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उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने नगाड़ा बजा कर किया घूमर महोत्सव का आगाज
भव्यता, उमंग और उत्साह के साथ मनाया गया राजस्थान की आत्मा का उत्सव

जयपुर, 19 नवम्बर। उपमुख्यमंत्री और पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी की पहल पर ऐतिहासिक रूप से पहली बार राजस्थान पर्यटन विभाग की ओर से राजस्थान की लोक-संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और जनभागीदारी आधारित सांस्कृतिक मॉडल को नई दिशा देने के उद्देश्य से बुधवार को राज्य के सातों संभाग मुख्यालयों पर एक साथ भव्य घूमर महोत्सव आयोजित हुआ। इस आयोजन को एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड में दर्ज किया गया जिसमें राजस्थान के सातों संभागों में आयोजित घूमर महोत्सव में एक साथ लगभग 6 हजार महिलाओं ने घूमर नृत्य किया। 

जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम के फुटबॉल ग्राउण्ड में राज्य स्तरीय घूमर महोत्सव आयोजित हुआ जिसमें महिलाओं ने बड़ी संख्या सहभागिता कर राजस्थान की सांस्कृतिक परम्पराओं को जीवंत कर दिया। लय-ताल और सुरों की जुगल बंदी से सुसज्ज्ति और सुगठित घूमर महोत्सव ने राजस्थान की सांस्कृतिक गरिमा को प्रदर्शित किया। 

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने इस अवसर  पर नगाड़ा बजाकर महोत्सव का आगाज किया। उन्होंने स्टेडियम में उपस्थित मातृशक्ति का अभिवादन किया। साथ ही, बहनों और बेटियों का स्नेहाशीष देते हुए कहा कि आज वो समय आ गया ह,ै जब हमें राजस्थान की लोक संस्कृति, लोक कलाओं और विरासत को नई  पीढी तक पहुंचाना होगा। राजस्थान की संस्कृति के पर्यायवाची घूमर नृत्य को वैश्विक स्तर पर पहुंचाने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों का आयोजन हर वर्ष बृहत् स्तर पर किया जाएगा। 

इस उत्सव में उपमुख्यमंत्री और पर्यटन, कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी ने भी  जयपुर सांसद श्रीमती मंजू शर्मा और अन्य गणमान्य महिलाओं के साथ घूमर नृत्य कर राज्य की सांस्कृतिक भव्यता उजागर की और इस महोत्सव में सहभागिता कर रही युवतियों और महिलाओं का उत्साह वर्धन किया। 

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने मैदान पर जाकर सभी का उत्साहवर्धन किया।

महोत्सव के दौरान घूमर की सबसे प्राचीन शैली की प्रस्तुति ‘‘एक बार हो पिया जयपुर शहर पधार जो….’’ गीत पर दी गई। 

दिया कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सांस्कृतिक परंपराओं को जनभागीदारी और नवाचारों के साथ जोड़कर एक स्थायी मॉडल तैयार किया जाए, जिससे राजस्थान का पर्यटन व्यापक और सशक्त रूप में उभर कर आए। उन्होंने कहा कि घूमर फेस्टिवल को दीर्घकालिक रूप से राज्य की सांस्कृतिक पहचान के रूप में स्थापित करने की व्यापक योजना तैयार की जा रही है। आने वाले समय में इसे राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक कैलेंडर में शामिल करवाने की संभावनाओं को भी तलाशा जाएगा।

कार्यक्रम में घूमर व प्रदेश के अन्य लोकनृत्यों को संरक्षण देने वाली स्व.पदमश्री  गोवरधन कुमारी को श्रद्धाजंलि दी गई और कला संरक्षण के लिए उनके द्वारा किए उल्लखेनीय कार्यों व उपलब्धियों पर एक लघु वृतचित्र प्रदर्शित किया गया। 

बड़ी संख्या में उमड़े जयपुरवासी-

घूमर महोत्सव में बड़ी संख्या में महिलाओं विशेषकर युवतियों ने सहभागिता की ।   जयपुरवासी गणमान्य, विद्यार्थियों, आमजन ने विद्याधर नगर स्टेडियम पहुंचकर घूमर महोत्सव का आनंद लिया। 

इस अवसर पर सिविल लाइन्स विधायक श्री गोपाल शर्मा, पर्यटन विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री राजेश यादव, पर्यटन आयुक्त श्रीमती रूकमणी रियाड़, श्री अमित गोयल, पर्यटन विभाग की वित्तीय सलाहकार गार्गी सिंह,  पर्यटन विभाग की संयुक्त निदेशक डॉ.पुनीता सिंह, श्री दलीप सिंह राठौड़ व श्री देवेेंद्र मीणा, उपनिदेशक श्री उपेंद्र सिंह शेखावत व श्री नवलकिशोर बसवाल समेत अन्य लोग उपस्थित रहे। 

घूमर के रंग यूँ बिखरे-

कार्यक्रम की शुरूआत गणगौर डांस अकादमी की कलाकारों द्वारा घूमर के ‘‘लंजो..म्हारौ आलाजी लेता आइजो..’’ से हुई। इसमें एक विवाहित महिला  अपने पति से श्रंगार सामग्री व गहने लाने का आग्रह करती है लेकिन यह शर्त  रखती है कि श्रंगार का साजो-सामान रत्नजड़ित होना चाहिए। 

 ‘‘जलाल-बिलाला’’ प्रस्तुति में विरह की पीड़ा झेलती नायिका अपनी बैरन से अनुरोध करती है कि उसके पति को आदर से नायिका के पास भेजा जाए। 

तलवारबाजी संघ की बालिकाओं ने  आत्मरक्षा व आक्रमण की शैलियों को मंच पर साकार किया तो स्टेडियम में उपस्थित जनसमूह जोश से भर गया।  सीआरपीएफ  बैंड द्वारा भी आकर्षक प्रस्तुतिया दी गयी। 

रंग-बिरंगी वेशभूषा और सेल्फी-

 विद्याधर नगर स्टेडियम में दोपहर से ही महिलाओं का आगमन शुरू हो गया। रंग बिरंगी पोशाक में सजी संवरी महिलाओं  ने दोपहर से नृत्य अभ्यास किया, सेल्फी ली। 

पुरस्कार एवं सम्मान-

जयपुर और जोधपुर में 1500 से अधिक पंजीकरण प्राप्त होने पर इन दोनों शहरों को उच्च श्रेणी पुरस्कार श्रेणी में शामिल किया गया है। इन दोनों संभागों में बेस्ट ग्रुप डांस, बेस्ट कॉस्ट्यूम, बेस्ट ज्वेलरी, बेस्ट सिंक्रोनाइजिंग और बेस्ट कोरियोग्राफी श्रेणियों में  2,34,000 रूपये के पुरस्कार प्रदान किए गए। अन्य पाँच संभागों के लिए 1,04,000 रूपये पुरस्कार स्वरूप दिए गए।

विधानसभा अध्यक्ष ने अजमेर में किया विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ
हजारों लोगों को मिलेगी राहत

 विधानसभा अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी ने बुधवार को अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र वार्ड संख्या 8 में विभिन्न विकास कार्यों का शुभारंभ किया। इन कार्यों में सीसी सड़क व  नाली निर्माण जैसी मूलभूत सुविधाएं शामिल हैं। इनसे स्थानीय नागरिकों को बरसात, पेयजल और आवागमन से जुड़ी परेशानियों से स्थायी राहत मिलेगी। यह सड़क निर्माण कार्य सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा किया जाएगा।

विधायक कोष 2025-26 के तहत वार्ड 8 स्थित दत्ता की पुलिया से जे.पी. दाल पिसाई केन्द्र तक 11.50 लाख रूपए की लागत से सड़क व नाली निर्माण तथा वार्ड 8 ऋषि घाटी से बाबूगढ़ पार्किंग तक 8.85 लाख रूपए की लागत से सड़क व नाली निर्माण कार्यों का शुभारम्भ किया।

श्री देवनानी ने कहा कि अजमेर शहर की सड़क कनेक्टिविटी लगातार बेहतर हो रही है। इसके लिए सैकड़ों करोड़ की लागत से अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र की सड़कों का व्यापक नेटवर्क तैयार किया गया है। 

उन्होंने कहा कि अजमेर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में करोड़ों रूपए की लागत से नालों का निर्माण कार्य किया जा रहा है। इससे शहर के निचले इलाकों में जलभराव की समस्या में उल्लेखनीय कमी आएगी। इस वार्ड में ही अब तक करोड़ों रुपए के विकास कार्य का शुभारम्भ किया गया है। उन्होंने कहा कि अजमेर में आगामी 25 वर्षों तक निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए शहर के मध्य हाथीभाटा क्षेत्र में गैस आधारित जीएसएस का निर्माण किया जाएगा। 

राजस्थान में सहकार से समृद्धि का विजन हो रहा साकार – मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा 
प्रदेश में किसानों के खातों में पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के तहत लगभग 1400 करोड़ रुपये हुए हस्तान्तरित

जयपुर, 19 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का विजन देश के किसान, मजदूर, युवा और महिलाओं के विकास से जुड़ा है। पंडित दीनदयाल उपाध्याय और बाबा साहेब भीमराव अम्बेडकर के विचारों के अनुरूप अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के विकास तथा जरूरतमंद तक सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाकर उसके जीवन स्तर को उठाने के लिए हमारी सरकार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इसी क्रम में प्रधानमंत्री ने किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त जारी की है। यह कदम हमारी सरकार का किसान कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बुधवार को तमिलनाडु के कोयम्बटूर में पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किस्त के हस्तान्तरण कार्यक्रम एवं दक्षिण भारत प्राकृतिक कृषि शिखर सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित किया। प्रधानमंत्री की गरिमामय उपस्थिति में आयोजित हुए इस कार्यक्रम से मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा वीसी के माध्यम से जुड़े और प्रधानमंत्री के संबोधन को सुना। 

इसी कड़ी में श्री शर्मा ने दुर्गापुरा के राज्य कृषि प्रबंधन संस्थान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसान हमारे देश की रीढ़ है। मेहनत, लगन और समर्पण से ये अनाज उपजाते हैं। प्राकृतिक आपदा, चिलचिलाती धूप, कपकपाती ठंड और अन्य विपदाओं में भी किसान खेत में निरन्तर कार्य करता है।  

योजनाओं से किसान लाभान्वित, राजस्थान का देश में पांचवां स्थान-

मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों से किए वायदों को पूरा किया जा रहा है। राज्य के किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए धनतेरस पर मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि की किस्त दी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की अब तक 20 किस्त जारी हुई हैं जिससे राजस्थान के किसानों के खातों में 25 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है। 21वीं किस्त में लगभग 1400 करोड़ की राशि किसानों के खातों में जमा करने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि किसानों को लाभान्वित करने की संख्या की दृष्टि से राजस्थान का देश में पांचवां स्थान है।

पेपरलीक पर लगी लगाम, 92 हजार युवाओं को मिला नियुक्ति का सम्मान-

श्री शर्मा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार में पेपरलीक की घटनाओं से युवाओं के सपनों पर कुठाराघात हुआ, लेकिन हमारी सरकार के कार्यकाल में एक भी पेपरलीक नहीं हुआ। मुख्यमंत्री रोजगार उत्सव का निरंतर आयोजन किया जा रहा है। अब तक लगभग 92 हजार युवाओं को नियुक्ति पत्र प्रदान किए जा चुके हैं। 5 साल में 4 लाख सरकारी नौकरी देने के वादे को पूरा किया जाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट का आयोजन किया। अब तक 7 लाख करोड़ रुपये के एमओयू की ग्राउण्ड ब्रेकिंग हो चुकी है, जिससे निजी क्षेत्र में भी प्रदेश के युवाओं को रोजगार मिलेगा तथा स्वरोजगार के नवीन अवसर सृजित होंगे।

राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध-

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार किसानों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों की आर्थिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए राज्य में मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत सरकार 3 हजार रुपये की राशि अलग से दे रही है। इससे किसानों को केन्द्र व राज्य सरकार से अब 9 हजार रुपये प्रतिवर्ष सम्मान निधि की राशि मिल रही है, जिसे चरणबद्ध तरीके से 12 हजार रुपये तक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में जल व्यवस्था के लिए निरन्तर कार्य कर रही है। हमारी सरकार ने 17 जिलों के लिए राम जल सेतु लिंक परियोजना, शेखावाटी के लिए यमुना जल समझौता, इंदिरा गांधी नहर परियोजना, गंगनहर, माही बांध एवं देवास परियोजना का विस्तार, जल संरक्षण एवं संचय के लिए कर्मभूमि से मातृभूमि अभियान जैसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। उन्होंने कहा कि दो वर्षों में अच्छी वर्षा से प्रदेश के बड़े बांधों, डिग्गी, तालाबों में जल स्तर बढ़ा है।

किसानों को दिन में बिजली, पशुपालकों को ब्याज मुक्त ऋण की सुविधा-

श्री शर्मा ने कहा कि किसानों को बिजली के बिलों में 41 हजार करोड़ रुपये से अधिक का अनुदान दिया गया है। प्रदेश के किसानों को वर्ष 2027 तक दिन में बिजली देने का काम करेंगे। फिलहाल 22 जिलों में किसानों को दिन में बिजली देना प्रारंभ कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि पीएम कुसुम योजना में राज्य के करीब 2 लाख किसानों को सोलर ऊर्जा से बिजली प्रदान कर लाभान्वित किया गया है। पशुपालन हमारे किसानों की आय का प्रमुख स्रोत है। राज्य सरकार किसान पशुपालकों को दूध पर 5 रुपये प्रति लीटर का बोनस दे रही है। उन्होंने कहा कि पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा यूनिट की सुविधा दी जा रही है। स्कूलों के नौनिहालों को पोषण के लिए दूध भी उपलब्ध करवाया जा रहा है। गोपाल क्रेडिट कार्ड योजना के तहत पशुपालक को ब्याज मुक्त ऋण दिया जाता है। वहीं, किसानों को अच्छी खेती व पैदावार के लिए गुणवत्तापूर्ण बीज के किट भी दिए गए हैं। 

प्रदेश में तेज गति से हो रहा पैक्स कम्प्यूटराइजेशन का कार्य- 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में 77 लाख से अधिक किसानों को 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक अल्पकालीन ब्याजमुक्त फसली ऋण वितरित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि हर ग्राम पंचायत पर सहकारी समिति की स्थापना के लिए हमारी सरकार काम कर रही है। साथ ही, राज्य में पैक्स कम्प्यूटराइजेशन का कार्य तेज गति से चल रहा है। राजस्थान में 41 हजार से अधिक सहकारी समितियों से जुड़े 1 करोड़ 17 लाख से अधिक सदस्य सहकारिता से सीधे लाभान्वित हो रहे हैं। वहीं, किसानों को पर्याप्त उवर्रक उपलब्ध करवाया जा रहा है।

श्री शर्मा ने कहा कि राज्य में सहकारिता के क्षेत्र में तेजी से कार्य किया जा रहा है। अब तक लगभग 5 हजार 735 पैक्स गो-लाइव किया जा चुका है। 97 हजार से अधिक कृषि यंत्रों पर 546 करोड़ रुपये का अनुदान दिया गया। उन्होंने कहा कि फसलों के नुकसान को रोकने के लिए 28 हजार किलोमीटर की तारबंदी भी की गई है। प्रदेश में 9 हजार से अधिक पीएम किसान समृद्धि केन्द्र स्थापित किए गए हैं। कृषि शिक्षा में हमारी बेटियों को प्रोत्साहन देने के लिए कक्षा 12, स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी की छात्राओं को 97 करोड़ से अधिक की प्रोत्साहन राशि वितरित की गयी है जो पिछले सरकार से 5 गुणा अधिक है। मोटे अनाज यानि श्री अन्न के उत्पादन में राजस्थान अग्रणी है। 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने 5 साल में 29 हजार 430 फार्म पौण्ड बनाए जबकि हमारी सरकार ने 21 माह में 35 हजार 368 फार्म पौण्ड बनाए हैं। पूर्ववर्ती सरकार के समय खेतों पर 113 लाख मीटर तारबंदी हुई, जबकि हमारे 21 माह के कार्यकाल में 280 लाख मीटर खेतों पर तारबंदी की गई है। पूर्ववर्ती सरकार के सम्पूर्ण कार्यकाल में 49 पशु चिकित्सालय का प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालय में क्रमोन्नयन हुआ। वहीं, हमारी सरकार के अब तक के समय में ही 101 प्रथम श्रेणी पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन हो चुके हैं। इसी प्रकार, पूर्ववर्ती सरकार के 5 साल के कार्यकाल में बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन की कुल संख्या 13 थी, जबकि हमनें 21 माह में ही 50 बहुउद्देशीय पशु चिकित्सालयों में क्रमोन्नयन की उपलब्धि प्राप्त की है। 

कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीना ने कहा कि कृषि और सहकारिता एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने किसानों की खेती से जुड़ी आवश्यकताओं को समझते हुए प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि की सौगात दी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने भी किसानों को 3 हजार रुपये की सम्मान निधि देने का काम किया है। जिससे केन्द्र और राज्य की किसान सम्मान निधि की राशि कुल 9 हजार रुपये हो गई है। यह राशि किसानों की आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए महत्वपूर्ण साबित हो रही है। 

सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम कुमार दक ने कहा कि किसान हमारे समाज और अर्थव्यवस्था के मजबूत स्तंभ है। किसानों को आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षण, सामाजिक सुरक्षा और बाजार तक सीधी पहुंच मिले, इसके लिए यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अनेक ऐतिहासिक कदम उठाए हैं।

इस दौरान सहकारिता से संबंधित लघु फिल्म का प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर संसदीय कार्य मंत्री श्री जोगाराम पटेल, शासन सचिव कृषि श्री राजन विशाल सहित संबंधित विभाग के उच्चाधिकारी एवं बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल संचयन में देशभर में नई पहचान बना रहा जयपुर
राष्ट्रीय जल संचय जन भागीदारी अवॉर्ड्स में जयपुर जिले ने हासिल किया द्वितीय पुरस्कार

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के दूरदर्शी नेतृत्व और राज्य सरकार की जल संरक्षण के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता के परिणामस्वरूप जयपुर जिला जल संचयन के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर एक अनुकरणीय मॉडल के रूप में उभरा है। मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन, स्पष्ट प्राथमिकताओं और जल सुरक्षा को राज्य के विकास एजेंडे के केंद्र में रखने की नीति ने जिला प्रशासन को जल संरक्षण को एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की प्रेरणा दी। मुख्यमंत्री के नेतृत्व में जयपुर जिले में जल संचयन की परंपरागत और आधुनिक दोनों पद्धतियों को एकीकृत कर व्यापक स्तर पर कार्य किया गया, जिसके फलस्वरूप जिले को राष्ट्रीय जल संचय जनभागीदारी अवॉर्ड्स में द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ है।

मंगलवार को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में आयोजित छठे राष्ट्रीय जल संचय जन भागीदारी सम्मान समारोह में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी. आर. पाटिल ने जयपुर जिले को द्वितीय पुरस्कार से सम्मानित किया और प्रशस्ति पत्र के साथ 1 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि प्रदान की। यह राशि जिले में उन्नत जल संरक्षण मॉडल विकसित करने, तकनीकी नवाचारों को बढ़ावा देने और ग्राम स्तर पर जल सुरक्षा परियोजनाओं के विस्तार में उपयोग की जाएगी। जिला कलक्टर डॉ. सोनी के प्रतिनिधित्व में यह पुरस्कार जिला परिषद की मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्रीमती प्रतिभा वर्मा ने ग्रहण किया।

जयपुर जिले में जल संरक्षण कार्यों की श्रृंखला व्यापक और प्रभावी रही है। फार्म पॉण्ड, रिचार्ज शाफ्ट, सोक पिट, मैजिक पिट, कंटूर ट्रेंच, परकोलेशन टैंक तथा ग्राम स्तर पर वर्षाजल भंडारण से संबंधित कई नवाचारी संरचनाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण किया गया। इन कार्यों ने जिले की जल धारण क्षमता को अनेक गुना बढ़ाया है और भूजल पुनर्भरण में उल्लेखनीय सुधार का मार्ग प्रशस्त किया है। जयपुर जिले द्वारा किए गए कार्यों का सत्यापन केन्द्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय द्वारा नियुक्त केंद्रीय भू-जल बोर्ड के अधिकारियों की टीम द्वारा किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा जल संरक्षण कार्यक्रमों को जमीनी स्तर पर सफल बनाने के लिए प्रशासनिक, तकनीकी एवं सामुदायिक सहभागिता को केंद्र में रखने के निर्देशों का बेहतरीन प्रभाव जयपुर में देखने को मिला, जहाँ जिला प्रशासन, पंचायत राज संस्थाओं, जलदाय विभाग, कृषि विभाग, ग्रामीण विकास विभाग और वन विभाग सहित विभिन्न इकाइयों के बीच उत्कृष्ट समन्वय स्थापित हुआ।

जिला कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी के निर्देशन में एक सुव्यवस्थित और परिणाम उन्मुख कार्ययोजना तैयार की गई, जिसके अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक और ग्राम पंचायत में जल संरक्षण अवसंरचना के विस्तार पर बल दिया गया। अभियान के संचालन के दौरान नियमित मॉनिटरिंग, साइट निरीक्षण और प्रगति समीक्षा ने कार्यों की गति और गुणवत्ता दोनों को सुनिश्चित किया। मुख्यमंत्री के ‘जल सुरक्षा -सशक्त राजस्थान’ संकल्प के अनुरूप स्थानीय समुदायों को भी इस अभियान का सक्रिय भागीदार बनाया गया, जिसका सकारात्मक प्रभाव जल संरचनाओं के संरक्षण और उपयोगिता पर दीर्घकालिक रूप से देखने को मिलेगा।

जयपुर की यह राष्ट्रीय उपलब्धि न केवल जिले की प्रशासनिक दक्षता का प्रमाण है, बल्कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में जल संरक्षण को राज्यव्यापी प्राथमिकता बनाए जाने की नीति की उल्लेखनीय सफलता भी दर्शाती है। यह उपलब्धि राजस्थान के अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणादायक है, जहाँ जयपुर मॉडल को भविष्य में जल सुरक्षा और भूजल प्रबंधन के क्षेत्र में एक सशक्त दृष्टांत के रूप में अपनाया जा सकेगा।

44 वां भारतीय अंतर्राष्ट्रीय व्यापार मेला 2025 – राजस्थान दिवस पर सांस्कृतिक संध्या का आयोजन
राजस्थानी नृत्यों सहित असम के बिहु नृत्य ने आगंतुकों को मंत्रमुग्ध किया

जयपुर, 18 नवम्बर। नई दिल्ली के प्रगति मैदान में आयोजित 44वें अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार मेला में इस बार की थीम ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत‘ के अनुरूप राजस्थान दिवस पर राजस्थानी लोक कलाकारों द्वारा एक ही मंच पर प्रस्तुत राजस्थानी नृत्यों के अतिरिक्त असम के लोक कलाकारों द्वारा प्रसिद्ध बिहु नृत्य ने उपस्थित आगंतुकों को मंत्रामुग्ध कर दिया।

प्रगति मैदान के एमफी थियेटर हॅाल में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि राजस्थान की अतिरिक्त आवासीय आयुक्त श्रीमती अंजु ओम प्रकाश ने दीप प्रज्वलित कर किया। राजस्थान पर्यटन स्वागत केन्द्र की उप निदेशक श्रीमती दीपाली शर्मा ने गुलदस्ते भेंट कर उनका और अतिथियों का स्वागत किया।

इस अवसर पर उन्होंने बताया कि एक भारत श्रेष्ठ भारत थीम में राजस्थान-असम राज्य के लोककलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियां दी। दो घंटे से भी अधिक चले सांस्कृतिक कार्यक्रम के प्रारंभ  में बाड़मेर से आए भंगुर खां ने अपने खड़ताल वादन और पारंपरिक राजस्थानी गीतों की प्रस्तुति दी। इसके उपरांत जयपुर से आई मोरू सपेरा ने चरी नृत्य, घूमर नृत्य और कालबेलियां नृत्य में उनके दल की नृत्यांगनाओं ने लोम हर्षक प्रस्तुति दी। उन्होंने अपने शरीर को रबर की गुड़ियां की तरह तोड़ मोड़कर गजब की लचक के साथ ऐसा अनूठा नृत्य प्रस्तुत किया कि दर्शक तालियां बजाने को मजबूर हो गये। नृत्यांगनाओं ने मुंह और आंखों की पलको से अंगूठी उठाकर भारी करतल ध्वनि अर्जित की।

जयपुर के श्री महावीर नाथ के ग्रुप ने भवई नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके उपरांत असम के ब्रहम्पुत्रा नोर्थ इस्ट ग्रुप जि दरंग ने असम का प्रसिद्ध पांरपरिक ‘बीहू नृत्य‘ की प्रस्तुति देकर सबका खूब मनोरंजन किया। कार्यक्रम के अंत में भरतपुर डीग से श्री विष्णु शर्मा और उनके दल ने मयूर नृत्य से ऐसा रंग जमाया कि दर्शक हर्ष घ्वनि किए बिना नहीं रहे। उनके ग्रुप ने ही ‘‘फूलों की होली से प्रगति मैदान को ‘ब्रजमय‘ बना दिया। 

रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर देशभर में कार्यक्रम, वीरांगना की अदम्य वीरता को किया गया याद-रानी लक्ष्मीबाई जयंती 2025
झांसी की रानी के नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मीबाई को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) की सबसे साहसी और प्रेरणादायक नायिकाओं में गिना जाता है।

नई दिल्ली। आज पूरे देश में रानी लक्ष्मीबाई जयंती 2025 बड़े सम्मान और उत्साह के साथ मनाई गई। झांसी की रानी के नाम से प्रसिद्ध लक्ष्मीबाई को भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) की सबसे साहसी और प्रेरणादायक नायिकाओं में गिना जाता है। उनके जन्मदिवस पर सुबह से ही देशभर में श्रद्धांजलि कार्यक्रम, सांस्कृतिक आयोजन, रैलियाँ और महिला सशक्तिकरण से जुड़े विशेष आयोजन किए गए।


रानी लक्ष्मीबाई जयंती 2025: देशभर में उत्सव का माहौल

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, बिहार और महाराष्ट्र समेत कई राज्यों में सरकारी और गैर-सरकारी स्तर पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए गए।
स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रानी लक्ष्मीबाई के जीवन पर आधारित भाषण, निबंध प्रतियोगिता, नाटक और देशभक्ति सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ हुईं।


झाँसी में भव्य समारोह, हजारों लोगों ने अर्पित की श्रद्धांजलि

रानी लक्ष्मीबाई की कर्मभूमि झाँसी में सबसे भव्य कार्यक्रम आयोजित हुआ।
झाँसी किले पर अधिकारियों, समाजसेवियों और बड़ी संख्या में नागरिकों ने रानी को पुष्पांजलि अर्पित की।
स्टेट लेवल पर आयोजित घुड़सवारी शो, वीरांगना परेड, क्रांति काल की झाँकियाँ और पारंपरिक हथियार प्रदर्शन मुख्य आकर्षण रहे।


सोशल मीडिया पर ट्रेंड हुआ #RaniLakshmibaiJayanti

सुबह से ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter), Facebook और Instagram पर लाखों पोस्ट ट्रेंड करते रहे।
#JhansiKiRani, #RaniLakshmibaiJayanti और #VeeranganaLakshmibai हैशटैग पूरे दिन टॉप ट्रेंड में बने रहे।
देश के नेताओं, अभिनेताओं, खिलाड़ियों और युवाओं ने प्रेरणादायक पोस्ट शेयर किए।


रानी लक्ष्मीबाई: साहस, नेतृत्व और बलिदान की प्रतीक

  1. जन्म: 19 नवम्बर 1828, वाराणसी
  2. विवाह: 1842 में झाँसी के राजा गंगाधर राव से
  3. 1857 का विद्रोह: अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चे का नेतृत्व
  4. प्रसिद्ध नारा: “मैं अपनी झाँसी नहीं दूंगी”
  5. वीरगति: 18 जून 1858, ग्वालियर के पास

रानी लक्ष्मीबाई की वीरता ने न केवल अंग्रेजों को चुनौती दी बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष की नींव को भी मजबूत किया। उनके नेतृत्व, घुड़सवारी कौशल और रणकौशल का आज भी पूरा विश्व उदाहरण देता है।


महिला सशक्तिकरण से जुड़े विशेष कार्यक्रम

रानी लक्ष्मीबाई जयंती पर कई राज्यों में महिला सुरक्षा और आत्मरक्षा प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए गए।
युवा छात्राओं ने मार्शल आर्ट और सेल्फ-डिफेंस तकनीकों का प्रशिक्षण लिया।
संगठनों ने रानी को आधुनिक भारत की सबसे बड़ी प्रेरणा बताते हुए नारी शक्ति के प्रतीक के रूप में श्रद्धांजलि अर्पित की।


नेताओं और अधिकारियों ने दी श्रद्धांजलि

प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्रियों, राज्यपालों और मुख्यमंत्रियों ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक आयोजनों के माध्यम से रानी लक्ष्मीबाई को नमन किया।
उन्होंने कहा कि वीरांगना लक्ष्मीबाई का जीवन भारत की आत्मा और स्वतंत्रता की भावना का सबसे सशक्त उदाहरण है।


इतिहासकारों का मत

इतिहासकारों के अनुसार, रानी लक्ष्मीबाई का संघर्ष केवल अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध नहीं था, बल्कि यह महिला नेतृत्व और सामाजिक समानता का एक शक्तिशाली संदेश भी था।
उन्होंने अपने साहस से ये साबित किया कि भारत की नारी किसी भी चुनौती के सामने डटकर खड़ी हो सकती है।


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ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता हम स्वीकार नहीं करेंगे:डॉ. अभिषेक वर्मा
प्रथम स्वाधीनता संग्राम की महान वीरांगना, अदम्य साहस, असाधारण शौर्य एवं अपरिमित पराक्रम की प्रतीक रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि!

डॉ. अभिषेक वर्मा, जो राष्ट्रीय संयोजक एनडीए और शिवसेना के प्रमुख राष्ट्रीय समन्वयक हैं, ने ‘‘ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता, हम नहीं स्वीकार करेंगे’’ विषय पर एक विस्तृत बयान दिया है। वे भारतीय राजनीति में सक्रिय हैं और हिंदुत्व के संरक्षण तथा राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रबल पक्षधर हैं। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर उनकी वीरता और अदम्य साहस को याद करते हुए स्वतंत्रता संग्राम में ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता न स्वीकार करने के अपने दृढ़ वचन को दोहराया है।

डॉ. वर्मा ने कहा कि भारत की आज़ादी की लड़ाई में रानी लक्ष्मीबाई ने जो पराक्रम और देशभक्ति दिखाई, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणास्त्रोत है। उनका यह नारा कि “हम ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता स्वीकार नहीं करेंगे” आज भी स्वतंत्रता, स्वाभिमान और स्वदेशी भावनाओं की भावना को जीवित रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि वर्तमान भारत को भी इसी जज़्बे के साथ विदेशी और आंतरिक दमन के खिलाफ खड़ा होना चाहिए।

अपने बयान में डॉ. अभिषेक वर्मा ने स्वतंत्रता संग्राम की महान गाथाओं को याद करते हुए कहा कि रानी लक्ष्मीबाई ने न केवल युद्धभूमि में, बल्कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक स्तर पर भी भारत को एकजुट रखने का काम किया। उन्होंने कहा कि हमें उनकी गाथाओं से निरंतर प्रेरणा लेकर अपने देश की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक गौरव की रक्षा करनी चाहिए।

डॉ. वर्मा ने युवाओं से अपील की कि वे देशभक्ति की भावना को जीवित रखें और किसी भी तरह की विदेशी अधीनता, शोषण या संस्कृतिक आक्रमण का प्रतिकार करें। उन्होंने कहा, “ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता को न सिर्फ हमारे पूर्वजों ने अस्वीकार किया था, बल्कि आज भी हम किसी भी प्रकार के दमन, विदेशी हस्तक्षेप और अपने लोकतांत्रिक अधिकारों की अवहेलना को बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

हालांकि आज भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र है, फिर भी वे कहते हैं कि आज की वैश्विक राजनीति में आर्थिक, सैन्य और सांस्कृतिक क्षेत्र में विदेशी दबावों से सावधान रहना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें आत्मनिर्भरता को अपनाना होगा और देश के संसाधनों, संस्कृति तथा जनता की रक्षा के लिए तेज़ और समर्पित प्रयास जारी रखने होंगे।

डॉ. अभिषेक वर्मा ने इस अवसर पर रानी लक्ष्मीबाई की जयंती पर न केवल उनके साहस को नमन किया, बल्कि यह भी कहा कि उनकी गाथाएँ सदैव भारतीय जनता के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेंगी। उन्होंने कहा, ‘‘रानी लक्ष्मीबाई का जीवन हमें सिखाता है कि सच्चा त्याग, साहस और समर्पण ही भारत की ताकत हैं, और हमें सदैव इन्हीं मूल्यों के प्रति समर्पित रहना चाहिए।’’

अंत में, उन्होंने यह संदेश दिया कि ‘‘हम किसी भी परिस्थिति में ब्रिटिश अधीनता की पुनरावृत्ति नहीं स्वीकार करेंगे, क्योंकि भारतीय आत्मा स्वतंत्रता और स्वाभिमान की दीप्ति से प्रकाशित है। हम रानी लक्ष्मीबाई के आदर्शों को अपनाते हुए हर प्रकार की विदेशी हिंसा, उत्पीड़न और सामाजिक अन्याय से लड़ते रहेंगे।’’

डॉ. अभिषेक वर्मा का यह बयान राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर राजनीतिक जागरूकता बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जो देशभक्ति की भावना को सुदृढ़ करता है और भारत के युवाओं को अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने और उनका संरक्षण करने के लिए प्रेरित करता है।


यह विस्तृत समाचार डॉ. अभिषेक वर्मा के राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण के आधार पर तैयार किया गया है, जो उन्होंने ‘‘ब्रिटिश हुकूमत की अधीनता, हम नहीं स्वीकार करेंगे’’ के संदर्भ में व्यक्त किया है। इनके अलावा उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई के साहस और देशभक्ति को विशेष रूप से याद किया है।​

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