जयपुर रिंग रोड के उत्तरी हिस्से के निर्माण की तीव्र कार्यवाही करें — प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे के जमीन अधिग्रहण को करें शीघ्र प्रारंभ
जयपुर, 27 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान में सड़क तंत्र को मजबूत व सुरक्षित बनाने एवं विस्तार देने के लिए डबल इंजन की सरकार बड़ी परियोजनाओं पर कार्य कर रही है। उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि गुणवत्ता का ध्यान रखते हुए आपसी समन्वय से समय-सीमा में प्रगतिरत परियोजनाओं को पूरा किया जाए।
श्री शर्मा गुरुवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में एनएचएआई के कार्यों की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सप्रेसवे की जमीन अधिग्रहण के संबंध में एनएचएआई को निर्देश दिए कि इस कार्य को शीघ्र प्रारंभ किया जाए। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को जयपुर शहर की यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए रिंग रोड के उत्तरी हिस्से का निर्माण शीघ्र प्रारंभ करने के लिए जमीन अधिग्रहण के कार्य को प्राथमिकता से पूरा करने के संबंध में निर्देशित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिला कलक्टर जयपुर, जयपुर विकास प्राधिकरण, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण एवं सार्वजनिक निर्माण विभाग मिलकर जयपुर से जुड़े महत्वपूर्ण सड़क नेटवर्क पर लॉजिस्टिक पार्क, गोदाम और वेयरहाउस विकसित करने के संबंध में तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। उन्होंने 200 फीट चौराहे पर एनएचएआई द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों को शीघ्र प्रारंभ करने के निर्देश दिए।
शर्मा को जयपुर-ब्यावर-पचपदरा, जयपुर-किशनगढ़, चितौड़गढ़ बायपास और अलवर-भरतपुर-आगरा सड़क निर्माण के विकास के संबंध में एनएचएआई के अधिकारियों ने जानकारी दी। बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास सहित मुख्यमंत्री कार्यालय, सार्वजनिक निर्माण विभाग और एनएचएआई के अधिकारी उपस्थित रहे।
राज्य सरकार किसानों को उर्वरकों की निर्बाध, पर्याप्त एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध
जयपुर, 27 नवम्बर। राज्य के कृषकों को समयबद्ध एवं पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की इलेक्ट्रॉन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने पंत कृषि भवन में मीडिया से रूबरू होकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों की आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। राज्य सरकार किसानों को उर्वरकों की निर्बाध रूप से पर्याप्त एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं तथा जिन जिलों में यूरिया व डीएपी की कमी की स्थिति बनी है वहां तत्काल प्रभाव से पूर्ति करवायी जा रही है।
डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि प्रदेश में समय पर हुई पर्याप्त वर्षा तथा अक्टूबर माह में दो बार असामयिक वर्षा से भूमि में नमी की उपलब्धता बढ़ी, जिससे कृषकों द्वारा अग्रिम बुवाई में तेजी आई। इस वर्ष 26 नवम्बर तक गत वर्ष की तुलना में 9 लाख हैक्टेयर अधिक क्षेत्र में बुवाई की जा चुकी है। वहीं तिलहनी फसलों में 34 लाख हैक्टेयर एवं खाद्यान्न फसलों में 29 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में प्रथम सिंचाई के साथ यूरिया की टॉप ड्रेसिंग भी की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप यूरिया की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा आवश्यकता से अधिक उर्वरक खरीदने की प्रवृत्ति भी मांग में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। बावजूद इसके राज्य सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में कोई कमी नहीं रखी। पिछले 2 वर्षों में डीएपी की औसत आपूर्ति 2.53 लाख मैट्रिक टन करायी जा चुकी है, जो पूर्व सरकार के 5 वर्षीय औसत से अधिक है।
कृषि मंत्री ने बताया कि रबी सीजन के पहले दो महीनों अक्टूबर व नवम्बर में 7.53 लाख मैट्रिक टन की मांग के विरुद्ध 9.15 लाख मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध करवा दिया गया है। इसके अतिरिक्त 24 हजार मैट्रिक टन की आपूर्ति जारी है तथा आगामी दो दिनों में 31 हजार मैट्रिक टन यूरिया और उपलब्ध होने से माह के अंत तक कुल उपलब्धता 9.70 लाख मैट्रिक टन से अधिक हो जाएगी, जो मांग से 29 प्रतिशत अधिक है।
प्रदेश में अब तक लगभग 95 लाख हैक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हो चुकी है, जिसके अनुरूप लगभग 7 लाख मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है, जबकि 9.15 लाख मैट्रिक टन पहले ही किसानों को उपलब्ध करवा दिया गया है और निरंतर आपूर्ति जारी है।
डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि विभाग द्वारा उर्वरकों का समान वितरण सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक विक्रय केंद्र पर विभागीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। किसानों को टोकन सिस्टम के माध्यम से उर्वरक वितरण करवाया जा रहा है। कई जिलों जैसे बांरा, झालावाड़, बूंदी, सवाईमाधोपुर, अलवर, भीलवाड़ा आदि में मांग से अधिक यूरिया की उपलब्धता करवाई गई है। प्रतापगढ़ जिले के धरियावद क्षेत्र में भी 2000 मैट्रिक टन यूरिया की शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
कोटपूतली-बहरोड़ में 8500 मैट्रिक टन डीएपी एवं 16 हजार मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है तथा नवम्बर माह के शेष दिनों में लगभग 50 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार से समन्वय कर आपूर्तिकर्ता कंपनियों को निर्देशित किया गया है। दिसंबर 2025 हेतु स्वीकृत मांग 3.80 लाख मैट्रिक टन को बढ़ाकर 4.50 लाख मैट्रिक टन करने का आग्रह भी रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को भेज दिया गया है।
उन्होंने बताया कि उर्वरकों की कालाबाजारी एवं अनियमितताओं पर कड़ा शिकंजा कसते हुए वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 90 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं, 98 बिक्री प्राधिकार पत्र निलंबित अथवा निरस्त किए गए हैं तथा 1069 कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री को ‘मातृ भू-सेवक’ की मानद उपाधि से किया गया अलंकृत राज्य सरकार जैन तीर्थाें के विकास के लिए प्रतिबद्ध
जयपुर, 27 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ज्ञान और अहिंसा का दीपक जलाते हुए समाज का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या और करूणा का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सभी धर्मों के विकास और संरक्षण के लिए समर्पित है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे जैन मुनियों के उपदेशों को न केवल सुने, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारें।
श्री शर्मा गुरूवार को सांगानेर कैम्प कार्यालय में आयोजित आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज की दिव्य देशना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन मुनियों का जीवन साधना से पूर्ण है, वे सांसारिक सुखों को त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज के जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची महानता विनम्रता, सच्ची शक्ति अहिंसा और सच्चा सुख त्याग में है।
मुख्यमंत्री द्वारा जैन मुनियों की पद वंदना
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सभी संतो की पद वंदना करते हुए उनका हाथ थामे एसएफएस मानसरोवर स्थित आदिनाथ मंदिर से सांगानेर कैम्प कार्यालय के कार्यक्रम में लेकर आए। इस दौरान मार्ग में पुष्प वर्षा एवं बैंड वादन कर उनका स्वागत-अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में श्री शर्मा को ‘मातृ भू सेवक’ की मानद उपाधि से अलंकृत भी किया गया। इससे पहले श्री शर्मा ने एसएफएस मानसरोवर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
जैन धर्म के पंच महाव्रत ने दुनिया को दिया महत्वपूर्ण संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। इस धर्म के 24 तीर्थंकरों ने समय-समय पर मानव जाति को सही मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता ‘अहिंसा परमो धर्म’ है। ये एक वाक्य नहीं बल्कि सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। आज पूरी दुनिया हिंसा से जूझ रही है और जैन धर्म का यह संदेश वर्तमान परिवेश में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के पंच महाव्रत- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह आज की भौतिकतावादी दुनिया में महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। जैन धर्म हमें बताता है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, आन्तरिक संतोष में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जैन धर्म के मूल्यों एवं शिक्षाओं को प्रसारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जैन समाज के तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सड़कें, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। कार्यक्रम में श्री शर्मा ने आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज के प्रवचनों का श्रवण भी किया।
इस अवसर पर आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज, आचार्य शंशाक जी महाराज, सहकारिता राज्यमंत्री श्री गौतम कुमार दक, जयपुर ग्रेटर उप महापौर श्री पुनीत कर्णावत सहित जैन मुनि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
डॉ. अभिषेक वर्मा, जिनका पदcurrently राष्ट्रीय समन्वयक (National Convener) के रूप में शिवसेना (NDA) में है, ने पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता और प्रभावशाली नेता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में शिवसेना ने न केवल संगठनात्मक मजबूती पाई है, बल्कि विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मोर्चों पर भी अपनी पहचान मजबूती से बनाई है।
डॉ. वर्मा ने पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सशक्त रणनीतियाँ अपनाई हैं, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर छवि और प्रभाव दोनों में वृद्धि हुई है। उनके प्रयासों से शिवसेना ने अनेक राज्यों में विस्तार किया है और युवाओं तथा ग्रामीन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है।
वर्मा जी के नेतृत्व में शिवसेना ने सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण, और राष्ट्रीय एकता के लिए कई पहलें शुरू की हैं। उन्होंने स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने में पार्टी की भूमिका को सक्रिय बनाए रखा और जनता के बीच पार्टी की विश्वसनीयता को बढ़ाया है।
डॉ. अभिषेक वर्मा का योगदान केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक व सांस्कृतिक विकास के पक्षधर भी हैं। उनकी दूरदर्शिता और समर्पित सेवा ने शिवसेना को एक मजबूत और प्रगतिशील पार्टी के रूप में स्थापित किया है।
डॉ. अभिषेक वर्मा को सितंबर 2025 में राम जन्मभूमि ट्रस्ट (अयोध्या) के अध्यक्ष स्वामी नृत्य गोपाल दास महाराज ने उनकी हिंदुत्व और सनातन धर्म की सुरक्षा एवं प्रचार में योगदान के लिए “सनातन योद्धा” का सम्मानित खिताब दिया। यह खिताब उनके सनातन धर्म के संरक्षण और प्रसार के प्रति अटूट समर्पण और सामाजिक व सांस्कृतिक जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण मान्यता है। डॉ. वर्मा ने शिवसेना (NDA) के प्रमुख राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई है, जहां उन्होंने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर व्यापक कार्य किया है।
उनके इस सम्मान ने उन्हें सनातन धर्म के संरक्षण और प्रचार में एक प्रेरणादायक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है, जो देश में सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं
धरोहर संरक्षण और सांस्कृतिक उत्थान के लिए किए गए कार्य
डॉ. अभिषेक वर्मा ने धरोहर संरक्षण और सांस्कृतिक उत्थान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। वे मानते हैं कि भारतीय सनातन संस्कृति और उसकी पारंपरिक धरोहर को संरक्षित करना न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है।
उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण के लिए अभियान चलाए हैं, जिनका उद्देश्य इन धरोहरों को सुरक्षित रखना और उनकी महत्ता को समाज के सामने प्रस्तुत करना है।
डॉ. वर्मा ने लोक कला, परंपरागत संगीत और नृत्य आदि सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को पुनर्जीवित करने हेतु कार्यशालाएँ और महोत्सव आयोजित किए हैं, ताकि ये सांस्कृतिक धरोहरें जीवित रहें और युवाओं में इनके प्रति रुचि बढ़े।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा देने और महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक चिंतन को पाठ्यक्रम में शामिल करने के प्रयास किए हैं, जिससे यह संस्कृति लंबे समय तक संरक्षित रह सके।
डॉ. अभिषेक वर्मा का जीवन परिचय और उनका धार्मिक दृष्टिकोण
डॉ. अभिषेक वर्मा एक समर्पित समाजसेवी और सनातन संस्कृति के प्रमुख प्रचारक हैं। उनका जीवन समाज सेवा, धर्म प्रचार और सांस्कृतिक उत्थान के लिए समर्पित रहा है। वे न केवल राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि एक गहरे धार्मिक चिन्तक और सामाजिक सुधारक भी हैं।
डॉ. वर्मा का धार्मिक दृष्टिकोण सनातन धर्म के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें वे धर्म को केवल धार्मिक कृत्यों तक सीमित न रखते हुए, इसे एक व्यापक जीवन दर्शन मानते हैं। उनका मानना है कि सनातन धर्म मानवता, नैतिकता, और सामाजिक समरसता का मूल आधार है, जो आज के युग में भी प्रासंगिक है।
उनके विचारों में धर्म और विज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वे धार्मिक शिक्षाओं को आधुनिक जीवन के अनुरूप ढालने और युवाओं तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। डॉ. वर्मा की सोच में धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि कार्य और जीवन के मूल्यों का स्तंभ है।
उनकी भूमिका सनातन संस्कृति के जागरूकता प्रवर्तक के रूप में सबसे महत्वपूर्ण रही है, जहां उन्होंने अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म और संस्कृति के प्रति लोगों में विश्वास और लगाव बढ़ाया है।
सामाजिक समरसता और धर्म चेतना के लिए प्रयास
डॉ. अभिषेक वर्मा ने सामाजिक समरसता और धर्म चेतना के लिए अनेक महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। वे मानते हैं कि सनातन धर्म का सार समाज में एकता, भाईचारा और सहिष्णुता है, जो सभी धर्मों और जातियों के बीच मेलजोल को बढ़ावा देता है। इसी दृष्टिकोण से वे धर्म चेतना को जागृत करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने विभिन्न धार्मिक और सामुदायिक आयोजनों में भाग लेकर लोगों को सामाजिक सद्भाव और सहअस्तित्व के महत्व को समझाया है। उनके कार्यक्रमों में धर्म के नाम पर होने वाली कट्टरता और विभाजन को खत्म करने पर विशेष जोर रहा है।
डॉ. वर्मा ने शिक्षा, संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुँचाने का कार्य किया है, जिससे सामाजिक असमानताओं और भेदभाव को कम किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े वर्गों में धर्म चेतना को फैलाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई है।
उनके प्रयासों से कई समुदायों में सहयोग और आपसी समझ बनी है, जो सामाजिक समरसता को मजबूत करता है। डॉ. अभिषेक वर्मा की ये पहल सामाजिक सौहार्द्र को बढ़ावा देने और धर्म के मार्ग पर लोगों को सही दिशा देने में अहम साबित हुई हैं।
युवाओं में सनातन संस्कृति जागरूकता हेतु पहल
डॉ. अभिषेक वर्मा युवाओं में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर पहल करते रहते हैं। वे मानते हैं कि युवा वर्ग ही किसी भी संस्कृति एवं धर्म के सतत विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए उन्होंने युवाओं को सनातन धर्म की गहराई और उसके जीवन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने के लिए कई शिक्षाप्रद और संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
उन्होंने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और युवा संगठनों में विशेष कार्यशालाओं और सेमिनारों का आयोजन किया है, जहां युवाओं को धर्म के मूल सिद्धांतों के साथ-साथ आधुनिक जीवन में सनातन संस्कृति का महत्व समझाया जाता है। इसके अलावा, वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
डॉ. वर्मा ने सोशल मीडिया पर सनातन धर्म से संबंधित सामग्री साझा कर युवाओं को जोड़ने का काम किया है, जिससे वे धर्म के प्रति जागरूक और प्रेरित हों। इसके साथ ही, उन्होंने युवाओं के लिए स्वच्छता अभियान, सेवा कार्य, और सामाजिक समरसता के कार्यक्रम भी प्रारंभ किए हैं ताकि वे धर्म के सैद्धांतिक और व्यवहारिक दोनों पहलुओं को समझ सकें।
इन पहलों के माध्यम से, डॉ. अभिषेक वर्मा ने युवाओं को न केवल सनातन संस्कृति का संरक्षक बनने के लिए प्रेरित किया है, बल्कि उन्हें समाज में सही दिशा प्रदान करने का भी कार्य किया है। उनकी ये गतिविधियाँ युवा वर्ग के बीच धर्म और संस्कृति की जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई हैं।
प्रमुख कार्यक्रम और सम्मेलन जिनमें डॉ. वर्मा ने भाग लिया
डॉ. अभिषेक वर्मा ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कई प्रमुख कार्यक्रमों और सम्मेलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इन आयोजनों में उन्होंने धर्म, संस्कृति, और सामाजिक समरसता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए और अपने विचार साझा किए।
उन्होंने निरंजन अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद जी महाराज के साथ भेंट की, जहां धर्म और संस्कृति के उत्थान पर गहन चर्चा हुई। इसके अलावा, वे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी जी महाराज से आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए भी विशेष कार्यक्रमों में शामिल हुए।
डॉ. वर्मा ने विभिन्न धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित सम्मेलनों में हिस्सा लेकर सनातन धर्म के आधारभूत मूल्य और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर बल दिया। वे कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के धर्म संसदों और सत्संगों में मुख्य अतिथि या वक्ता के रूप में उपस्थित रहे हैं।
उनकी भागीदारी न केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित रही, बल्कि वे सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण, और युवा जागरूकता कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। इनके माध्यम से उन्होंने सनातन धर्म के प्रति लोगों में विश्वास और श्रद्धा बढ़ाने का कार्य किया है।
सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में डॉ. वर्मा की भूमिका
सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में डॉ. अभिषेक वर्मा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रही है। वे न केवल सनातन धर्म के गहरे सिद्धांतों को समझते हैं, बल्कि उन्हें सरल और प्रभावशाली तरीके से आम जनता तक पहुँचाने में भी सक्षम हैं। डॉ. वर्मा ने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का प्रचार किया है।
वे समय-समय पर धर्मसभा, सत्संग, और जन जागरण अभियानों का आयोजन करते हैं, जिसमें वे सनातन धर्म की प्राचीन शिक्षाओं तथा आधुनिक समाज में उनके महत्व को स्पष्ट करते हैं। उनका मानना है कि सनातन धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवनशैली और सामाजिक समरसता का सूत्र है।
डॉ. वर्मा ने सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, और समाचार माध्यमों का भी उपयोग करते हुए सनातन संस्कृति की चर्चा को व्यापक बनाया है। उन्होंने युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए अनेक कार्यशालाएँ, सेमिनार, और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिससे सनातन धर्म की दीर्घकालीन स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
इसके अतिरिक्त, डॉ. अभिषेक वर्मा कहीं भी अवसर मिलने पर सनातन धर्म की महत्ता, उसकी आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्य को उजागर करते रहते हैं। उनकी सक्रिय भागीदारी ने सनातन धर्म के प्रचार को एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया है, जो आज देश के विभिन्न हिस्सों में गूंज रहा है।
डॉ. अभिषेक वर्मा का सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और सेवा अतीव प्रेरणादायक है। सनातन धर्म की गहन समझ, उसकी रक्षा एवं प्रसार के लिए उनका योगदान अद्भुत है। वे न केवल धर्म के प्रचारक हैं, बल्कि सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक भी हैं।डॉ. अभिषेक वर्मा सनातन संस्कृति के दृढ़ समर्थक एवं प्रचारक हैं। उनका जीवन सनातन धर्म की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिये समर्पित है। वे मानते हैं कि सनातन संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक समग्र दर्शन है जो सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। उनके प्रयासों से अनेक संगठनों और समाजों में धर्म की नई पहचान बनी है तथा उन्होंने जन-जागरण के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं
26 नवंबर 2025 को शिवसेना (NDA) के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा के निवास पर निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद जी महाराज का पावन आगमन हुआ। स्वामी जी ने वर्मा परिवार को स्नेहपूर्ण आशीर्वाद प्रदान किया।
भेंट के दौरान स्वामी कैलाशानंद जी महाराज ने डॉ. अभिषेक वर्मा द्वारा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और जन-जागरण हेतु किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना की। स्वामी जी ने कहा कि ऐसे प्रयास संस्कार, धर्म-चेतना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करते हैं और लोककल्याण की दिशा में सकारात्मक प्रेरणा देते हैं।
विचार-विमर्श में सनातन मूल्यों, सामाजिक समरसता और समाज-कल्याण से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। स्वामी जी ने वर्मा परिवार को, विशेष रूप से श्रीमती अंका वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा को, स्नेहपूर्ण आशीर्वाद प्रदान करते हुए स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर प्रगति की मंगलकामनाएँ दीं।