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जयपुर में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स – उद्घाटन समारोह और पूर्ण विवरण
युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ाने तथा उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का आयोजन 24...

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 (केआईयूजी) का आयोजन राजस्थान के विभिन्न शहरों में 24 नवम्बर से 5 दिसम्बर 2025 तक किया जा रहा है। यह देश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय स्तरीय खेल आयोजन है, जिसमें 200 से अधिक विश्वविद्यालयों के 7000+ एथलीट भाग लेंगे और 240 से अधिक स्वर्ण पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। जयपुर में एसएमएस स्टेडियम, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, जोधपुर, बीकानेर जैसे शहरों में यह आयोजन भव्य रूप में होगा.


  • स्थान: एसएमएस स्टेडियम, जयपुर
  • दिनांक: 24 नवम्बर 2025
  • विशेषताएँ:
    • देशभक्ति और राजस्थानी लोक गीत-नृत्य
    • पुलिस बैंड, सेल्फी पॉइंट, ड्रोन शो
    • मशहूर कलाकारों की प्रस्तुतियां
    • खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की उपस्थिति

Mascot, Logo, Anthem, Torch

  • खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का लोगो, मैस्कॉट “खम्मा” और “घणी” का अनावरण आमेर फोर्ट में हुआ।
  • लोगो में राजस्थान की संस्कृति जैसे हवा महल, रणथंभौर किला, विंडमिल्स, रेतीले टीलें दर्शाए गए हैं.
  • एंथम “चलो आगे बढ़ो राजस्थान, जीत लो सारा हिन्दुस्तान” गायक स्वरूप खान द्वारा प्रस्तुत.

प्रतिभागी एवं दर्शक

  • देशभर के 200 विश्वविद्यालय
  • कुल 7000+ एथलीट
  • उद्घाटन समारोह में 23,000+ दर्शक
  • सात शहरों में 24 खेल स्पर्धाएँ आयोजित होंगी

खेलजिलें
एथलेटिक्सजयपुर
तीरंदाजीजयपुर
बैडमिंटनउदयपुर
बास्केटबॉलकोटा
मुक्केबाजीअजमेर
तलवारबाजीभरतपुर
फुटबॉलजोधपुर
हॉकीबीकानेर
कॅनोइंग/कायकिंगजयपुर
टेबल टेनिसजयपुर
वॉलीबॉलजयपुर
योगासनजयपुर
कुश्तीजयपुर
निशानेबाजीजयपुर
तैराकीजयपुर
कबड्डीजयपुर
मल्लखंभजयपुर
रग्बीजयपुर
भारोत्तोलनजयपुर
साइकिलिंगजयपुर
बीच वॉलीबॉलजयपुर
टेनिसजयपुर
जूडोजयपुर
अन्यविविध

आयोजन की तैयारियाँ

  • आवास, भोजन, चिकित्सा, परिवहन व्यवस्था सुदृढ़
  • खिलाड़ियों के लिए त्वरित चेक-इन, होटल सुविधाएँ विशेष रूप से उपलब्ध
  • नगर निगम और अन्य संस्थाओं के साथ समन्वय
  • मीडिया और अतिथियों के लिए विशेष बैठक व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, सभी मूलभूत सुविधाएँ

ग्राफिक्स और इन्फोग्राफिक्स के विचार

  • इवेंट कैलेंडर: दिन-प्रतिदिन के खेल और स्थान तालिका
  • मानचित्र: राजस्थान के सात प्रमुख शहर, स्थान और खेल स्पॉट
  • एथलीट प्रोफाइल: चुने हुए 8-10 शीर्ष खिलाड़ियों की फोटो एवं विवरण
  • मेडल टैली: पदक तालिका (रियल टाइम अपडेट के स्थान)
  • स्पोर्ट्स पिक्टोग्राम: प्रत्येक खेल का चित्रात्मक प्रदर्शन

आयोजन का उद्देश्य

  • उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अवसर
  • युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ाना
  • राजस्थान के खेल एवं पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देना

योजनाएं और सुझाव (Key Points)

  • खिलाड़ियों, कोचेस के लिए उत्कृष्ट प्रशिक्षण सह सुविधाएँ
  • सभी कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण प्रसार भारती के माध्यम से
  • अतिथि देवो भव: की भावना का प्रचार
  • स्वच्छता एवं सुरक्षा के लिए विशेष योजना

समापन

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 ने पूरे राज्य के खेल जगत को एकजुट किया है। राजस्थान पहली बार ऐसे आयोजन का केंद्र बन रहा है, जिससे राज्य के युवाओं, खिलाड़ियों और जनता को नई प्रेरणा, उत्साह और अवसर मिलेंगे। यह आयोजन देश भर के एथलीटों के लिए सपना सच होने जैसा है।


मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संभाला पदभार
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने संभाला पदभार- हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही - मुख्य सचिव

राजस्थान प्रशासन में 17 नवंबर 2025 का दिन ऐतिहासिक रहा, जब राज्य के मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री वी. श्रीनिवास को सौंप दी गई। इस अवसर पर राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद पर बदलाव के साथ-साथ “विकसित राजस्थान @2047” के विजन को साकार करने की दिशा में प्रशासनिक प्रतिबद्धताओं को नए आयाम मिलने की उम्मीद जताई गई।

इस अवसर पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का राजस्थान आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने स्वागत किया तथा पूर्व मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत को भावभीनी विदाई दी। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री श्रीनिवास ने कहा कि उनका प्रशासनिक सेवा का कार्यकाल राजस्थान से ही प्रारम्भ हुआ था। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि वर्षों बाद उन्हें एक बार फिर अपनी कर्मभूमि में लौटकर सेवा का अवसर प्राप्त हो रहा है। श्री श्रीनिवास ने कहा कि वे प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे और मुख्य सचिव के रूप में उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरी मेहनत, ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाएंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विकसित राजस्थान@ 2047 के विजन को साकार करने के लिए सभी अधिकारी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने हाल के वर्षों में तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से शासन में पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि किसान, श्रमिक, महिला और युवाओं को विकास में सहभागी बनाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए किये जा रहे प्रयासों को और गति देंगे। 

उन्होंने कहा कि ‘मिनिमम गवर्नमेंट -मैक्सिमम गवर्ननेंस’ के विजन के साथ प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं की सफल क्रियान्विति सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, प्रदेश में अधिकतम निवेश आकर्षित करने तथा राजस्थान को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लिए सभी सार्थक प्रयास किए जाएंगे। 

इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव तथा विभिन्न पदों पर कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उपस्थित रहे। जिले में कार्यरत अधिकारियों ने वीसी के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

वी. श्रीनिवास: प्रशासनिक जीवन, योग्यता और उपलब्धियाँ

वी. श्रीनिवास 1989 बैच के राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने ओस्मानिया विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग में डिस्टिंक्शन के साथ अध्ययन किया। राजस्थान में जिला प्रशासन से विभागीय सचिव तक, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवा दी। केंद्र सरकार में प्रशासनिक सुधार, ई-गवर्नेंस, पेंशन प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (IIAS) के अध्यक्ष हैं, जो वैश्विक स्तर पर उनकी प्रतिष्ठा को दर्शाता है।


मुख्य सचिव का भूमिका और कार्य

मुख्य सचिव राज्य प्रशासन का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होता है। अपनी भूमिका में वह:

  • मंत्री के प्रमुख सलाहकार होते हैं; विभागीय नीति निर्धारण और प्रशासनिक निर्णयों में उनका अग्रणी योगदान रहता है।
  • राज्य सिविल सेवा के प्रमुख होते है, नियुक्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति और अनुशासनात्मक कार्यवाही में उनकी अंतिम मंजूरी होती है।
  • शासन के विभिन्न विभागों के समन्वयक होते हैं तथा नीतिगत एवं वित्तीय मामलों की समीक्षा, समन्वयन और आंतरिक निरीक्षण की जिम्मेदारियां निभाते हैं।
  • राजकीय योजनाओं, बजट स्वीकृति, सर्विस रूल्स, और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित करते हैं।

विकसित राजस्थान @2047: राज्य का विजन

राज्य सरकार द्वारा जारी “विकसित राजस्थान-2047” विजन दस्तावेज़ में राज्य की अर्थव्यवस्था को 2047 तक $4.3 ट्रिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस विजन के मुख्य स्तंभ हैं:

  • समावेशी व सतत विकास: खासतौर पर युवा, महिलाएं, किसान और कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देना।
  • आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक सशक्तिकरण: कृषि, पर्यटन, उद्योग और अक्षय ऊर्जा की मजबूती।
  • शासन में पारदर्शिता: डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए नीति और प्रशासन में पारदर्शिता लाना।

सुशासन के लिए तकनीकी नवाचार

राजस्थान सरकार ने हाल ही में ई-गवर्नेंस, डेटा एनालिटिक्स, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकी पहल शुरू की हैं। इससे राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसुविधा में वृद्धि हुई है। इन तकनीकों के उपयोग से सरकारी सेवाएं तेज़, सरल और प्रभावी हुई हैं, जिससे राज्य के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार संभव हुआ है।


राज्य की आर्थिक नीति एवं सामाजिक सरोकार

मुख्य सचिव श्री श्रीनिवास ने शासन की जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाने का संकल्प लिया। उनका कहना है कि अधिकतम निवेश आकर्षित कर राजस्थान को अग्रणी राज्यों में शुमार करना, जनकल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन और “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” के सिद्धांत को लागू करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।


प्रशासनिक परिवर्तन, भविष्य की दिशा

राज्य के प्रशासनिक तंत्र में इस बदलाव से नवाचार, कर्मठता और प्रशासनिक उत्कृष्टता की नई मिसाल कायम होने की उम्मीद है। श्री वी. श्रीनिवास की नेतृत्व क्षमताओं और अनुभव से राज्य की राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दिशा में गतिशीलता आएगी। युवाओं, महिलाओं, किसानों व श्रमिकों के सशक्तिकरण की योजनाओं में नई जान आ सकती है।


निष्कर्ष

राजस्थान के मुख्य सचिव के रूप में श्री वी. श्रीनिवास का कार्यकाल प्रशासनिक नवाचार, पारदर्शita, सुशासन और राज्य के सतत विकास की नई दिशा देगा। “विकसित राजस्थान @2047” के लक्ष्य को साकार करने की ओर राज्य ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

बिहार चुनाव के बाद RSS का बढ़ता प्रभाव: 2025 में भारत की राजनीति पर गहरा असर
बिहार चुनाव में NDA के शाब्दिक बहुमत और BJP की मजबूत वृद्धि से RSS की चुनावी और सामाजिक पकड़ मजबूत हुई है

भारत में बिहार चुनाव 2025 के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। RSS की सक्रिय भूमिका और उसकी रणनीतियाँ चुनाव परिणामों में स्पष्टरूप से दिखाई दीं, जिसने भाजपा और उसके सहयोगी दलों को बड़ी सफलता दिलाई है। बिहार चुनाव में NDA के शाब्दिक बहुमत और BJP की मजबूत वृद्धि से RSS की चुनावी और सामाजिक पकड़ मजबूत हुई है। RSS ने इस चुनाव को अपने वैचारिक विस्तार के लिए एक मंच के रूप में उपयोग किया, जहां उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हिंदुत्व और राष्ट्रीयता के संदेश को विस्तृत किया।

RSS की बिहार चुनाव में भूमिका

RSS ने बिहार में 20,000 से अधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से ‘मिशन त्रिशूल’ अभियान चलाया, जिसमें गांव-गांव जाकर स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे से जोड़ने का रणनीति अपनाई गई। इसके तहत जाति आधारित राजनीति के बजाय हिंदू एकता और विकास के विषय को प्रमुखता दी गई। विश्लेषकों के अनुसार, RSS की इस रणनीति ने पारंपरिक मुस्लिम और यादव वोट बैंक को प्रभावित किया, जिससे NDA को बिहार में बड़ा लाभ मिला।

भारत में RSS का बढ़ता प्रभाव

बिहार के अलावा, RSS पूरे भारत में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। UP में 2027 के चुनावों के लिए RSS ने ‘गृह संपर्क अभियान’ शुरू किया है, जिसके तहत करोड़ों घरों में संदेश पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में भी RSS की गतिविधियां तेज हो गई हैं, जहां वह तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव को चुनौती देने की योजना बना रहा है।

नीति निर्माण, शिक्षा, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से RSS का प्रभाव विभिन्न राज्यों में दिख रहा है, खासतौर पर उन राज्यों में जहां भाजपा सरकार है या उसका प्रभाव बढ़ रहा है। यह एक लंबी अवधि की रणनीति है जिससे RSS भारत के राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने में गहरी पैठ बना सके।

भारत के राज्यों का राजनीतिक स्वरूप 2025 में

नीचे दिए गए मानचित्र में भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्तमान जनता दल (BJP), कांग्रेस (INC), आम आदमी पार्टी (AAP), जनता दल (यूनाइटेड), और अन्य प्रमुख पार्टियों के शासन को दर्शाया गया है। इससे साफ़ होता है कि भाजपा 14 राज्यों और कई केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है, जबकि अन्य क्षेत्रीय दल और कांग्रेस कुछ राज्यों में राज कर रहे हैं।

यह मानचित्र विभिन्न पार्टियों के शासनों को रंगों के माध्यम से दिखाता है:

  • बीजेपी (BJP) – केसरिया (#FF9933)
  • कांग्रेस (INC) – नीला
  • आम आदमी पार्टी (AAP) – सायकन (#009999)
  • जनता दल (यूनाइटेड) – हरा (#008000)
  • अन्य क्षेत्रीय दलों के अपने विशिष्ट रंग

निष्कर्ष

बिहार चुनाव के परिणामों ने स्पष्ट किया कि RSS का प्रभाव भारत के राजनीतिक परिदृश्य में मजबूती से स्थापित हो चुका है। इसके सक्रिय संगठन और चुनावी रणनीतियाँ भाजपा की सफलता के प्रमुख कारण हैं। आगे के वर्षों में RSS की भूमिका और अधिक निर्णायक साबित हो सकती है, विशेषकर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील राज्यों में। इस प्रकार, RSS का प्रभाव केवल चुनाव तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक दिशा भी निर्धारित कर रहा है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान: भारत की तेज़ प्रगति से विश्व प्रभावित, राष्ट्रवाद पर घबराहट
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जयपुर दौरे के दौरान कहा कि भारत अब वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए एक भरोसेमंद शक्ति बन चुका है। उन्होंने राष्ट्रवाद से जुड़े खतरों...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जयपुर में आयोजित एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दीनदयाल स्मृति व्याख्यान में कहा कि आज पूरी दुनिया वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने भारत की तेज़ प्रगति, वर्तमान वैश्विक अस्थिरता और राष्ट्रवाद के कारण बढ़ते संघर्षों पर भी विशद चिंता जाहिर की। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब मील-दर-मील आगे बढ़ रहा है और विश्व मंच पर एक नई शक्ति के रूप में उभर चुका है.

भारत पर वैश्विक भरोसा

मोहन भागवत ने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान दुनिया तलाश रही है, उनका जवाब भारत के पास है। भारत में वह विचार शक्ति है, जो विश्व की समस्याओं का समाधान देने में सक्षम है। उन्होंने कहा, “दुनिया आज भारत की ओर देख रही है। जिन समस्याओं का समाधान दुनिया खोज रही है, उनका उत्तर भारत के पास है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत की तेज़ प्रगति के पीछे उसकी सांस्कृतिक और पारिवारिक व्यवस्था की ताकत है, जिसने उसे वैश्विक अस्थिरताओं से अपेक्षाकृत कम प्रभावित किया है.

राष्ट्रवाद और वैश्विक अस्थिरता पर चिंता

भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि आज वैश्विक स्तर पर संघर्ष के पीछे राष्ट्रवाद की अति और शक्ति के संतुलन का बिगड़ना मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रहित आक्रामक हो जाता है, तो उसके परिणाम विनाशकारी युद्ध के रूप में सामने आते हैं। इतिहास में दोनों विश्व युद्ध राष्ट्रवाद की एक आक्रामक धारा के कारण हुए, इसलिए अंतरराष्ट्रीयवाद की आवश्यकता और भारतीय दृष्टिकोण, जैसे “वसुधैव कुटुंबकम”, आज के समय की जरूरत बन चुके हैं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी शक्तिशाली देशों के हितों की टकराहट होती है, उसका सीधा असर कमजोर देशों पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का बोझ सबसे अधिक ऐसे देशों को झेलना पड़ता है, जिनके पास बहुत अधिक साधन नहीं होते.

गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन और युवाओं को संदेश

अपनी जयपुर यात्रा के दौरान मोहन भागवत ने गोविंद देव जी मंदिर में विधिविधान से दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए युवाओं को समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आस्था और भारतीय संस्कृति को संरक्षित करना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी भी है, क्योंकि यही सामाजिक स्थायित्व और सामूहिक विकास का आधार है.​​

भागवत ने गोविंद देव जी मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संस्थाएं समाज को एक दिशा और मजबूती देने का काम करती हैं। ऐसे धार्मिक स्थलों पर आस्था और संस्कृति का सजीव रूप देखने को मिलता है, जिसे युवाओं तक पहुंचाना बेहद जरूरी है.

निष्कर्ष

जयपुर में मोहन भागवत का यह स्पष्ट संदेश था कि भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और नैतिक शक्ति के कारण पूरी दुनिया अब समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने राष्ट्रीय अस्मिता, वैश्विक दृष्टिकोण, युवा जिम्मेदारी और आस्था के संगम को ही शांति, स्थिरता और प्रगति का आधार बताया.