राज्य सरकार किसानों को उर्वरकों की निर्बाध, पर्याप्त एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध
जयपुर, 27 नवम्बर। राज्य के कृषकों को समयबद्ध एवं पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों की इलेक्ट्रॉन सुनिश्चित करने के उद्देश्य से कृषि एवं उद्यानिकी मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल ने पंत कृषि भवन में मीडिया से रूबरू होकर राज्य सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने बताया कि प्रदेश में उर्वरकों की आपूर्ति नियमित रूप से जारी है। राज्य सरकार किसानों को उर्वरकों की निर्बाध रूप से पर्याप्त एवं समय पर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध हैं तथा जिन जिलों में यूरिया व डीएपी की कमी की स्थिति बनी है वहां तत्काल प्रभाव से पूर्ति करवायी जा रही है।
डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि प्रदेश में समय पर हुई पर्याप्त वर्षा तथा अक्टूबर माह में दो बार असामयिक वर्षा से भूमि में नमी की उपलब्धता बढ़ी, जिससे कृषकों द्वारा अग्रिम बुवाई में तेजी आई। इस वर्ष 26 नवम्बर तक गत वर्ष की तुलना में 9 लाख हैक्टेयर अधिक क्षेत्र में बुवाई की जा चुकी है। वहीं तिलहनी फसलों में 34 लाख हैक्टेयर एवं खाद्यान्न फसलों में 29 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में प्रथम सिंचाई के साथ यूरिया की टॉप ड्रेसिंग भी की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप यूरिया की मांग में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
उन्होंने कहा कि किसानों द्वारा आवश्यकता से अधिक उर्वरक खरीदने की प्रवृत्ति भी मांग में वृद्धि का एक प्रमुख कारण है। बावजूद इसके राज्य सरकार ने उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने में कोई कमी नहीं रखी। पिछले 2 वर्षों में डीएपी की औसत आपूर्ति 2.53 लाख मैट्रिक टन करायी जा चुकी है, जो पूर्व सरकार के 5 वर्षीय औसत से अधिक है।
कृषि मंत्री ने बताया कि रबी सीजन के पहले दो महीनों अक्टूबर व नवम्बर में 7.53 लाख मैट्रिक टन की मांग के विरुद्ध 9.15 लाख मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध करवा दिया गया है। इसके अतिरिक्त 24 हजार मैट्रिक टन की आपूर्ति जारी है तथा आगामी दो दिनों में 31 हजार मैट्रिक टन यूरिया और उपलब्ध होने से माह के अंत तक कुल उपलब्धता 9.70 लाख मैट्रिक टन से अधिक हो जाएगी, जो मांग से 29 प्रतिशत अधिक है।
प्रदेश में अब तक लगभग 95 लाख हैक्टेयर में रबी फसलों की बुवाई हो चुकी है, जिसके अनुरूप लगभग 7 लाख मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता है, जबकि 9.15 लाख मैट्रिक टन पहले ही किसानों को उपलब्ध करवा दिया गया है और निरंतर आपूर्ति जारी है।
डॉ. किरोड़ी लाल ने बताया कि विभाग द्वारा उर्वरकों का समान वितरण सुनिश्चित करने हेतु प्रत्येक विक्रय केंद्र पर विभागीय अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है। किसानों को टोकन सिस्टम के माध्यम से उर्वरक वितरण करवाया जा रहा है। कई जिलों जैसे बांरा, झालावाड़, बूंदी, सवाईमाधोपुर, अलवर, भीलवाड़ा आदि में मांग से अधिक यूरिया की उपलब्धता करवाई गई है। प्रतापगढ़ जिले के धरियावद क्षेत्र में भी 2000 मैट्रिक टन यूरिया की शीघ्र आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।
कोटपूतली-बहरोड़ में 8500 मैट्रिक टन डीएपी एवं 16 हजार मैट्रिक टन यूरिया उपलब्ध कराया जा चुका है तथा नवम्बर माह के शेष दिनों में लगभग 50 हजार मैट्रिक टन यूरिया की आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु भारत सरकार से समन्वय कर आपूर्तिकर्ता कंपनियों को निर्देशित किया गया है। दिसंबर 2025 हेतु स्वीकृत मांग 3.80 लाख मैट्रिक टन को बढ़ाकर 4.50 लाख मैट्रिक टन करने का आग्रह भी रसायन एवं उर्वरक मंत्रालय को भेज दिया गया है।
उन्होंने बताया कि उर्वरकों की कालाबाजारी एवं अनियमितताओं पर कड़ा शिकंजा कसते हुए वर्तमान सरकार के कार्यकाल में अब तक 90 एफआईआर दर्ज कराई गई हैं, 98 बिक्री प्राधिकार पत्र निलंबित अथवा निरस्त किए गए हैं तथा 1069 कारण बताओ नोटिस जारी कर प्रभावी मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जा रही है।
मुख्यमंत्री को ‘मातृ भू-सेवक’ की मानद उपाधि से किया गया अलंकृत राज्य सरकार जैन तीर्थाें के विकास के लिए प्रतिबद्ध
जयपुर, 27 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज ज्ञान और अहिंसा का दीपक जलाते हुए समाज का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उनका जीवन त्याग, तपस्या और करूणा का अद्भुत समन्वय है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार सभी धर्मों के विकास और संरक्षण के लिए समर्पित है। उन्होंने आमजन से आह्वान किया कि वे जैन मुनियों के उपदेशों को न केवल सुने, बल्कि उन्हें अपने जीवन में भी उतारें।
श्री शर्मा गुरूवार को सांगानेर कैम्प कार्यालय में आयोजित आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज की दिव्य देशना कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि जैन मुनियों का जीवन साधना से पूर्ण है, वे सांसारिक सुखों को त्याग कर आध्यात्मिक मार्ग पर चलते हैं। उन्होंने कहा कि परम पूज्य श्री सुंदर सागर जी महाराज के जीवन से हमें यह शिक्षा मिलती है कि सच्ची महानता विनम्रता, सच्ची शक्ति अहिंसा और सच्चा सुख त्याग में है।
मुख्यमंत्री द्वारा जैन मुनियों की पद वंदना
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सभी संतो की पद वंदना करते हुए उनका हाथ थामे एसएफएस मानसरोवर स्थित आदिनाथ मंदिर से सांगानेर कैम्प कार्यालय के कार्यक्रम में लेकर आए। इस दौरान मार्ग में पुष्प वर्षा एवं बैंड वादन कर उनका स्वागत-अभिनंदन किया गया। कार्यक्रम में श्री शर्मा को ‘मातृ भू सेवक’ की मानद उपाधि से अलंकृत भी किया गया। इससे पहले श्री शर्मा ने एसएफएस मानसरोवर स्थित श्री आदिनाथ मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की सुख समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की।
जैन धर्म के पंच महाव्रत ने दुनिया को दिया महत्वपूर्ण संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म हमें जीवन जीने की कला सिखाता है। इस धर्म के 24 तीर्थंकरों ने समय-समय पर मानव जाति को सही मार्ग दिखाया है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म की सबसे बड़ी विशेषता ‘अहिंसा परमो धर्म’ है। ये एक वाक्य नहीं बल्कि सम्पूर्ण जीवन दर्शन है। आज पूरी दुनिया हिंसा से जूझ रही है और जैन धर्म का यह संदेश वर्तमान परिवेश में और अधिक प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने कहा कि जैन धर्म के पंच महाव्रत- अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य, अपरिग्रह आज की भौतिकतावादी दुनिया में महत्वपूर्ण संदेश देते हैं। जैन धर्म हमें बताता है कि सच्चा सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं, आन्तरिक संतोष में है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार जैन धर्म के मूल्यों एवं शिक्षाओं को प्रसारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार जैन समाज के तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं के लिए सड़कें, पेयजल, स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए विकास कार्यों को प्राथमिकता दे रही है। कार्यक्रम में श्री शर्मा ने आचार्य श्री सुंदर सागर महाराज के प्रवचनों का श्रवण भी किया।
इस अवसर पर आचार्य श्री सुंदर सागर जी महाराज, आचार्य शंशाक जी महाराज, सहकारिता राज्यमंत्री श्री गौतम कुमार दक, जयपुर ग्रेटर उप महापौर श्री पुनीत कर्णावत सहित जैन मुनि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
डॉ. अभिषेक वर्मा, जिनका पदcurrently राष्ट्रीय समन्वयक (National Convener) के रूप में शिवसेना (NDA) में है, ने पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता और प्रभावशाली नेता के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनके नेतृत्व में शिवसेना ने न केवल संगठनात्मक मजबूती पाई है, बल्कि विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मोर्चों पर भी अपनी पहचान मजबूती से बनाई है।
डॉ. वर्मा ने पार्टी की विचारधारा को जन-जन तक पहुँचाने के लिए सशक्त रणनीतियाँ अपनाई हैं, जिससे पार्टी की राष्ट्रीय स्तर पर छवि और प्रभाव दोनों में वृद्धि हुई है। उनके प्रयासों से शिवसेना ने अनेक राज्यों में विस्तार किया है और युवाओं तथा ग्रामीन क्षेत्रों में अपनी पकड़ मजबूत की है।
वर्मा जी के नेतृत्व में शिवसेना ने सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण, और राष्ट्रीय एकता के लिए कई पहलें शुरू की हैं। उन्होंने स्थानीय और राष्ट्रीय मुद्दों को उठाने में पार्टी की भूमिका को सक्रिय बनाए रखा और जनता के बीच पार्टी की विश्वसनीयता को बढ़ाया है।
डॉ. अभिषेक वर्मा का योगदान केवल राजनीतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वे सामाजिक व सांस्कृतिक विकास के पक्षधर भी हैं। उनकी दूरदर्शिता और समर्पित सेवा ने शिवसेना को एक मजबूत और प्रगतिशील पार्टी के रूप में स्थापित किया है।
डॉ. अभिषेक वर्मा को सितंबर 2025 में राम जन्मभूमि ट्रस्ट (अयोध्या) के अध्यक्ष स्वामी नृत्य गोपाल दास महाराज ने उनकी हिंदुत्व और सनातन धर्म की सुरक्षा एवं प्रचार में योगदान के लिए “सनातन योद्धा” का सम्मानित खिताब दिया। यह खिताब उनके सनातन धर्म के संरक्षण और प्रसार के प्रति अटूट समर्पण और सामाजिक व सांस्कृतिक जागरूकता के लिए एक महत्वपूर्ण मान्यता है। डॉ. वर्मा ने शिवसेना (NDA) के प्रमुख राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में सक्रिय भूमिका निभाई है, जहां उन्होंने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक मुद्दों पर व्यापक कार्य किया है।
उनके इस सम्मान ने उन्हें सनातन धर्म के संरक्षण और प्रचार में एक प्रेरणादायक नेतृत्वकर्ता के रूप में स्थापित किया है, जो देश में सांस्कृतिक विरासत और धार्मिक मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए निरंतर काम कर रहे हैं
धरोहर संरक्षण और सांस्कृतिक उत्थान के लिए किए गए कार्य
डॉ. अभिषेक वर्मा ने धरोहर संरक्षण और सांस्कृतिक उत्थान के क्षेत्र में भी महत्वपूर्ण कार्य किए हैं। वे मानते हैं कि भारतीय सनातन संस्कृति और उसकी पारंपरिक धरोहर को संरक्षित करना न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी आवश्यक है।
उन्होंने विभिन्न ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों और सांस्कृतिक केंद्रों के संरक्षण के लिए अभियान चलाए हैं, जिनका उद्देश्य इन धरोहरों को सुरक्षित रखना और उनकी महत्ता को समाज के सामने प्रस्तुत करना है।
डॉ. वर्मा ने लोक कला, परंपरागत संगीत और नृत्य आदि सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों को पुनर्जीवित करने हेतु कार्यशालाएँ और महोत्सव आयोजित किए हैं, ताकि ये सांस्कृतिक धरोहरें जीवित रहें और युवाओं में इनके प्रति रुचि बढ़े।
इसके अतिरिक्त, उन्होंने शैक्षिक संस्थानों के साथ मिलकर सांस्कृतिक शिक्षा को बढ़ावा देने और महत्त्वपूर्ण सांस्कृतिक चिंतन को पाठ्यक्रम में शामिल करने के प्रयास किए हैं, जिससे यह संस्कृति लंबे समय तक संरक्षित रह सके।
डॉ. अभिषेक वर्मा का जीवन परिचय और उनका धार्मिक दृष्टिकोण
डॉ. अभिषेक वर्मा एक समर्पित समाजसेवी और सनातन संस्कृति के प्रमुख प्रचारक हैं। उनका जीवन समाज सेवा, धर्म प्रचार और सांस्कृतिक उत्थान के लिए समर्पित रहा है। वे न केवल राजनीतिज्ञ हैं, बल्कि एक गहरे धार्मिक चिन्तक और सामाजिक सुधारक भी हैं।
डॉ. वर्मा का धार्मिक दृष्टिकोण सनातन धर्म के सिद्धांतों पर आधारित है, जिसमें वे धर्म को केवल धार्मिक कृत्यों तक सीमित न रखते हुए, इसे एक व्यापक जीवन दर्शन मानते हैं। उनका मानना है कि सनातन धर्म मानवता, नैतिकता, और सामाजिक समरसता का मूल आधार है, जो आज के युग में भी प्रासंगिक है।
उनके विचारों में धर्म और विज्ञान के बीच सामंजस्य स्थापित करने का प्रयास स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। वे धार्मिक शिक्षाओं को आधुनिक जीवन के अनुरूप ढालने और युवाओं तक पहुँचाने का कार्य करते हैं। डॉ. वर्मा की सोच में धर्म केवल आस्था नहीं, बल्कि कार्य और जीवन के मूल्यों का स्तंभ है।
उनकी भूमिका सनातन संस्कृति के जागरूकता प्रवर्तक के रूप में सबसे महत्वपूर्ण रही है, जहां उन्होंने अनेक सामाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से धर्म और संस्कृति के प्रति लोगों में विश्वास और लगाव बढ़ाया है।
सामाजिक समरसता और धर्म चेतना के लिए प्रयास
डॉ. अभिषेक वर्मा ने सामाजिक समरसता और धर्म चेतना के लिए अनेक महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। वे मानते हैं कि सनातन धर्म का सार समाज में एकता, भाईचारा और सहिष्णुता है, जो सभी धर्मों और जातियों के बीच मेलजोल को बढ़ावा देता है। इसी दृष्टिकोण से वे धर्म चेतना को जागृत करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।
उन्होंने विभिन्न धार्मिक और सामुदायिक आयोजनों में भाग लेकर लोगों को सामाजिक सद्भाव और सहअस्तित्व के महत्व को समझाया है। उनके कार्यक्रमों में धर्म के नाम पर होने वाली कट्टरता और विभाजन को खत्म करने पर विशेष जोर रहा है।
डॉ. वर्मा ने शिक्षा, संवाद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से समाज में सकारात्मक संदेश पहुँचाने का कार्य किया है, जिससे सामाजिक असमानताओं और भेदभाव को कम किया जा सके। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण और पिछड़े वर्गों में धर्म चेतना को फैलाने की दिशा में सक्रिय भूमिका निभाई है।
उनके प्रयासों से कई समुदायों में सहयोग और आपसी समझ बनी है, जो सामाजिक समरसता को मजबूत करता है। डॉ. अभिषेक वर्मा की ये पहल सामाजिक सौहार्द्र को बढ़ावा देने और धर्म के मार्ग पर लोगों को सही दिशा देने में अहम साबित हुई हैं।
युवाओं में सनातन संस्कृति जागरूकता हेतु पहल
डॉ. अभिषेक वर्मा युवाओं में सनातन संस्कृति के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए निरंतर पहल करते रहते हैं। वे मानते हैं कि युवा वर्ग ही किसी भी संस्कृति एवं धर्म के सतत विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण आधार है। इसलिए उन्होंने युवाओं को सनातन धर्म की गहराई और उसके जीवन के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराने के लिए कई शिक्षाप्रद और संवादात्मक कार्यक्रम आयोजित किए हैं।
उन्होंने कॉलेजों, विश्वविद्यालयों और युवा संगठनों में विशेष कार्यशालाओं और सेमिनारों का आयोजन किया है, जहां युवाओं को धर्म के मूल सिद्धांतों के साथ-साथ आधुनिक जीवन में सनातन संस्कृति का महत्व समझाया जाता है। इसके अलावा, वे डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी युवाओं तक पहुंच बनाने के लिए प्रयासरत हैं।
डॉ. वर्मा ने सोशल मीडिया पर सनातन धर्म से संबंधित सामग्री साझा कर युवाओं को जोड़ने का काम किया है, जिससे वे धर्म के प्रति जागरूक और प्रेरित हों। इसके साथ ही, उन्होंने युवाओं के लिए स्वच्छता अभियान, सेवा कार्य, और सामाजिक समरसता के कार्यक्रम भी प्रारंभ किए हैं ताकि वे धर्म के सैद्धांतिक और व्यवहारिक दोनों पहलुओं को समझ सकें।
इन पहलों के माध्यम से, डॉ. अभिषेक वर्मा ने युवाओं को न केवल सनातन संस्कृति का संरक्षक बनने के लिए प्रेरित किया है, बल्कि उन्हें समाज में सही दिशा प्रदान करने का भी कार्य किया है। उनकी ये गतिविधियाँ युवा वर्ग के बीच धर्म और संस्कृति की जागरूकता बढ़ाने में सहायक सिद्ध हुई हैं।
प्रमुख कार्यक्रम और सम्मेलन जिनमें डॉ. वर्मा ने भाग लिया
डॉ. अभिषेक वर्मा ने सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए कई प्रमुख कार्यक्रमों और सम्मेलनों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इन आयोजनों में उन्होंने धर्म, संस्कृति, और सामाजिक समरसता से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्याख्यान दिए और अपने विचार साझा किए।
उन्होंने निरंजन अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद जी महाराज के साथ भेंट की, जहां धर्म और संस्कृति के उत्थान पर गहन चर्चा हुई। इसके अलावा, वे अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत रविंद्र पुरी जी महाराज से आशीर्वाद ग्रहण करने के लिए भी विशेष कार्यक्रमों में शामिल हुए।
डॉ. वर्मा ने विभिन्न धार्मिक संगठनों और सामाजिक संस्थाओं द्वारा आयोजित सम्मेलनों में हिस्सा लेकर सनातन धर्म के आधारभूत मूल्य और सामाजिक समरसता को मजबूत करने पर बल दिया। वे कई राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर के धर्म संसदों और सत्संगों में मुख्य अतिथि या वक्ता के रूप में उपस्थित रहे हैं।
उनकी भागीदारी न केवल धार्मिक आयोजनों तक सीमित रही, बल्कि वे सामाजिक न्याय, सांस्कृतिक संरक्षण, और युवा जागरूकता कार्यक्रमों में भी सक्रिय रूप से शामिल रहे हैं। इनके माध्यम से उन्होंने सनातन धर्म के प्रति लोगों में विश्वास और श्रद्धा बढ़ाने का कार्य किया है।
सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में डॉ. वर्मा की भूमिका
सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार में डॉ. अभिषेक वर्मा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक रही है। वे न केवल सनातन धर्म के गहरे सिद्धांतों को समझते हैं, बल्कि उन्हें सरल और प्रभावशाली तरीके से आम जनता तक पहुँचाने में भी सक्षम हैं। डॉ. वर्मा ने विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से सनातन धर्म के मूल सिद्धांतों का प्रचार किया है।
वे समय-समय पर धर्मसभा, सत्संग, और जन जागरण अभियानों का आयोजन करते हैं, जिसमें वे सनातन धर्म की प्राचीन शिक्षाओं तथा आधुनिक समाज में उनके महत्व को स्पष्ट करते हैं। उनका मानना है कि सनातन धर्म केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण जीवनशैली और सामाजिक समरसता का सूत्र है।
डॉ. वर्मा ने सोशल मीडिया, डिजिटल प्लेटफॉर्म, और समाचार माध्यमों का भी उपयोग करते हुए सनातन संस्कृति की चर्चा को व्यापक बनाया है। उन्होंने युवाओं में धर्म के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए अनेक कार्यशालाएँ, सेमिनार, और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए हैं, जिससे सनातन धर्म की दीर्घकालीन स्थिरता सुनिश्चित हो सके।
इसके अतिरिक्त, डॉ. अभिषेक वर्मा कहीं भी अवसर मिलने पर सनातन धर्म की महत्ता, उसकी आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक मूल्य को उजागर करते रहते हैं। उनकी सक्रिय भागीदारी ने सनातन धर्म के प्रचार को एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया है, जो आज देश के विभिन्न हिस्सों में गूंज रहा है।
डॉ. अभिषेक वर्मा का सनातन संस्कृति के प्रति समर्पण और सेवा अतीव प्रेरणादायक है। सनातन धर्म की गहन समझ, उसकी रक्षा एवं प्रसार के लिए उनका योगदान अद्भुत है। वे न केवल धर्म के प्रचारक हैं, बल्कि सामाजिक समरसता एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षक भी हैं।डॉ. अभिषेक वर्मा सनातन संस्कृति के दृढ़ समर्थक एवं प्रचारक हैं। उनका जीवन सनातन धर्म की शिक्षाओं को जन-जन तक पहुँचाने के लिये समर्पित है। वे मानते हैं कि सनातन संस्कृति केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन जीने का एक समग्र दर्शन है जो सामाजिक सद्भाव और आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है। उनके प्रयासों से अनेक संगठनों और समाजों में धर्म की नई पहचान बनी है तथा उन्होंने जन-जागरण के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किए हैं
26 नवंबर 2025 को शिवसेना (NDA) के मुख्य राष्ट्रीय समन्वयक डॉ. अभिषेक वर्मा के निवास पर निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद जी महाराज का पावन आगमन हुआ। स्वामी जी ने वर्मा परिवार को स्नेहपूर्ण आशीर्वाद प्रदान किया।
भेंट के दौरान स्वामी कैलाशानंद जी महाराज ने डॉ. अभिषेक वर्मा द्वारा सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और जन-जागरण हेतु किए जा रहे सतत प्रयासों की सराहना की। स्वामी जी ने कहा कि ऐसे प्रयास संस्कार, धर्म-चेतना और सामाजिक समरसता को सुदृढ़ करते हैं और लोककल्याण की दिशा में सकारात्मक प्रेरणा देते हैं।
विचार-विमर्श में सनातन मूल्यों, सामाजिक समरसता और समाज-कल्याण से जुड़े विषयों पर सार्थक चर्चा हुई। स्वामी जी ने वर्मा परिवार को, विशेष रूप से श्रीमती अंका वर्मा एवं युवराज आदितेश्वर वर्मा को, स्नेहपूर्ण आशीर्वाद प्रदान करते हुए स्वास्थ्य, दीर्घायु और निरंतर प्रगति की मंगलकामनाएँ दीं।
मुख्यमंत्री ने सरदार@150 के तहत यमुना प्रवाह यात्रा को दिखाई हरी झंडी
जयपुर, 26 नवम्बर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि लौह पुरूष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने अपनी दूरदर्शी सोच, दृढ़ इच्छाशक्ति और साहसिक निर्णयों से भारत को एकजुट कर राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि युवा सरदार पटेल के जीवन से प्रेरणा लेकर ‘राष्ट्र प्रथम’ को सर्वोपरि रखें तथा एक मजबूत, एकजुट तथा विकसित भारत के निर्माण में योगदान दें। शर्मा ने सभी को संविधान दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि डॉ. भीमराव अंबेडकर ने विश्व का सबसे बड़ा संविधान हमें दिया है तथा उसी आधार पर देश आगे बढ़ रहा है।
शर्मा ने बुधवार को अमर जवान ज्योति से सरदार@150 यूनिटी मार्च के अंतर्गत यमुना प्रवाह यात्रा के तहत आयोजित समारोह को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान पर पूरे देशभर में सरदार पटेल की 150वीं जयंती मनाई जा रही है। इसी के तहत यमुना प्रवाह यात्रा भी संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस यात्रा के तहत राजस्थान सहित विभिन्न प्रदेशों से युवा जयपुर से कमरसद तक की यात्रा करेंगे। यह यात्रा युवाओं के लिए सरदार पटेल के जीवन, संघर्ष और देशभक्ति को करीब से जानने का अवसर है। साथ ही, युवाओं को सरदार पटेल के आदर्शों और मूल्यों को समझने का प्रत्यक्ष अनुभव भी मिलेगा।
सरदार पटेल ने कभी नहीं किया सिद्धांतों से समझौता
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरदार पटेल का स्वतंत्रता आंदोलन में अमूल्य योगदान रहा। बारडोली सत्याग्रह में उनकी प्रभावशाली भूमिका के कारण उन्हें सरदार की उपाधि दी गई। उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन में भी बढ़-चढ़कर भाग लिया और किसानों को अपने अधिकारों के लिए लड़ना सिखाया और सरदार पटेल जेल भी गए। लेकिन उन्होंने कभी अपने सिद्धांतों के साथ समझौता नहीं किया।
कूटनीति और दूरदर्शिता से 562 रियासतों का किया एकीकरण
शर्मा ने कहा कि 15 अगस्त 1947 को भारत को आजादी तो मिली लेकिन विभाजन का दर्द भी सहना पड़ा। उस समय देश सैकड़ों टुकड़ों में बंटा हुआ था। उन्होंने कहा कि देश की 562 रियासतें स्वतंत्र इकाई थी। सरदार पटेल ने अपनी कूटनीति, दूरदर्शिता और कभी-कभी कठोरता का इस्तेमाल करते हुए प्रत्येक रियासत को भारत में मिलाना शुरू किया। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने ऑपरेशन पोलो चलाकर हैदराबाद तथा जनमत संग्रह कराकर जूनागढ़ को भारत में शामिल कराया। उन्होंने भारत की एकता और अखंडता को अपना सबसे बड़ा लक्ष्य बनाया और उसे पूरा करके दिखाया।
धारा 370 हटाकर प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल के अधूरे सपने को किया पूरा
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ाने का बीड़ा उठाया है। सरदार पटेल का अधूरा सपना प्रधानमंत्री ने कश्मीर से धारा 370 हटाकर पूरा किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भारत को एक सूत्र में बांध रहे हैं। पूरब से पश्चिम तक और उत्तर से दक्षिण तक आज भारत एक हो रहा है। सरदार पटेल के योगदान को सम्मान देते हुए विश्व की सबसे बड़ी प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी बनाई गई। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में वर्ष 2014 के बाद देश में गरीब कल्याण, विकास योजनाओं, आतंकवाद-नक्सलवाद का खात्मा तथा विश्व पटल पर देश का सम्मान बढ़ने जैसे अभूतपूर्व कार्य हुए हैं। उन्होंने कहा कि पूरा विश्व भारत को उम्मीदों से देख रहा है तथा दुनिया के सबसे बड़े लीडर के नेतृत्व में देश नई ऊचाईयां छू रहा है।
शर्मा ने कहा कि सरदार पटेल का जीवन युवाओं और हर भारतीय के लिए प्रेरणा है। युवा पीढ़ी उनके जीवन से कर्तव्यनिष्ठा, ईमानदारी और सत्यनिष्ठा, दृढ़ संकल्प, एकता तथा सादगी की पांच प्रमुख सीख ले सकती है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने सरदार@150 यूनिटी मार्च के तहत यमुना प्रवाह यात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इससे पहले श्री शर्मा ने अमर जवान ज्योति पर पुष्पचक्र अर्पित कर शहीदों को नमन भी किया।
इस दौरान सांसद मदन राठौड़, श्रीमती मंजू शर्मा, विधायक कालीचरण सराफ, जितेन्द्र गोठवाल, गोपाल शर्मा, बालमुकुन्दाचार्य सहित बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित रहे।
76वें संविधान दिवस के अवसर पर संविधान पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन
जयपुर, 26 नवम्बर। 76वें संविधान दिवस के अवसर पर बुधवार को प्रातः 10 बजे सचिवालय के कॉन्फ्रेंस हॉल में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों को संविधान की प्रस्तावना का वाचन करवाया। इस अवसर पर संविधान पर आधारित लघु फिल्म का प्रदर्शन भी किया गया।
कार्यक्रम कार्यक्रम की शुरूआत में सामान्य प्रशासन विभाग के शासन सचिव डॉ. जोगाराम एवं कार्मिक विभाग शासन सचिव श्रीमती अर्चना सिंह ने मुख्य सचिव का स्वागत किया।
कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव, सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
कोटा जिले के रामगंजमंडी क्षेत्र में पाटली नदी के माधव घाट से ‘जागो, जगाओ एकता पदयात्रा’ की शुरुआत कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने...
कोटा जिले की रामगंज मंडी विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत जुल्मी स्थित पाटली नदी के माधव घाट से सोमवार को ‘जागो, जगाओ एकता पदयात्रा’ का शुभारंभ किया गया। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित तीन दिवसीय पदयात्रा का आरंभ कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा और शिक्षा मंत्री मदन दिलावर ने गंगा पूजन और चुनरी अर्पण कर किया। पदयात्रा में बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं हाथों में तिरंगा लेकर उत्साह के साथ शामिल हुए।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि एवं आपदा प्रबंधन मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा ने कहा कि सरदार पटेल ने रियासतों को एक सूत्र में जोड़कर अखंड भारत की आधारशिला रखी। उन्होंने बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पूरे देश ने उन्हें सम्मानपूर्वक याद किया है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार गरीबों के उत्थान और आर्थिक असमानता को खत्म करने के लिए निरंतर काम कर रही है।
शिक्षा मंत्री मदन दिलावर की सराहना करते हुए डॉ. मीणा ने कहा कि उन्होंने रामगंजमंडी क्षेत्र में सड़क, पानी, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के विकास में उल्लेखनीय कार्य किए हैं। उन्होंने बताया कि एक समय पूरी तरह विलुप्त हो चुकी पाटली नदी को श्री मदन दिलावर ने भागीरथ प्रयास करते हुए पुनर्जीवित किया है।
अपने संबोधन में शिक्षा एवं पंचायत राज मंत्री मदन दिलावर ने कहा कि सरदार पटेल ने रियासतों का एकीकरण कर देश को एकता के सूत्र में बांधा। उन्होंने बताया कि वंदे मातरम के 150 वर्ष और बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर पूरा देश गौरव महसूस कर रहा है। उन्होंने कहा कि पाटली नदी को 5 करोड़ रुपये की लागत से पुनर्जीवित किया गया है, जिससे अब 50 हजार बीघा भूमि सिंचित होगी। दिलावर ने कहा कि रामगंजमंडी में देश की सबसे चौड़ी टनल बन रही है और यहां पहला सैनिक स्कूल भी खुलेगा। इसके साथ ही वेद पाठशाला और संस्कृत कॉलेज क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था को नई ऊंचाई देंगे।
शुभारंभ समारोह में दोनों मंत्रियों ने संतों और स्वच्छकारों पर पुष्प वर्षा कर सम्मान व्यक्त किया तथा चरण प्रक्षालन कर सामाजिक समरसता का संदेश दिया।
प्रदेश में स्मार्ट पुलिसिंग को मिलेगा बढ़ावा- डीजीपी श्री राजीव कुमार शर्मा - राज्य की आंतरिक व सार्वजनिक सुरक्षा व्यवस्था होगी और अधिक मजबूत
जयपुर, 24 नवम्बर। राजस्थान पुलिस और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात के बीच सोमवार को पुलिस मुख्यालय में राष्ट्रीय एवं आंतरिक सुरक्षा के क्षेत्र में अकादमिक, प्रशिक्षण और अनुसंधान सहयोग को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। यह पुलिसिंग में अनुसंधान-आधारित सुधारों और फील्ड स्तर की क्षमताओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। एमओयू के तहत स्मार्ट पुलिसिंग, सुरक्षा नवाचार और पेशेवर क्षमता-विकास के लिए संयुक्त कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे राज्य की आंतरिक और सार्वजनिक सुरक्षा प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाया जा सकेगा।
महानिदेशक पुलिस श्री राजीव कुमार शर्मा ने कहा कि राज्य में पुलिसिंग की उत्कृष्टतम प्रथाओं को लगातार अपनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा विश्वविद्यालय द्वारा किए गए नवाचार पूरे देश के लिए उपयोगी सिद्ध हो रहे हैं। विश्वविद्यालय के सहयोग से राजस्थान पुलिस भी और अधिक कुशलता के साथ कार्य कर सकेगी। साथ ही, प्रदेश में पुलिस की कार्यकुशलता और पेशेवर क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
उन्होंने कहा कि इस एमओयू के माध्यम से स्मार्ट पुलिसिंग, साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक तथा आंतरिक सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कार्य और अधिक संगठित तथा प्रभावी ढंग से संपादित किए जा सकेंगे। साथ ही, बड़ी घटनाओं के दौरान आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञों की विशेषज्ञता का लाभ भी लिया जा सकेगा। श्री शर्मा ने कहा कि राज्य में पुलिस शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप बनाने में रक्षा विश्वविद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात के वाइस चांसलर प्रो. डॉ. बिमल एन. पटेल ने कहा कि साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने आत्मनिर्भरता के साथ कई ऐतिहासिक उपलब्धियाँ हासिल की हैं। उन्होंने कहा कि आरआरयू की अकादमिक और विश्लेषणात्मक विशेषज्ञता, राजस्थान पुलिस की रणनीतिक तथा परिचालन क्षमताओं को और अधिक मजबूत एवं उन्नत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
डॉ. पटेल ने बताया कि अब तक विश्वविद्यालय द्वारा 82 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण प्रदान किया जा चुका है तथा विश्वभर में अनेक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक आयोजित किए गए हैं। उन्होंने कहा कि एमओयू के बाद राजस्थान पुलिस भी आरआरयू के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों और कोर्सों का लाभ आसानी से ले सकेगी। इस दौरान उन्होंने विश्वविद्यालय के कार्यों, अनुसंधान गतिविधियों तथा संचालित विभिन्न कार्यक्रमों के बारे में विस्तृत जानकारी भी साझा की।
कार्यक्रम में महानिदेशक पुलिस( प्रशिक्षण एवं यातायात) श्री अनिल पालीवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए एमओयू के माध्यम से प्राप्त होने वाले लाभों का विस्तृत और सारगर्भित विवरण प्रस्तुत किया।
एमओयू पर राजस्थान पुलिस की ओर से उप महानिरीक्षक पुलिस, प्रशिक्षण, श्री शरद चौधरी तथा राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की ओर से डीन श्री अविनाश खारेल ने हस्ताक्षर किए।
इस दौरान महानिदेशक पुलिस, कानून एवं व्यवस्था श्री संजय कुमार अग्रवाल सहित वरिष्ठ पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।
उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक सुरक्षा, पुलिस प्रशासन, साइबर सुरक्षा एवं डिजिटल फॉरेंसिक जैसे क्षेत्रों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। इस एमओयू से पुलिस शिक्षा की गुणवत्ता तथा प्रशिक्षण प्रणाली और अधिक सुदृढ़ हो सकेगी। विशेष प्रशिक्षण और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से पुलिस प्रशिक्षकों और अधिकारियों की दक्षता और कौशल को और अधिक सुदृढ़ किया जा सकेगा।
विशेषज्ञता का हो सकेगा आदान-प्रदान-
इस समझौते से फैकल्टी सदस्यों, पुलिस अधिकारियों एवं शोधकर्ताओं के लिए विनिमय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जिससे साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, आतंकवाद विरोधी रणनीति तथा खुफिया प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ज्ञान एवं सर्वाेत्तम प्रथाओं को साझा किया जा सकेगा।
संयुक्त अनुसंधान एवं नवाचार-
संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं एवं नवाचारों से साक्ष्य आधारित पुलिसिंग, डेटा-आधारित रणनीतियों और नीति निर्माण को बढ़ावा मिल सकेगा।
कौशल विकास एवं उच्च शिक्षा-
राजस्थान पुलिस के अधिकारी एवं कर्मचारी आरआरयू के अकादमिक कार्यक्रमों के माध्यम से उच्च शिक्षा के अवसर प्राप्त कर सकेंगे, जिससे उनके व्यावसायिक विकास एवं कैरियर उन्नति में सहायता मिलेगी।
मुख्यमंत्री निवास पर नियमित जनसुनवाई -अन्त्योदय राज्य सरकार की योजनाओं का प्रमुख लक्ष्य
जयपुर, 24 नवम्बर। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राज्य सरकार जवाबदेहिता एवं पारदर्शिता से कार्य करते हुए सुशासन की ओर अग्रसर है। सरकार के द्वारा किए जा रहे कार्यक्रमों, नवाचारों एवं योजनाओं का प्रमुख ध्येय अंतिम पायदान पर बैठे व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। जनसुनवाई भी इसी लक्ष्य की ओर बढ़ता एक मजबूत कदम है। मुख्यमंत्री नियमित रूप से इस जनसुनवाई में लोगों की समस्याओं का समाधान कर उन्हें राहत दे रहे हैं।
श्री शर्मा ने सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर जनसुनवाई की। उन्होंने इस दौरान आमजन की परिवेदनाओं को संवेदनशीलता के साथ सुनते हुए अधिकारियों को उन समस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसुनवाई में परिवादी उम्मीद के साथ आते हैं। ऐसे में अधिकारी इन प्रकरणों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए इनका शीघ्र निस्तारण करें।
श्री शर्मा ने जनसुनवाई में बड़ी संख्या में आई महिलाओं, दिव्यांगों, बुजुर्गों सहित विभिन्न लोगां की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया। आमजन अपनी परिवेदनाओं के निस्तारण से बेहद संतुष्ट नजर आए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि परिवादियों को जल्द से जल्द राहत दी जाए। साथ ही, लंबित प्रकरणों की नियमित मॉनिटरिंग करते हुए इसका शीघ्र समाधान करें। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि प्रकरणों के निस्तारण में किसी भी तरह की लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्यवाही की जाए।
मुख्यमंत्री ने इस दौरान सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता, ग्रामीण विकास एवं पंचायतीराज, श्रम, कृषि, गृह, राजस्व, पशुपालन, जयपुर विकास प्राधिकरण, नगर निगम, शिक्षा, चिकित्सा, पेयजल सहित विभिन्न विभागों की आमजन से जुड़ी परिवेदनाओं को सुना और उनका मौके पर ही निस्तारण किया। इस दौरान श्री शर्मा ने विभिन्न संस्थाओं द्वारा आयोजित किए जाने वाले कार्यक्रमों के पोस्टर विमोचन भी किए।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और आमजन उपस्थित रहे।
आउटलुक ट्रैवलर अवॉड्र्स 2025 में एक बार फिर चमका राजस्थान
झीलों की नगरी उदयपुर ने वेडिंग टूरिज़्म में अपने महत्व को एक बार फिर साबित करते हुए आउटलुक ट्रैवलर अवॉड्र्स 2025 में ‘बेस्ट वेडिंग डेस्टिनेशन’ का खिताब हासिल किया। यह अवॉर्ड शनिवार को नई दिल्ली स्थित हयात रीजनसी में आयोजित भव्य समारोह में घोषित किया गया।
सिक्किम के पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री टी.टी. भूटिया द्वारा राजस्थान पर्यटन के अतिरिक्त निदेशक आनंद त्रिपाठी और संयुक्त निदेशक (उदयपुर) सुमिता सारोच को प्रदान किया गया।
गौरतलब है कि डेस्टिनेशन वेडिंग श्रेणी में राजस्थान लगातार अग्रणी रहा है। महलों, झीलों और मेवाड़ी धरोहर की वजह से उदयपुर वर्षों से देश-विदेश के कपल्स की पहली पसंद बना हुआ है। हाल के वर्षों में उदयपुर एशिया ही नहीं बल्कि वैश्विक रैंकिंग में भी शीर्ष पांच गंतव्यों में शामिल रहा है।
“भारतीय वेडिंग डेस्टिनेशन में राजस्थान नंबर वन, अब वैश्विक स्तर पर भी मजबूत मौजूदगी”
उपमुख्यमंत्री व पर्यटन मंत्री दिया कुमारी ने उदयपुर बेस्ट डेस्टिनेशन अवार्ड मिलने पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए कहा कि “डेस्टिनेशन वेडिंग के लिए राजस्थान पहली पसंद रहा है। देश के लगभग 70ः हेरिटेज प्रॉपर्टीज यहां स्थित हैं। हमारे किले, महल और हवेलियां सिर्फ संरचनाएं नहीं, बल्कि राजस्थान के इतिहास की जीवंत आत्मा हैं।” उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा राजस्थान के 120 से अधिक हेरिटेज वेन्यू नियमित रूप से डेस्टिनेशन वेडिंग की मेजबानी करते हैं। “यह अपने आप में बहुत कुछ कह देता है। यहां की खूबसूरती, वातावरण और परंपराएं शादी को सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं रहने देतीं यहां वह एक यादगार अनुभव बन जाती है।”वहीं पर्यटन आयुक्त श्रीमती रूकमणी रियाड़ ने कहा कि उपमुख्यमंत्री व पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के दूरदर्शी नेतृत्व में, पर्यटन विभाग अब अपनी विरासत और संस्कृति का पूरा लाभ उठाते हुए वेडिंग, वेलनेस और एडवेंचर टूरिज़्म जैसे क्षेत्रों में अपनी विशिष्ट पहचान दर्ज कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
कड़े विशेषज्ञ मूल्यांकन के बाद चयन-
नामांकन पर्यटन और हेरिटेज स्टडीज़ के विशेषज्ञों की जूरी ने तय किए। पैनल में ज्योति मायल, अनुभव सप्रा, कर्नल रणवीर सिंह जम्वाल, डॉ. नाविना जाफा, डॉ. लतिका नाथ और जूरी चेयर अनिंदिता घोष शामिल थीं। कई पैरामीटरों के आधार पर विस्तृत समीक्षा के बाद उदयपुर को ‘बेस्ट वेडिंग डेस्टिनेशन’ चुना गया।
दिल्ली में हुआ शानदार आयोजन—
कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ हुई। विभिन्न श्रेणियों में अवॉड्र्स प्रदान किए गए। देशभर के पर्यटन विशेषज्ञ, उद्योग से जुड़े प्रतिनिधि और ट्रैवल फ्रेटरनिटी के प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
राजस्थान का वेडिंग टूरिज़्म सेक्टर में क्रेज बरकरारः उदयपुर की वैश्विक पहचान हाल के वर्षों में कई हाई-प्रोफाइल सेलिब्रिटी शादियों के कारण और मजबूत हुई है। इसी कड़ी में संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पुत्र डोनाल्ड ट्रंप जूनियर भी उद्योगपति रामराजू मंटेना की पुत्री की शादी में शामिल होने के लिए भारत पहुंचे हैं और आज उदयपुर पहुंचेंगे। 21 से 23 नवंबर तक चलने वाले इस शाही समारोह में वे अपनी साथी के साथ हिस्सा लेंगे और झील पिछोला के किनारे स्थित द लीला पैलेस में ठहरेंगे। ऐसे आयोजन उदयपुर को दुनिया के अग्रणी वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में लगातार मजबूती देते हैं।
पर्यटन क्षेत्र को मिलेगी नई गति—
विशेषज्ञों का मानना है कि यह अवॉर्ड ऐसे समय आया है जब राजस्थान फिल्म शूटिंग, इवेंट्स और वेडिंग टूरिज़्म में तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। उद्योग जगत ने इसे राज्य की ब्रांड वैल्यू और भविष्य के निवेश अवसरों के लिए सकारात्मक संकेत बताया है।
रविवार को उमड़ा भारी उत्साह, 2,000 से अधिक लोगों ने किया रोमांचकारी वन्यजीव दर्शन
जयपुर, 23 नवंबर। राजधानी जयपुर स्थित नाहरगढ़ जैविक उद्यान में रविवार का दिन रोमांच और उत्साह से भरपूर रहा। सुहावने मौसम और अवकाश के संगम ने पर्यटकों को बड़े पैमाने पर प्रकृति के करीब खींचा, जिसके परिणामस्वरूप कुल 2,068 पर्यटकों ने उद्यान का भ्रमण कर वन्यजीवों का नजदीक से अवलोकन किया। उद्यान में सुबह से ही दर्शकों की आवाजाही बढ़ती रही और पूरा परिसर जीवंत माहौल से गुलजार रहा।
सहायक वन संरक्षक श्री देवेन्द्र सिंह राठौड़ ने बताया कि इस रविवार लायन सफारी सबसे बड़ा आकर्षण बनी रही। कुल 432 पर्यटकों ने सफारी में भाग लेकर एशियाटिक लायन को बेहद करीब से देखने का रोमांचक अनुभव लिया। शेरों की चंचल हरकतें, साहसिक अभिव्यक्ति और जंगल का प्राकृतिक वातावरण पर्यटकों के लिए अविस्मरणीय रहा।
इसके अलावा व्हाइट टाइगर भी पर्यटकों की उत्सुकता का केन्द्र बना रहा। कई परिवार, स्कूल समूह और पर्यटक विशेष रूप से टाइगर देखने पहुंचे और उसके स्वभाव तथा गतिविधियों में गहरी रुचि दिखाई। शहर के मध्य में हरियाली, शांत वातावरण और वन्यजीवों का यह अनूठा संगम पर्यटकों के लिए एक परफेक्ट वीकेंड आउटिंग साबित हुआ।
मुख्य वन संरक्षक डॉ. टी. मोहनराज के निर्देशन में उद्यान में सुरक्षा, साफ-सफाई, गाइडेंस, मार्गदर्शन और अन्य सुविधाओं को लगातार बेहतर किया जा रहा है। पर्यटकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए लायन सफारी गेट एवं बस ड्राइवरों को वायरलेस सेट उपलब्ध कराए गए हैं, ताकि सफारी संचालन और संचार व्यवस्था अधिक प्रभावी रहें।
रविवार को डीसीएफ श्री विजयपाल सिंह और एसीएफ श्री देवेन्द्र सिंह राठौड़ ने उद्यान का निरीक्षण कर सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की और आवश्यक निर्देश प्रदान किए। पर्यटकों की सुरक्षा, वाहन व्यवस्था और सफारी संचालन में राजाराम मीणा, सोनू मीणा, कैलाश, सहायक वनपाल हंसा देवी, सरिता चौधरी, उमेश वशिष्ठ, निर्मला देवी और भंवर सिंह की सराहनीय भूमिका रही, जिन्होंने पूरे दिन सुचारू रूप से सेवाएं प्रदान कीं।
नाहरगढ़ जैविक उद्यान इन दिनों जयपुरवासियों और बाहरी राज्यों से आने वाले पर्यटकों के लिए प्राकृतिक सौन्दर्य, रोमांच और ज्ञानवर्धक अनुभव का प्रमुख केन्द्र बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में पर्यटन सीजन के बढ़ने के साथ यहां पर्यटकों की संख्या में और वृद्धि होने की संभावनाएं हैं।