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RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान: भारत की तेज़ प्रगति से विश्व प्रभावित, राष्ट्रवाद पर घबराहट
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जयपुर दौरे के दौरान कहा कि भारत अब वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए एक भरोसेमंद शक्ति बन चुका है। उन्होंने राष्ट्रवाद से जुड़े खतरों...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जयपुर में आयोजित एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दीनदयाल स्मृति व्याख्यान में कहा कि आज पूरी दुनिया वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने भारत की तेज़ प्रगति, वर्तमान वैश्विक अस्थिरता और राष्ट्रवाद के कारण बढ़ते संघर्षों पर भी विशद चिंता जाहिर की। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब मील-दर-मील आगे बढ़ रहा है और विश्व मंच पर एक नई शक्ति के रूप में उभर चुका है.

भारत पर वैश्विक भरोसा

मोहन भागवत ने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान दुनिया तलाश रही है, उनका जवाब भारत के पास है। भारत में वह विचार शक्ति है, जो विश्व की समस्याओं का समाधान देने में सक्षम है। उन्होंने कहा, “दुनिया आज भारत की ओर देख रही है। जिन समस्याओं का समाधान दुनिया खोज रही है, उनका उत्तर भारत के पास है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत की तेज़ प्रगति के पीछे उसकी सांस्कृतिक और पारिवारिक व्यवस्था की ताकत है, जिसने उसे वैश्विक अस्थिरताओं से अपेक्षाकृत कम प्रभावित किया है.

राष्ट्रवाद और वैश्विक अस्थिरता पर चिंता

भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि आज वैश्विक स्तर पर संघर्ष के पीछे राष्ट्रवाद की अति और शक्ति के संतुलन का बिगड़ना मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रहित आक्रामक हो जाता है, तो उसके परिणाम विनाशकारी युद्ध के रूप में सामने आते हैं। इतिहास में दोनों विश्व युद्ध राष्ट्रवाद की एक आक्रामक धारा के कारण हुए, इसलिए अंतरराष्ट्रीयवाद की आवश्यकता और भारतीय दृष्टिकोण, जैसे “वसुधैव कुटुंबकम”, आज के समय की जरूरत बन चुके हैं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी शक्तिशाली देशों के हितों की टकराहट होती है, उसका सीधा असर कमजोर देशों पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का बोझ सबसे अधिक ऐसे देशों को झेलना पड़ता है, जिनके पास बहुत अधिक साधन नहीं होते.

गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन और युवाओं को संदेश

अपनी जयपुर यात्रा के दौरान मोहन भागवत ने गोविंद देव जी मंदिर में विधिविधान से दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए युवाओं को समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आस्था और भारतीय संस्कृति को संरक्षित करना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी भी है, क्योंकि यही सामाजिक स्थायित्व और सामूहिक विकास का आधार है.​​

भागवत ने गोविंद देव जी मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संस्थाएं समाज को एक दिशा और मजबूती देने का काम करती हैं। ऐसे धार्मिक स्थलों पर आस्था और संस्कृति का सजीव रूप देखने को मिलता है, जिसे युवाओं तक पहुंचाना बेहद जरूरी है.

निष्कर्ष

जयपुर में मोहन भागवत का यह स्पष्ट संदेश था कि भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और नैतिक शक्ति के कारण पूरी दुनिया अब समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने राष्ट्रीय अस्मिता, वैश्विक दृष्टिकोण, युवा जिम्मेदारी और आस्था के संगम को ही शांति, स्थिरता और प्रगति का आधार बताया.

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