होती जाएगी। सर्दियों के मौसम में आप अपना और अपने परिवार का विशेष ध्यान रखें। अगले महीने हम कुछ नए विषयों, नए व्यक्तित्वों की चर्चा जरूर करेंगे। बहुत-बहुत धन्यवाद।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इलेक्ट्रॉनिक खिलौना परियोजना
मजबूत स्वदेशी इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग तंत्र के निर्माण के प्रयासों को आगे बढ़ाना

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, सी-डैक, भारतीय खिलौना उद्योग और लेगो समूह ने परियोजना ‘डेवलपमेंट ऑफ इलेक्‍ट्रॉनिक्‍स एंड आईटी बेस्‍ड कंट्रोल और ऑटोमेशन सॉल्‍यूशन फॉर कंज्‍यूमर इलेक्‍ट्रॉनिक गुड्स (टॉय इंडस्‍ट्री)’ के अंतर्गत एक वर्ष का प्रशिक्षण पूरा करने वाले इंजीनियरिंग स्नातकों के दूसरे बैच का दीक्षांत समारोह आयोजित किया। यह परियोजना मंत्रालय के अनुसंधान एवं विकास समूह की एक विशेष पहल है जिसका उद्देश्य प्रोटोटाइप विकसित करके और कम प्रतिनिधित्व वाले समुदायों सहित युवा इंजीनियरों को ऐसे खिलौने डिज़ाइन करने हेतु आवश्यक कौशल से सुसज्जित करके भारतीय इलेक्ट्रॉनिक खिलौना उद्योग के विकास को बढ़ावा देना है।

इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की इस पहल के अंतर्गत, पूरे भारत से अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और पूर्वोत्तर क्षेत्र की पृष्ठभूमि से युवा इंजीनियरों का चयन किया गया और उन्हें एक वर्ष तक अनुसंधान एवं विकास कार्यों में लगाया गया। पहले छह महीने तक उन्हें सी-डैक-नोएडा स्थित ई-खिलौना प्रयोगशाला में काम करने और सीखने का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। इसके बाद, उद्योग जगत की ज़रूरतों के अनुसार खिलौनों के प्रोटोटाइप बनाने के लिए उन्हें छह महीने का प्रशिक्षण दिया गया। प्रतिभागियों को एक वर्ष के लिए 25,000 रुपये का मासिक वृति दी गई।

इस कार्यक्रम के दौरान, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, श्री अमितेश कुमार सिन्हा ने सी-डैक, नोएडा में स्थापित इलेक्ट्रॉनिक खिलौना प्रयोगशाला का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा, “भारत इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों का एक बढ़ता हुआ बाजार है और भारतीय खिलौना उद्योग के तंत्र के निर्माण में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। मुझे बहुत खुशी है कि इसके लिए आधारशिला तैयार हो रही है और इंजीनियरों की अगली पीढ़ी इस दिशा में काम कर रही है। इस कार्यक्रम को और बड़े पैमाने पर औपचारिक रूप दिया जा सकता है ताकि अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल सके और खिलौना उद्योगों को समग्र रूप से बढ़ावा देने में अधिक प्रभावी हो। ई-खिलौनों के लिए सी-डैक-नोएडा में स्थापित उत्कृष्टता केंद्र में राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान, एमएसएच और इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों पर केंद्रित अन्य संस्थान शामिल होंगे। इससे उद्यमिता/स्टार्टअप शुरू करने में मदद मिलेगी। मैं स्नातक करने वाले विद्यार्थियों को उनके भविष्य के लिए शुभकामनाएं देता हूँ।”

29 नवंबर 2025 को इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में आयोजित इस दीक्षांत समारोह में श्री अमितेश कुमार सिन्हा,  इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अपर सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में जीसी आर एंड डी श्रीमती सुनीता वर्मा, सी-डैक, नोएडा के ईडी श्री विवेक खनेजा, टॉयज़ एसोसिएशन ऑफ इंडिया के निदेशक  श्री अनिर्बान गुप्ता, , जीपीए, भारत में लेगो समूह, इलेक्ट्रॉनिक्स खिलौना उद्योग के सदस्य शामिल हुए।

मौसम में बदलाव के मद्देनजर पशुपालन विभाग ने एडवायजरी जारी की
पशुपालन मंत्री ने विभागीय कार्मिकों को तत्पर,सक्रिय तथा संवेदनशील होकर कार्य करने के दिए निर्देश

जयपुर, 29 नवंबर। प्रदेश में धीरे-धीरे सर्दी ने दस्तक देना शुरू कर दिया है तथा दिन और रात्रि के तापमान में परिवर्तन हो रहा है। ऐसे में पशुओं के स्वास्थ्य एवं उत्पादन क्षमता पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने तथा पशु रोगों में वृद्धि होना संभावित है। पशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता देते हुए रोगों की रोकथाम व अन्य सुरक्षात्मक उपाय के लिए उचित प्रबंधन हेतु पशुपालन विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों को एडवायजरी जारी कर दी है। 

पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत ने शीत ऋतु में होने वाले रोगों से पशुधन के बचाव के लिए विभागीय अधिकारी व कर्मचारियों को तत्पर, सक्रिय एवं संवेदनशील रहकर काम करने के निर्देश दिए है। उन्होंने कहा कि मोबाइल चिकित्सा दलों का समुचित उपयोग करते हुये रोग निदान एवं नियंत्रण में लगने वाले समय को न्यूनतम किया जाए। साथ ही वैक्सीन एवं तापसंवेदी औषधियों की गुणवत्ता बनाये रखने हेतु कोल्ड चेन संधारण का पूरा ध्यान रखा जाए।

उन्होंने निर्देश दिए कि पशु चिकित्सा संस्थाओं में सम्भावित पशु रोगों की रोकथाम एवं उपचार हेतु आवश्यक टीकों एवं औषधियों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए तथा आपातकालीन स्थिति के लिये जिला स्तर पर भी इनकी पर्याप्त मात्रा आरक्षित रखी जाए।

श्री कुमावत ने कहा कि सर्दी के मौसम में संक्रामक रोगों की संभावना अधिक रहती है। अतः संक्रामक रोगों की रोकथाम हेतु एन्डेमिक क्षेत्रानुसार समयबद्ध रूप से आवश्यक टीकाकरण कराया जाए तथा पशुपालकों को इन रोगों से बचाव के उपायों के बारे में जागरूक बनाया जाए। उन्होंने गौशालाओं में संधारित पशुधन का नियमित स्वास्थ्य परीक्षण निकटवर्ती पशु चिकित्सक से कराने के निर्देश देते हुए कहा कि गौशाला प्रबंधन के सहयोग से गौशालाओं में टीकाकरण, डीवार्मिंग तथा उपचार आदि कार्य सुनिश्चित किए जाएं। 

पशुपालन मंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों से शीत ऋतु में बीकानेर, जैसलमेर, बाड़मेर, जोधपुर, नागौर आदि जिलों में ऊंटों में श्वास संबंधी बीमारियों का प्रकोप देखा गया है अतः उष्ट्र संपदा की स्वास्थ्य रक्षा के लिए विशेष ध्यान दिया जाए। 

उन्होंने पशु स्वास्थ्य संरक्षण के साथ साथ इस मौसम में पशुओं के आहार और आवास पर भी विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं। पशुओं को ठंडी हवा, वर्षा और नमी से पूरी तरह सुरक्षित रखने के लिए उन्हें सूखे और हवादार स्थानों पर रखा जाए। पशुओं के बिछावन के लिए पर्याप्त मात्रा में सूखा भूसा, गुन्नी बैग या अन्य सूखी सामग्री का उपयोग किया जाए। उन्होंने पॉल्ट्री पक्षियों के लिए शेड के अंदर पर्दे लगाने और आवश्यकतानुसार हीटर के उपयोग पर भी बल दिया। 

उन्होंने कहा कि शीतलहर के दौरान पशुओं की उर्जा आवश्यकता बढ़ जाती है इसलिए उनके आहार में गुड़, अनाज, खल्ली और उर्जा के अन्य स्रोतों की मात्रा बढ़ाई जाए। उन्हें गुनगुना पानी उपलब्ध कराया जाए ताकि वे पर्याप्त जल ग्रहण कर सकें। 

कुमावत ने पशुपालकों से भी अपील की है कि इस मौसम में अपने पशुओं का खास ख्याल रखें। विभाग द्वारा पशुओं की देखभाल को लेकर समय समय पर निर्देश जारी किए जाते हैं पशुपालक उन निर्देशों का पालन करें। जरूरत पड़ने पर तुरंत अपने नजदीक के पशु चिकित्सालय या उप केंद्र में संपर्क करें।

फतेहगढ बिजली चोरी मामले में डिस्कॉम की बडी कार्रवाई
सहायक अभियंता सहित तीन गिरफ्तार

जैसलमेर जिले के फतेहगढ में  फर्जी बिजली तंत्र  से लाखों यूनिट बिजली चोरी का मामला सामने आने के बाद आरोपियों के खिलाफ कडी कार्रवाई की गई है।  जोधपुर डिस्कॉम एवं सतर्कता पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में न केवल पूरा अवैध तंत्र ध्वस्त किया गया बल्कि इसमें संलिप्त पाए गए डिस्कॉम के तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों को  गिरफ्तार भी कर लिया गया है।

अध्यक्ष डिस्कॉम्स, जयपुर, सुश्री आरती डोगरा और प्रबंध निदेशक जोधपुर डिस्कॉम डॉ. भंवरलाल के स्पष्ट निर्देशों पर इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक विशेष उच्चस्तरीय टीम गठित की गई थी। जिसमें अधिशासी अभियंता (आरडीएसएस) जोधपुर डिस्कॉम बाड़मेर, सहायक अभियंता (सतर्कता) बाड़मेर तथा एफटीपीएस थानाधिकारी बाड़मेर शामिल थे। टीम ने फतेहगढ़ के विभिन्न स्थानों पर अभियान चलाते हुए सात कृषि कनेक्शनों की गहन जांच की।

जांच में सभी कनेक्शनों पर गैर-उपयोगिता और अवैध रूप से बिजली चोरी किए जाने की पुष्टि हुई। जांच दल ने मौके से अवैध ट्रांसफॉर्मर हटाकर जब्त किए, अवैध लाइनों और विद्युत संरचनाओं को तुरंत हटवाया तथा बिजली चोरी में संलिप्त उपभोक्ताओं को चिन्हित किया। पूरे प्रकरण का विस्तृत प्रतिवेदन तैयार कर सतर्कता शाखा को भेजा गया।

जांच रिपोर्ट में डिस्कॉम के तत्कालीन चार अधिकारी/कर्मचारियों — अधिशासी अभियंता (सतर्कता) जैसलमेर  सुनील मूलचंदानी, सहायक अभियंता (पावर) फतेहगढ़  अमित मीणा, सहायक राजस्व अधिकारी फतेहगढ़  राजकुमार मीणा तथा कनिष्ठ अभियंता फतेहगढ़  हरीश जयपाल — की भूमिका गंभीर रूप से संदिग्ध पाई गई।

इस आधार पर सतर्कता पुलिस ने विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 135 व 150 के अंतर्गत प्रकरण दर्ज किया। इसी क्रम में  28 नवंबर 2025 को विशेष टीम द्वारा तत्कालीन सहायक अभियंता अमित मीणा (वर्तमान मुख्यालय सिरोही), तत्कालीन सहायक राजस्व अधिकारी राजकुमार मीणा (वर्तमान मुख्यालय चुरू) और तत्कालीन कनिष्ठ अभियंता हरीश जयपाल (वर्तमान मुख्यालय फलौदी) को गिरफ्तार कर लिया गया।

गिरफ्तार कर्मियों को माननीय न्यायालय में पेश किया जाएगा और पीसी रिमांड में लिया जाएगा । जहां से आगे विस्तृत पूछताछ और तकनीकी-आर्थिक पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा।

जोधपुर डिस्कॉम के प्रबंध निदेशक ने कहा कि बिजली चोरी, अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के प्रति विभाग की नीति बिल्कुल स्पष्ट है—शून्य सहनशीलता। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में कठोरतम कार्रवाई की जाएगी और किसी भी स्तर पर दोषी पाए जाने पर बख्शा नहीं जाएगा। उपभोक्ता हित और पारदर्शिता डिस्कॉम की सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसी दिशा में यह बड़ी कार्रवाई की गई है।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार के फ्लैगशिप प्रोग्राम में सर्वजन हिताय
सर्वजन सुखाय की भावना हो रही साकार - 25 फ्लैगशिप योजनाओं के माध्यम से राजस्थान का चहुंमुखी विकास हो रहा सुनिश्चित


जयपुर, 29 नवम्बर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के कुशल नेतृत्व में राज्य सरकार ‘आपणो अग्रणी राजस्थान’ के संकल्प को साकार करने के लिए कृत संकल्पित होकर कार्य कर रही है। राज्य के योजनाबद्ध विकास और प्रत्येक वर्ग के उत्थान के लिए विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने के साथ ही, सरकार ने केन्द्र सरकार द्वारा प्रवर्तित एवं राज्य निधि से संचालित 25 प्रमुख योजनाओं को राज्य सरकार के फ्लैगशिप प्रोग्राम में शामिल किया है। इस फ्लैगशिप प्रोग्राम में ग्रामीण और शहरी विकास से लेकर कृषि, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और राष्ट्र निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाएं शामिल हैं। राज्य की तरक्की का ताना-बाना इन्हीं प्रमुख योजनाओं के इर्द-गिर्द बुना जा रहा है और इससे सर्वजन हिताय – सर्वजन सुखाय की भावना साकार हो रही है। 

राज्य की आधी आबादी का हो रहा सर्वांगीण विकास —

राज्य सरकार ने प्रदेश की आधी आबादी महिलाओं के सर्वांगीण विकास के लिए अपने फ्लैगशिप प्रोग्राम में कई योजनाओं को शामिल किया है। लाड़ो प्रोत्साहन योजना सशक्तीकरण की दिशा में राज्य सरकार का एक बड़ा कदम है। योजना में गरीब परिवारों की बालिकाओं को जन्म से लेकर शिक्षा हासिल करने तक विभिन्न चरणों में डेढ़ लाख रुपये की सहायता दी जाती है। इसी प्रकार महिलाओं को विभिन्न प्रशिक्षण देकर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से नमो ड्रोन दीदी, सोलर दीदी, लखपति दीदी, बैंक सखी, कृषि सखी एवं पशु सखी बनाने का कार्य प्राथमिकता के साथ किया जा रहा है।

वंचित वर्ग के कल्याण को समर्पित राज्य सरकार —

पंडित दीनदयाल उपाध्याय के अंत्योदय के संकल्प को साकार करने के लिए राज्य सरकार ने फ्लैगशिप योजनाओं के माध्यम से वंचित वर्ग का कल्याण सुनिश्चित किया है। मुख्यमंत्री स्वनिधि योजना के तहत राज्य के शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंद एवं असहाय परिवार के असंगठित श्रमिकों के साथ भवन निर्माण श्रमिक, हस्तशिल्प श्रमिक, गिग वर्कर, ट्रांसपोर्ट वर्कर, केयर वर्कर, सफाई श्रमिक, घरेलू श्रमिक आदि को विशेष अल्पावधि ऋण उपलब्ध करवाकर आर्थिक संबल दिया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र परिवारों को खाद्य सुरक्षा से जोड़ने के अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा पोर्टल को पुनः शुरू करते हुए अपात्र लाभार्थियों को सूची से हटाने और नए पात्र लोगों को जोड़ने का व्यापक कार्य किया गया है। प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) के अंतर्गत आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के परिवारों को रियायती आवास उपलब्ध करवाए जा रहे हैं। 

स्वास्थ्य सेवाओं का हो रहा विस्तार, ऊर्जा क्षेत्र में भी ठोस कार्य —

केंद्र सरकार द्वारा शुरू किए गए प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन का उद्देश्य देश में स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार और चिकित्सा ढांचे का सुदृढ़ीकरण करना है। इस अभियान को फ्लैगशिप योजना घोषित करते हुए राज्य सरकार प्रदेश में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार कर रही है। नये स्वास्थ्य केन्द्रों का निर्माण तथा क्रिटिकल केयर अस्पताल एवं प्रयोगशालाओं की स्थापना की जा रही है। वहीं ऊर्जा के क्षेत्र में भी राज्य में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। पीएम-कुसुम योजना के कम्पोनेंट-ए एवं कम्पोनेंट-सी में प्रदेश में धरातल पर तेजी से काम हो रहा है। कम्पोनेंट ए के अन्तर्गत 2 मेगावाट क्षमता तक के सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना कर उन्हें ग्रिड से जोड़ा जा रहा है, वहीं, कम्पोनेंट बी में 7.5 एचपी क्षमता तक के स्वतंत्र सौर कृषि पंपों की स्थापना की जा रही है। कम्पोनेंट सी के तहत ग्रिड से जुड़े 7.5 एचपी क्षमता तक के मौजूदा कृषि पंपों का सौर ऊर्जा से संचालन किया जा रहा है। इसके साथ ही प्रदेश के हर उपभोक्ता को निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के उद्देश्य से संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के अंतर्गत विद्युत वितरण ढांचे को सुदृढ़ करने पर कार्य किया जा रहा है।

पर्यावरण एवं जल संरक्षण के लिए विशेष अभियान —

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान से प्रेरणा लेकर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर राज्य सरकार ने प्रदेश में मिशन हरियालो राजस्थान की शुरुआत की है। इस अभियान के तहत राज्य में पांच साल में 50 करोड़ पौधे लगाए जाएंगे। इसके साथ ही वर्षाजल सहेजने की परम्परा को पुनर्जीवित करने के लिए शुरू किया गया “कर्मभूमि से मातृभूमि“ अभियान प्रदेश में भूजल स्तर की गिरावट को रोकने में महती भूमिका निभा रहा है। इस अभियान के अंतर्गत राज्य सरकार भामाशाहों और प्रवासी राजस्थानियों को साथ लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में रिचार्ज शाफ्ट संरचनाओं का निर्माण करवा रही है। वहीं मुख्यमंत्री जल स्वावलम्बन अभियान 2.0 के तहत पंचायती राज विभाग द्वारा प्रदेश के 4 हजार 700 से अधिक गांवों में वाटर हार्वेस्टिंग स्ट्रक्चर का निर्माण किया जा रहा है। अभियान के तहत एक लाख 10 हजार कार्य करवाने का लक्ष्य है। 

गांवों में बुनियादी सुविधाओं को किया जा रहा मजबूत —

प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए राज्य सरकार ने कई योजनाओं को अपने फ्लैगशिप प्रोग्राम में शामिल किया है। गांवों को गरीबी मुक्त करने के लिए पंडित दीनदयाल उपाध्याय गरीबी मुक्त गांव योजना के तहत चिन्हित गांवों के सभी बीपीएल परिवारों को गरीबी रेखा से ऊपर लाए जाने हेतु विभिन्न गतिविधियां संचालित की जा रही हैं। बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करने के लिए राज्य के 5 हजार से अधिक आबादी वाले ग्रामीण कस्बों में अटल प्रगति पथ के तहत सीमेंट कंक्रीट की सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। वहीं प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के माध्यम से गांवों को मुख्य सड़कों से जोड़ा जा रहा है। जनजातीय और रेगिस्तानी क्षेत्रों में 250 तक की आबादी वाले गांवों तथा अन्य क्षेत्रों में 500 तक की आबादी वाले गांवों को सड़क-पुल निर्माण द्वारा मुख्य मार्गों से जोड़ा जा रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत बेघर परिवारों तथा कच्चे एवं टूटे-फूटे मकानों में रहने वाले ग्रामीण परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने हेतु आर्थिक सहायता दी जा रही है। गांवों के हर घर को नल से जल उपलब्ध कराने के लिए जल-जीवन मिशन के तहत पेयजल कनेक्शन दिए जा रहे हैं। गांवों को खुले में शौच से मुक्त करने के लिए स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) को भी फ्लैगशिप योजना घोषित किया गया है। 

ग्रामीणों का जीवन स्तर हो रहा बेहतर —

राज्य सरकार ने प्रदेश की ग्रामीण आबादी को बेहतर जीवन स्तर उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न योजनाओं के माध्यम से उन्हें लाभान्वित कर रही है। केन्द्र प्रवर्तित प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत किसानों को तारबंदी, डिग्गी, फार्मपौण्ड, जलहोज निर्माण, ग्रीन हाउस, पॉली हाउस, शेड नेट, प्लास्टिक मल्चिंग, लो-टनल एवं ड्रिप-स्प्रिंकलर की स्थापना के लिए अनुदान दिया जा रहा है। साथ ही, भूमिहीन कृषि श्रमिकों को 5 हजार रुपये लागत तक के कृषि यंत्र एवं उपकरण भी दिए जा रहे हैं। वहीं, स्वामित्व योजना में ड्रोन तकनीक से गांव के आबादी क्षेत्र का सर्वेक्षण कर डिजिटल मैप के आधार पर भू-स्वामित्व धारकों को स्वामित्व कार्ड और पट्टा दिया जा रहा है। इन संपत्ति कार्डों ने ग्रामीण परिवारों को उनकी संपत्ति का कानूनी अधिकार प्रदान कर उनके लिए ऋण लेना आसान बना दिया है, जिससे ग्रामीण नागरिक सशक्त हो रहे हैं। 

शिक्षित राजस्थान – विकसित राजस्थान —

राज्य सरकार ने नवीन शिक्षा नीति को प्रभावी रूप से लागू करने तथा विद्यालयों में बेहतर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री शिक्षित राजस्थान अभियान को फ्लैगशिप प्रोग्राम में शामिल किया है। इसके साथ ही, ग्रामीण युवाओं को जागरूक कर उन्हें प्रशिक्षण सुविधायें उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत पर चरणबद्ध रूप से अटल ज्ञान केन्द्र की स्थापना की जा रही है। इस पहल का उद्देश्य 3 हजार से अधिक आबादी वाले ग्राम पंचायत मुख्यालयों में प्रेरकों द्वारा युवाओं को रोजगारपरक प्रशिक्षण देना है।

शहरों का सुनियोजित विकास हो रहा सुनिश्चित —

गांवों के विकास के साथ ही शहरों का भी सुनियोजित विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसलिए स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) को फ्लैगशिप योजनाओं में शामिल किया गया है। इससे शहरी क्षेत्रों के कचरा एवं सीवरेज प्रबंधन कर उन्हें स्वच्छ बनाया जा रहा है। शहरी आबादी को पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अमृत योजना पर तेजी से कार्य हो रहा है।

स्थानीय उत्पादों को मिल रही पहचान, हस्त शिल्प को दिया जा रहा बढ़ावा —

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को लोकल से लेकर ग्लोबल तक नई पहचान दिलाने के लिए पंच गौरव कार्यक्रम की पहल की है, जिसके माध्यम से प्रदेश के प्रत्येक जिले में एक उपज, एक वानस्पतिक प्रजाति, एक उत्पाद, एक पर्यटन स्थल एवं एक खेल को प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसी के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा देश के हस्तशिल्पियों और कलाकारों की कला को सम्मानित करने के लिए शुरू की गई पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 18 व्यवसायों के दस्तकारों को सर्टिफिकेट एवं आई कार्ड तथा टूलकिट के लिए 15 हजार रुपये की सहायता दी जा रही है। साथ ही, 2 लाख रुपये तक का ऋण एवं  ब्याज अनुदान भी दिया जा रहा है। 

सशक्त समाज निर्माण में फुले जी के विचार आज भी प्रासंगिक- डॉ. बैरवा
उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा ने महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती पर अर्पित की श्रद्धांजलि

जयपुर, 29 नवंबर। उप मुख्यमंत्री डॉ. प्रेमचन्द बैरवा ने शुक्रवार को बाईस गोदाम, जयपुर स्थित महात्मा ज्योतिबा फुले जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि शोषितों एवं महिलाओं के सशक्तीकरण, शिक्षा के प्रसार और समाज में समानता स्थापित करने के लिए महात्मा फुले का योगदान अमूल्य है और आज भी सभी के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

डॉ. बैरवा ने बताया कि महात्मा फुले ने जाति प्रथा, असमानता और अशिक्षा जैसी सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आजीवन संघर्ष किया। उनका जीवन संदेश हमें एक न्यायपूर्ण और समतामूलक समाज की दिशा में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्री अविनाश गहलोत, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में गणमान्यजन उपस्थित रहे। सभी ने महात्मा फुले के समाज सुधार के कार्यों और उनके लोककल्याणकारी दृष्टिकोण को नमन किया। उप मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान सरकार समाज के कमजोर वर्गों, महिलाओं और वंचितों के उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है और महात्मा फुले के आदर्श इसी दिशा में हमें निरंतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं।

प्रदेश के 38 जिलों में 310 नए पशु चिकित्सालय भवनों का होगा निर्माण
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत के प्रयासों से 144 करोड़ 15 लाख रुपए मंजूर

जयपुर, 28 नवंबर। राजस्थान को विकास के नए आयाम देने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सार्थक पहल एवं पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत के निर्देशन में प्रदेश की पशु चिकित्सालयों में आधारभूत संरचनाओं के साथ राज्य की पशु चिकित्सा व्यवस्था के समग्र रूप से सुदृढीकरण के लिए निरंतर रूप से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़़ी में राजस्थान सरकार ने राज्य के 310 पशु चिकित्सालयों के नए भवनों के निर्माण के लिए 144 करोड़ 15 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। इन निर्माण कार्यों को प्रारम्भ करने के आदेश जारी करते हुए प्रति पशु चिकित्सालय 46.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके तहत अजमेर, अलवर, बालोतरा, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चितौड़गढ़, चूरू, दौसा, डीग-भरतपुर, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुंनू, जोधपुर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़, कुचामन सिटी, नागौर, पाली, फलौदी, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर, सवाईमाधोपुर, सीकर, सिरौही, श्रीगंगानगर, टोंक व उदयपुर जिले में नए पशु चिकित्सा भवन निर्माण के लिए

 कुल 14415 लाख रुपए की स्वीकृति जारी की गई है। 

पशुपालन मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने बताया कि ग्रामीण विकास निधि के तहत 31 मार्च-2029 तक इन भवनों के निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि जयपुर के 26, भीलवाड़ा, पाली और नागौर के 18-18, झुंझुनू के 17, जोधपुर के 16, चित्तौड़ के 14, कोटपूतली- बहरोड़, बीकानेर, सीकर के 11-11 अलवर, बांसवाड़ा, चुरु के 10-10, टोंक, उदयपुर के 09-09, अजमेर, दौसा, जालौर, बालोतरा के 07-07, बाड़मेर, डीग, कोटा, खैरथल- तिजारा, कुचामन के 06-06, डूंगरपुर के 05, प्रतापगढ़, सवाईमाधोपुर के 04-04, बारां, भरतपुर, बूंदी, जैसलमेर, झालावाड़, फलौदी, सिरोही के 03-03 और ब्यावर, करौली, राजसमंद सलूम्बर तथा श्रीगंगानगर के 02-02 स्थानों पर पशु चिकित्सालय भवन निर्मित करने के लिए प्रत्येक जिले को प्रति चिकित्सालय 46.50 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है।

प्रदेश के रोड नेटवर्क की मजबूती और विस्तार हमारी प्राथमिकता: मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
जयपुर रिंग रोड के उत्तरी हिस्से के निर्माण की तीव्र कार्यवाही करें — प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के जमीन अधिग्रहण को करें शीघ्र प्रारंभ

जयपुर, 27 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में सड़क तंत्र को मजबूत व सुरक्षित बनाने एवं विस्तार देने के लिए डबल इंजन की सरकार बड़ी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए आपसी समन्वय से समय-सीमा में प्रगतिरत परियोजनाओं को पूरा किया जाए।

श्री शर्मा गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में एनएचएआई के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे की जमीन अधिग्रहण के संबंध में एनएचएआई को निर्देश दिए कि इस कार्य को शीघ्र प्रारंभ किया जाए। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए रिंग रोड के उत्तरी हिस्से का निर्माण शीघ्र प्रारंभ करने के लिए जमीन अधिग्रहण के कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने के संबंध में निर्देशित किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कलक्टर जयपुर, जयपुर विकास प्राधिकरण, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग मिलकर जयपुर से जुड़े महत्वपूर्ण सड़क नेटवर्क पर लॉजिस्टिक पार्क, गोदाम और वेयरहाउस विकसित करने के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने 200 फीट चौराहे पर एनएचएआई द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए।

शर्मा को जयपुर-ब्यावर-पचपदरा, जयपुर-किशनगढ़, चितौड़गढ़ बायपास और अलवर-भरतपुर-आगरा सड़क निर्माण के विकास के संबंध में एनएचएआई के अधिकारियों ने जानकारी दी। बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास सहित मुख्यमंत्री कार्यालय, सार्वजनिक निर्माण विभाग और एनएचएआई के अधिकारी उपस्थित रहे।