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अरावली बचाओ आंदोलन : पूरे राजस्थान में विरोध का विस्तार
राजस्थान में अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा को लेकर भारी जन-आंदोलन फैल गया है। यह संघर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की नई परिभाषा और खनन नियमों को लेकर शुरू हुआ, जिससे...

राजस्थान में अरावली पर्वतमाला की सुरक्षा को लेकर भारी जन-आंदोलन फैल गया है। यह संघर्ष सुप्रीम कोर्ट द्वारा अरावली की नई परिभाषा और खनन नियमों को लेकर शुरू हुआ, जिससे लोग डर रहे हैं कि पर्वतमाला के एक बड़े हिस्से को खनन और विकास गतिविधियों के लिए खुला छोड़ दिया जाएगा। The New Indian Express

📌 आंदोलन की मुख्य घटनाएँ

  • पदयात्रा और आंदोलन:
    माउंट आबू से करीब 1000 किमी लंबी पदयात्रा की शुरुआत हुई, जिसमें संत और आम लोग शामिल होकर अरावली संरक्षण की मांग कर रहे हैं। यह पैदल यात्रा राज्य के कई इलाकों से होकर गुज़र रही है और लोगों में जागरूकता फैल रही है। Navbharat Times
  • जन आंदोलन और धरना-प्रदर्शन:
    उदयपुर, भीलवाड़ा सहित कई शहरों में जनता ने अरावली बचाओ के लिए प्रदर्शन किए हैं और प्रशासन के समक्ष अपनी आपत्तियों को रखा है। Punjab Kesari Rajasthan
  • सुप्रीम कोर्ट की चुनौती:
    अरावली की नई परिभाषा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है, जिसमें याचिकाकर्ताओं ने कहा है कि इससे पर्यावरणीय सुरक्षा कमजोर पड़ेगी। Navbharat Times
  • राजनीतिक तनाव:
    कांग्रेस ने इस मुद्दे को बड़ा जन-राजनीतिक मुद्दा बनाया है और 19 जिलों में आंदोलन छेड़ने का ऐलान किया है। Prabhat Khabar
  • अन्य विवाद:
    भीलवाड़ा में प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा है और सरकार पर आरोप लगाया है कि वह अरावली संरक्षण में कमजोर कदम उठा रही है। Pratahkal

🗣️ मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का बयान

राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अरावली बचाओ आंदोलन पर स्पष्ट बयान दिया है। उन्होंने कहा:

  • “अरावली हमारी पहचान और राजस्थान की ‘साँस’ है।”
  • उनकी सरकार अरावली को किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या नुकसान नहीं होने देगी।
  • सीएम ने यह भी कहा कि वे “गिरिराज जी के भक्त” हैं और एक-एक पत्थर की रक्षा का संकल्प लिया है। www.ndtv.com+1

उनके अनुसार, अरावली सिर्फ भू-कण नहीं है, बल्कि यह राजस्थान की पारिस्थितिकी और जीवन-रेखा का प्रतीक है, जिसे कोई भी नुकसान नहीं पहुँचा सकता। www.ndtv.com


📌 मुद्दे के पीछे की वजह

इस आंदोलन का मुख्य कारण सुप्रीम कोर्ट और केंद्र सरकार की नई अरावली परिभाषा है, जिसके तहत केवल 100 मीटर से ऊपर वाली पहाड़ियों को वैध अरावली माना जा रहा है। विरोधियों का कहना है कि इससे लगभग 90% अरावली को संरक्षण से बाहर रखा जा सकता है, जिससे वे खनन और अन्य गतिविधियों के लिए खुल सकते हैं — और यह पर्यावरण को गंभीर जोखिम में डाल सकता है। The New Indian Express

विपक्ष और पर्यावरण संगठनों का कहना है कि यह निर्णय अरावली के स्वाभाविक दायरे को छोटा कर देने जैसा है, जिससे भूपृष्ठीय जल, जैव विविधता और रेगिस्तानी विस्तार जैसी गंभीर समस्याएँ उत्पन्न हो सकती हैं। The New Indian Express


📌 विरोध के बीच विवाद भी जारी

कई आलोचकों ने अरावली बचाओ आंदोलन पर यह आरोप भी लगाया है कि विपक्ष इसका इस्तेमाल राजनीतिक लाभ के लिए कर रहा है। वे कहते हैं कि असली चिंता पहाड़ों की है या पिछले वर्षों में अवैध खनन से जुड़ी संपत्तियों की रक्षा की।

सुशासन दिवस के अवसर पर पशुपालन विभाग के अधिकारियों-कर्मचारियों ने ली सुशासन की शपथ
जयपुर, 25 दिसम्बर। प्रदेश में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आज सुशासन दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पशुपालन विभाग में आयोजित...

जयपुर, 25 दिसम्बर। प्रदेश में पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के अवसर पर आज सुशासन दिवस मनाया जा रहा है। इस अवसर पर पशुपालन विभाग में आयोजित कार्यक्रम में स्वर्गीय प्रधानमंत्री के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी गई तथा पशुपालन, गोपालन और मत्स्य शासन सचिव डॉ समित शर्मा ने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही की शपथ दिलाई। कार्यक्रम में पशुपालन और मत्स्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने सुशासन की शपथ ली।

कार्यक्रम में उपस्थित अधिकारियों-कर्मचारियों ने संविधान के मूल्यों के अनुरूप ईमानदारी, निष्पक्षता और जनहित को सर्वोपरि रखते हुए कार्य करने का संकल्प लिया। शपथ के माध्यम से भ्रष्टाचार के विरुद्ध शून्य सहनशीलता अपनाने, समयबद्ध एवं प्रभावी प्रशासन सुनिश्चित करने तथा सरकारी योजनाओं और सेवाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने का संकल्प व्यक्त किया गया।

इस अवसर पर शासन सचिव डॉ समित शर्मा ने कहा कि सुशासन केवल एक अवधारणा नहीं, बल्कि शासन की वह कार्य संस्कृति है जिसमें पारदर्शिता, जवाबदेही और संवेदनशीलता के साथ आमजन तक योजनाओं को लाभ पहुंचाया जाता है। श्रद्धेय अटल जी का सुशासन मॉडल हम सभी के लिए पथप्रदर्शक है। वे एक कुशल राजनीतिज्ञ, प्रखर वक्ता और दूरदर्शी नेता थे, जिनके नेतृत्व ने देश में सुशासन की अनुकरणीय मिसाल प्रस्तुत की। अगर हम सभी इस कार्य शैली को पूरी तरह अपनाकर कार्य करें तो नागरिकों की समस्याओं के त्वरित समाधान निकल सकता है और आमजन तक सरकार की हर सुविधा और योजना की पहुंच सुनिश्चित हो सकती है।

स्व. वाजपेयी के जीवन और दर्शन में जनसेवा की सीख -प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र लोकतांत्रिक शासन की आत्मा – मुख्यमंत्री
शासन सचिवालय में सुशासन दिवस पर शपथ कार्यक्रम -विश्वास, संवाद और परिणाम सुशासन के आधार

जयपुर, 25 दिसम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने गुरुवार को शासन सचिवालय में भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती ‘सुशासन दिवस’ के अवसर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को सुशासन की शपथ दिलाई। 

श्री शर्मा ने कहा कि स्व. वाजपेयी का जीवन और दर्शन हमें सिखाता है कि शासन और प्रशासन का ध्येय जनसेवा होना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह आयोजन हमारे राज्य के पारदर्शी, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित प्रशासन का प्रतीक है। सुशासन एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया है, जिसके केन्द्र में योजनाओं की सफल क्रियान्विति से अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति को लाभान्वित करना है। 

संवेदनशील अधिकारी, उत्तरदायी सरकार से ही सुशासन

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि सरकार का अभाव और दबाव दोनों ही नहीं होने चाहिए। इसी मंत्र के साथ राज्य सरकार कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि सुशासन तभी संभव है जब नियम स्पष्ट हों, अधिकारी संवेदनशील हों और सरकार उत्तरदायी बने। उन्होंने कहा कि सुशासन ऐसी व्यवस्था है जहां जनता की जरूरतों को समझकर उनको समयबद्ध और प्रभावी सेवाएं प्रदान की जाएं। सुशासन का आधार विश्वास, संवाद और परिणाम के तीन स्तंभों पर टिका है। 

सेवा वितरण को सरल और पारदर्शी बनाया

श्री शर्मा ने कहा कि सुशासन का उद्देश्य तभी पूरा होगा जब किसान, श्रमिक, महिला, युवा और वंचित सहित सभी वर्ग अनुभव करें कि सरकार उनके साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सेवा वितरण को सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में ग्रामीण एवं शहरी सेवा शिविरों का आयोजन कर लोगों की समस्याओं का निस्तारण कर रही है। इनके माध्यम से अब तक 1 करोड़ से अधिक लोग लाभान्वित हो चुके हैं। साथ ही, राजस्थान लोक सेवाओं के प्रदान की गारंटी अधिनियम के तहत विगत 2 वर्षों में 3 करोड़ 23 लाख से अधिक आवेदनों का सफलतापूर्वक निस्तारण किया गया है। 

ई-गवर्नेंस पारदर्शिता का सबसे बड़ा माध्यम

मुख्यमंत्री ने कहा कि ई-गवर्नेंस पारदर्शिता का सबसे बड़ा माध्यम है। ई-पोर्टल्स, एसएसओ पोर्टल और मोबाइल आधारित सुविधाओं ने नागरिकों के समय, धन और ऊर्जा की बचत की है जिससे नागरिकों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से मुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र लोकतांत्रिक शासन की आत्मा होती है। प्रदेश में राजस्थान संपर्क पोर्टल, त्रिस्तरीय जनसुनवाई और मुख्यमंत्री जनसुनवाई के माध्यम से 

लोगों की समस्याओं की प्रभावी सुनवाई कर उनका समयबद्ध निस्तारण किया जा रहा है। विगत 2 वर्षों में हमने 65 लाख से अधिक जन-शिकायतों का निस्तारण किया है।

अधिकारी-कर्मचारी विकास को बनाएं सर्वस्पर्शी

मुख्यमंत्री ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों से आह्वान करते हुए कहा कि तकनीक और संवेदनशीलता से राजस्थान को सुशासन के मामले में देश का सिरमौर बनाएं। ऐसे राजस्थान का निर्माण करें जहां विकास सर्वस्पर्शी हो। श्री शर्मा ने कहा कि शासन सचिवालय के माध्यम से करोड़ों राजस्थानियों की आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास किया जाता है। ये चूना-पत्थर से बनी इमारत नहीं है, बल्कि जनता की आशा और विश्वास है। हमारा कर्तव्य है कि यहां हर व्यक्ति को समस्या का त्वरित और बेहतर समाधान मिले। उन्होंने कहा कि अधिकारियों और कर्मचारियों की निष्ठा और समर्पण के साथ सेवा ही विकसित राजस्थान-2047 का मार्ग प्रशस्त करेगी। 

मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का मानना है कि भारत बदल रहा है और तेजी से बदल रहा है। आमजन का सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं में विश्वास दृढ़ हुआ है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में राज्य सरकार के दो वर्ष पूर्ण होने पर नव उत्थान-नई पहचान, बढ़ता राजस्थान-हमारा राजस्थान के माध्यम से सुशासन को मनाया जा रहा है। 200 विकास रथों के जरिए सभी ग्राम पंचायत, पंचायत समिति, नगरीय निकायों में विकसित राजस्थान की यात्रा को पहुंचाया जा रहा है। 

इस दौरान अतिरिक्त मुख्य सचिव जल संसाधन श्री अभय कुमार सहित विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव और अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम से वीसी के जरिए जिला, उपखंड एवं ग्राम पंचायत के अधिकारी एवं कार्मिक भी जुड़े। 

इससे पहले मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री स्व. वाजपेयी को मुख्यमंत्री निवास पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया।