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अंटा विधानसभा चुनाव 2025: भारी मतदान, भाजपा प्रत्याशी को मिला जबरदस्त जनसमर्थन
अंटा। मंगलवार को अंटा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी महापर्व का उल्लास देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की भारी भीड़ उमड़ी। जनता ने...

अंटा। मंगलवार को अंटा विधानसभा क्षेत्र में चुनावी महापर्व का उल्लास देखने को मिला। पूरे क्षेत्र में मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की भारी भीड़ उमड़ी। जनता ने लोकतंत्र की इस प्रक्रिया में बढ़-चढ़कर भागीदारी की।

इस बार भाजपा प्रत्याशी को जनता की ओर से जबरदस्त समर्थन मिला। युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक सभी ने भाजपा उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर क्षेत्र के विकास और स्थिर राजनीति की उम्मीद जताई। भाजपा कार्यकर्ताओं ने भी चुनाव के दौरान सक्रिय भूमिका निभाई, जिससे प्रत्याशी को चुनावी मैदान में मजबूती मिली।

वहीं, कांग्रेस के प्रमुख प्रत्याशी भाईया और नरेश मीणा को जनता का अपेक्षित समर्थन नहीं मिला। स्थानीय मतदाताओं ने बताया कि वे भाजपा के विकल्प में अधिक विश्वास जताते हैं क्योंकि उन्हें क्षेत्र में बेहतर विकास और सशक्त नेतृत्व की उम्मीद है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस चुनाव में भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई दे रही है। अब सभी की निगाहें आगामी 5 दिसंबर को होने वाले चुनाव परिणामों पर हैं, जो क्षेत्र की भविष्य की दिशा तय करेंगे।

वर्तमान मतदान प्रतिशत

अंता विधानसभा सीट पर इस बार कुल 80.32 प्रतिशत मतदान दर्ज हुआ, जो पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में लगभग समान है। 2023 के चुनाव में यह आंकड़ा 81 प्रतिशत था, इसलिए उम्मीद की जा रही थी कि इस बार भी मतदान प्रतिशत लगभग यही रहेगा। मतदान के दिन सुबह से ही सरल और शांतिपूर्ण माहौल रहा, और कुल 227,264 मतदाताओं में से लगभग 183,171 मत पड़े हैं.

पिछले साल का विश्लेषण

2023 में इस सीट पर मतदान का प्रतिशत 80.3 था, जो इस बार के लगभग समान है। इस बार त्रिकोणीय मुकाबले के कारण मतदाताओं का उत्साह और मतदान प्रतिशत दोनों में वृद्धि की उम्मीद थी। हालांकि, अभी के आंकड़ों के अनुसार, वोटिंग प्रतिशत पिछले चुनाव के समान ही रहा, जिससे किसी बड़े बदलाव की संभावना कम है।

चुनाव का माहौल और प्रतिस्पर्धा

इस बार मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा के मोरपाल सुमन, कांग्रेस के प्रमोद जैन भाया और निर्दलीय उम्मीदवार नरेश मीणा के बीच है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा का समर्थन बढ़ा है, जबकि कांग्रेस के उम्मीदवार को अपेक्षाकृत कम समर्थन मिला है। मतदान के प्रतिशत में अधिक बदलाव न होने से यह संकेत मिल रहा है कि नतीजों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

अंतिम नतीजों की अपेक्षा

अंतिम परिणाम 14 नवंबर को अपेक्षित हैं, लेकिन अब तक सामने आए आंकड़ों से लगता है कि भाजपा, कांग्रेस और निर्दलीय के बीच मुकाबला कड़ा रहेगा। मतदान का प्रतिशत और जनता का रुझान दिखाता है कि इस सीट पर परिणाम लगभग पिछले चुनाव जैसे ही रह सकते हैं।