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राज्य स्तरीय प्रदर्शनी में एक छत के नीचे मिली सभी विभागीय योजनाओं की जानकारी
समापन दिवस पर आमजन की रही व्यापक सहभागिता, डीआईपीआर डायलॉग में संगीत एवं तकनीक पर चर्चा - कालिका पेट्रोलिंग यूनिट ने आत्मरक्षा के गुरों से अवगत कराया

जयपुर, 18 दिसंबर। राज्य सरकार के कार्यकाल के दो वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर जवाहर कला केंद्र, जयपुर में आयोजित 4 दिवसीय राज्य स्तरीय प्रदर्शनी “नव उत्थान–नई पहचान, बढ़ता राजस्थान–हमारा राजस्थान” के समापन दिवस पर गुरुवार को बड़ी संख्या में युवाओं, विद्यार्थियों और आम नागरिकों की सक्रिय भागीदारी रही।

प्रदर्शनी में सभी विभागों की योजनाओं को प्रदर्शित करने के साथ संवाद, तकनीक और प्रत्यक्ष सहभागिता के माध्यम से आमजन तक पहुंचाया गया। विभागीय स्टॉल्स, डिजिटल प्रस्तुतियों और इंटरएक्टिव गतिविधियों के जरिए आगंतुकों को जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी मिली ।

इंटरएक्टिव गतिविधियों ने बनाया सहभागिता आधारित अनुभव-

सूचना एवं जनसंपर्क विभाग द्वारा आयोजित चिलैक्स इंटरएक्टिव गेम चारों दिन युवाओं और आम नागरिकों के आकर्षण का केंद्र रहा। बहुविकल्पीय प्रश्नों के माध्यम से प्रतिभागियों ने योजनाओं और समसामयिक विषयों से जुड़ी अपनी समझ परखी, वहीं सही उत्तर देने वालों को प्रोत्साहन स्वरूप पुरस्कार प्रदान किए गए।

परिवहन विभाग की स्टॉल पर सिम्युलेटेड ड्राइविंग अनुभव के जरिए सड़क सुरक्षा और यातायात नियमों की व्यवहारिक जानकारी दी गई, जिससे आमजन सुरक्षित एवं जिम्मेदार ड्राइविंग के प्रति जागरूकता हुए।

डीआईपीआर डायलॉग में विशेषज्ञों से संवाद और आत्मरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन-

प्रदर्शनी में आयोजित डीआईपीआर डायलॉग सत्रों में युवाओं को विशेषज्ञों से सीधे संवाद का अवसर प्रदान किया। “संगीत क्षेत्र में युवाओं के लिए करियर अवसर एवं चुनौतियां” विषय पर आयोजित सत्र में डॉ. शारदा देवड़ा, एसोसिएट प्रोफेसर, आईएएसई टीटी कॉलेज, अजमेर ने रचनात्मकता, प्रशिक्षण और निरंतर अभ्यास को सफलता की कुंजी बताया।

इसी श्रृंखला में सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के उपनिदेशक डॉ. आशीष खंडेलवाल ने डिजिटल तकनीक, स्मार्ट गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के बढ़ते उपयोग पर जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि किस प्रकार आधुनिक तकनीकें संचार, दैनिक कार्यों और सूचना के त्वरित एवं विश्वसनीय प्रसार को अधिक प्रभावी और सरल बना रही हैं।

इसके बाद कराटे प्रशिक्षक श्री महेश कायथ के निर्देशन में आत्मरक्षा एवं हथियार संचालन से संबंधित प्रभावशाली प्रदर्शन प्रस्तुत किए गए। कार्यक्रम में लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स विजेता चार वर्षीय मनु श्री ने विभिन्न आत्मरक्षा तकनीकों का प्रदर्शन कर बालिकाओं एवं महिलाओं को आत्मरक्षा के गुरों से अवगत कराया। इन प्रदर्शनों के माध्यम से महिला सुरक्षा, आत्मविश्वास और सजगता का संदेश दिया गया।

इसी क्रम में कालिका पेट्रोलिंग यूनिट ने आमजन को राजकोप सिटीजन ऐप की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हर महिला इस ऐप के जरिए पुलिस की मदद मांग सकती है। यूनिट ने चैन पर्स स्नैचिंग, छेड़छाड़ जैसी स्थिति से बचाव के गुर सिखाए।

छात्र छात्राओं ने जानी सरकार की योजनाएं-

प्रदर्शनी में बड़ी संख्या में विद्यालयों के विद्यार्थियों ने सहभागिता की। कई विद्यालयों के विद्यार्थियों ने विभागों की स्टॉल्स के माध्यम से राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं, नागरिक सुविधाओं एवं तकनीकी पहलों की जानकारी प्राप्त की, जिससे उनमें जागरूक नागरिक के रूप में समझ विकसित हुई।

राजस्थान देश में अग्रणी राज्यों में शामिल, निवेश प्रोत्साहन के लिए 23 क्षेत्रों में प्रक्रिया को किया आसान
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस

जयपुर, 18 दिसंबर। देश के यशस्वी प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर केंद्र सरकार द्वारा सभी राज्यों में निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रक्रिया को आसान बनाने और अनावश्यक प्रावधानों को हटाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसके क्रम में राज्य के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने इस संबंध में लगातार मॉनिटरिंग की और बैठकों में समीक्षा की। इसके परिणामस्वरूप आज राजस्थान ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के मामले में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। केंद्र सरकार द्वारा चिन्हित सभी 23 प्राथमिक क्षेत्रों में राज्य सरकार ने बेहतर कार्य किया है।

उद्योग एवं वाणिज्य विभाग और निवेश संवर्धन ब्यूरो के आयुक्त श्री सुरेश कुमार ओला ने बताया कि राज्य सरकार ने निवेश से जुड़ी प्रक्रिया को काफी आसान बना दिया है। कागजी प्रक्रिया को खत्म कर, पूरी प्रक्रिया को ऑनलाइन किया गया है। इसके साथ ही, कई कानूनों और प्रावधानों में संशोधन भी किया गया है। राज्य सरकार द्वारा ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की दिशा में उठाए गए इन कदमों से प्रदेश को बेहतर निवेश गंतव्य बनाने का संकल्प और सशक्त हुआ है।

श्री ओला ने बताया कि ‘राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट’ के तहत किए गए 35 लाख करोड़ रुपये के निवेश समझौतों में से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक के समझौतों पर कार्य प्रारंभ हो गया है। एक साल की अवधि में 20 प्रतिशत से अधिक समझौतों का धरातल पर उतरना, निवेश प्रक्रिया के सरलीकरण पर मुहर लगाता है।

एमएसएमई: ऑटो अप्रूवल अब 30 दिन में —

एमएसएमई सेक्टर को बढ़ावा देने के लिए, राज्य ने संशोधन कर शहरी क्षेत्रों में भूमि रूपांतरण प्रक्रिया को सरल बनाया है। आवेदन के ऑटोमेटिक स्वीकृति की समयसीमा को कम किया गया है। अब 60 कार्यदिवस के बजाय मात्र 30 कार्यदिवस में ही आवेदन स्वतः स्वीकृत हो जाएगा। इससे परियोजनाओं में होने वाली देरी में कमी आएगी और नए उद्यमों की स्थापना तेजी से होगी।

877 सेक्टर अप्रदूषणकारी उद्योगों की सूची में शामिल —

एमएसएमई के लिए ‘कंसेंट टू एस्टेब्लिश’ (सीटीई) और ‘कंसेंट टू ऑपरेट’ (सीटीओ) के लिए समयसीमा 120 दिनों से घटाकर 21 दिन की गई है। इसके साथ ही, रेड और वृहद् श्रेणी के उद्यमों के लिए यह अवधि घटाकर 60 दिन कर दी गई है। प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सेल्फ सर्टिफिकेशन के आधार पर पर्यावरण अधिनियमों के तहत अनुपालना कर रही इकाइयों के लिए सीटीओ का सिस्टम-जनरेटेड ऑटो रिन्यूवल प्रारंभ किया है। साथ ही, वाटर एण्ड एयर पॉल्यूशन रूल्स में संशोधन के माध्यम से अप्रदूषणकारी ‘व्हाइट कैटेगरी’ उद्योगों की सूची को 104 सेक्टर से बढ़ाकर 877 कर दिया गया है। राज्य सरकार के इस निर्णय से अधिक गैर-प्रदूषणकारी उद्योगों को छूट मिलने से परियोजना अनुमोदनों में तेजी आएगी और औद्योगिक वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

6 घंटे कार्य के बाद 30 मिनट का विश्राम आवश्यक —

सूक्ष्म उद्यमों पर नियामक भार कम करने के उद्देश्य से ‘राजस्थान शॉप्स एंड कॉमर्शियल एस्टाब्लिशमेंट एक्ट, 1958’ के तहत कर्मचारी संख्या की सीमा 0 से बढ़ाकर 10 कर दी गई है। प्रतिष्ठानों को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए राज्य ने एक अध्यादेश जारी कर अधिनियम के तहत अनुमत कार्य घंटों में वृद्धि की है। अध्यादेश के अनुसार दैनिक कार्य समय 9 घंटे से बढ़ाकर 10 घंटे कर दिया गया है। अधिकतम 6 घंटे के कार्य के पश्चात न्यूनतम 30 मिनट के विश्राम का प्रावधान किया गया है तथा तिमाही ओवरटाइम सीमा 144 घंटे कर दी गई है। ‘राजस्थान फैक्ट्री रूल्स, 1951’ के नियम 100 में संशोधन किया गया है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं एवं माताओं को छोड़कर, महिला श्रमिकों को सभी जोखिम पूर्ण कार्यों में कार्य करने की अनुमति दी गई है, जिनमें वे 15 कार्य भी शामिल हैं जो पूर्व में महिलाओं के लिए निषिद्ध थे।

थर्ड पार्टी फायर इंस्पेक्शन का प्रावधान —

फायर सेफ्टी कंप्लायंस को भी सुव्यवस्थित किया गया है। इसके तहत एम्पैनल्ड एजेंसियों के माध्यम से थर्ड पार्टी फायर इंस्पेक्शन का प्रावधान लागू किया गया है तथा फायर एनओसी सर्टिफिकेट की वैधता अवधि बढ़ाई गई है। इससे सुरक्षा मानकों को सुनिश्चित करते हुए अनुमति में तेजी आएगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक उद्योग स्थापना के लिए कई प्रावधान —

राज्य सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने के नियमों में ढील दी है, ताकि कम चौड़ाई वाली सड़कों वाले इलाकों में भी छोटे और मध्यम उद्योग बिना किसी कानूनी बाधा के शुरू किए जा सकें। इस मामले में राजस्थान अग्रणी राज्यों में शामिल है। लेआउट प्लान वाले क्षेत्रों में सड़क चौड़ाई 9 मीटर और बिना लेआउट वाले क्षेत्रों में 4.5 मीटर निर्धारित की गई है। राज्य ने औद्योगिक एवं वाणिज्यिक क्षेत्रों में भूमि उपयोग को अनुकूलित करने के लिए भी महत्वपूर्ण सुधार लागू किए हैं।

वाणिज्यिक भूखण्डों पर 50 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की सीमा समाप्त —

नगरीय विकास एवं आवासन विभाग एवं रीको ने भवन मानकों में संशोधन कर भूमि के सदुपयोग को सुनिश्चित किया है और पार्किंग मानकों को तर्कसंगत बनाया है। पूर्व में वाणिज्यिक भूखण्डों पर 50 प्रतिशत ग्राउंड कवरेज की सीमा को अब समाप्त कर दिया गया है, जिससे नगरीय योजना में अधिक लचीलापन सुनिश्चित हुआ है। नगरीय विकास के क्षेत्र में, राजस्थान सरकार द्वारा ‘ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट पॉलिसी’ जारी की गई है। यह नीति मेट्रो कॉरिडोर, बीआरटीएस तथा प्रमुख परिवहन मार्गों के आसपास उच्च घनत्व मिश्रित उपयोग विकास को बढ़ावा देती है, जिससे यातायात भीड़ में कमी, क्षैतिज शहरी विस्तार पर नियंत्रण, सार्वजनिक परिवहन के उपयोग में वृद्धि तथा स्वच्छ शहरों का निर्माण संभव हो सकेगा।

अपराध में कमी आई, व्यापार करना आसान हुआ —

डी-क्रिमिनलाइज़ेशन के क्षेत्र में राज्य ने ‘राजस्थान जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) अध्यादेश, 2025’ अधिसूचित किया है। 11 राज्य अधिनियमों के प्रावधानों में संशोधन कर छोटे अपराधों को अपराधमुक्त किया गया है। इस अध्यादेश के तहत आपराधिक प्रावधानों को आर्थिक दंड से प्रतिस्थापित किया गया है। इससे अपराध में कमी आई है और प्रदेश में व्यापार करना आसान हुआ है।

राजनिवेश पोर्टल पर चैटबॉट —

निवेशक सुविधा को और सुदृढ़ करने के लिए राज्य की सिंगल विंडो प्रणाली ‘राजनिवेश’ को एआई चैटबॉट के साथ सशक्त किया गया है, जो विभिन्न विभागों की सूचनाओं को एकत्रित कर निवेशकों को सहज एवं प्रभावी सहायता प्रदान करता है।

नई राजस्थान पर्यटन नीति एक दूरदर्शी दस्तावेज : भजनलाल शर्मा
जयपुर, 10 दिसम्बर। राजस्थान सरकार ने बुधवार को प्रवासी राजस्थानी दिवस के अवसर पर राज्य की महत्वाकांक्षी राजस्थान पर्यटन नीति–2025 औपचारिक रूप से जारी की। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने...

जयपुर, 10 दिसम्बर। राजस्थान सरकार ने बुधवार को प्रवासी राजस्थानी दिवस के अवसर पर राज्य की महत्वाकांक्षी राजस्थान पर्यटन नीति–2025 औपचारिक रूप से जारी की। मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने सीतापुरा स्थित जेईसीसी परिसर में आयोजित पर्यटन सत्र के दौरान इस नीति का विमोचन किया। इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी, पर्यटन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, प्रवासी राजस्थानी समुदाय तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े प्रमुख हितधारक उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि यह नीति राजस्थान के पर्यटन विकास को नई दिशा देने वाला एक दूरदर्शी दस्तावेज़ है, जो राज्य को राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर अग्रणी स्थान दिलाने में सहायक सिद्ध होगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि नई पर्यटन नीति निवेश, नवाचार, रोजगार और सामुदायिक सहभागिता को नई गति देगी। यह नीति विकसित राजस्थान 2047 के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मुख्यमंत्री ने सभी विभागों एवं हितधारकों से इस नीति को सफल बनाने के लिए सक्रिय सहयोग का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पर्यटन नीति की अनुपालना हेतु एक समर्पित नीति कार्यान्वयन इकाई स्थापित की जाएगी ताकि पर्यटन नीति में उल्लेखित सभी बिंदुओं पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। राज्य सरकार ने पर्यटन परियोजनाओं को तेजी से गति देने के लिए पीपीपी मॉडल और इज ऑफ डूइंग बिजनेस को केंद्र में रखा है। सभी अनुमतियों के लिए सिंगल वेब पोर्टल, पर्यटन व्यवसायों की ग्रेडिंग और गतिविधि निगरानी के लिए एकीकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। पर्यटन व्यवसायियों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिवर्ष राजस्थान पर्यटन पुरस्कार दिए जाएंगे। विद्यार्थियों को पर्यटन कोर्स व कौशल कार्यक्रमों के लिए स्कॉलरशिप तथा पर्यटन उद्यमों को ट्रेनिंग–स्किल इंसेंटिव उपलब्ध कराया जाएगा।

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि राजस्थान पर्यटन नीति–2025 के जरिए राज्य सरकार का लक्ष्य आगामी वर्षों में राजस्थान को विश्वस्तर पर प्रतिस्पर्धी, सुरक्षित और पर्यटक–अनुकूल राज्य के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने कहा कि राजस्थान की संस्कृति, विरासत, कला और प्राकृतिक विविधता को नए युग की पर्यटन आवश्यकताओं से जोड़कर विश्वस्तरीय अनुभव देना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। यह नीति पर्यटन विकास को नयी गति और दिशा देगी।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नई नीति राजस्थान को भारत का सबसे मजबूत, आधुनिक और आकर्षक पर्यटन राज्य बनाने का संकल्प है। सरकार चाहती है कि हर पर्यटक राजस्थान की संस्कृति, मेहमाननवाज़ी और विविधता भरे अनुभवों से समृद्ध होकर लौटे। यह नीति राज्य में पर्यटन के विस्तार, रोजगार सृजन, डिजिटल सुविधा, धार्मिक–सांस्कृतिक सर्किट, एस्ट्रो–टूरिज्म, एडवेंचर और वेलनेस टूरिज्म जैसे नए क्षेत्रों को गति देने वाला व्यापक रोडमैप साबित होगी। नई नीति के तहत राज्य सरकार ने पर्यटन ढांचे को पूर्णतया आधुनिक, सुरक्षित, निवेश–अनुकूल और तकनीकी रूप से सक्षम बनाने के लक्ष्य निर्धारित किए हैं। यह नीति सिर्फ एक नीतिगत डॉक्यूमेंट ही नहीं बल्कि यह हमारे राज्य को एक वैश्विक पर्यटन महाशक्ति में बदलने का हमारा रोडमैप है। उन्होंने कहा कि हमारा दृष्टिकोण स्पष्ट है की पर्यटन के आधारभूत ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए पर्यटन के सभी आयामों जैसे पर्यटक सुविधाओं, मार्केटिंग एवं प्रमोशन, मेले एवं त्योहार, पर्यटन निवेश, पर्यटन में आईटी, डिजिटल एवं एआई, कौशल विकास, युवाओं को पर्यटन क्षेत्र में रोजगार आदि पर लक्ष्य निर्धारित कर कार्य किया जाएगा। 

विशेष पर्यटन क्षेत्र और धार्मिक सर्किट-

चुनिंदा जिलों में स्पेशल टूरिज्म जोन (एसटीजेड) प्लग–एंड–प्ले मॉडल पर स्थापित किए जाएंगे, जहाँ आधारभूत संरचना सरकार और आतिथ्य सेवाएँ निजी क्षेत्र विकसित करेगा।

कृष्ण गमन पथ और बृज–द्वारका तीर्थ मार्ग के तहत राजस्थान के प्रमुख मंदिरों में यात्री सुविधाएँ बढ़ाई जाएँगी। वन विभाग और देवस्थान विभाग के सहयोग से धार्मिक और वन्यजीव–आधारित टूरिज्म हब भी विकसित किए जाएंगे।

डिजिटल और अनुभव आधारित पर्यटन-

सरकार ऐतिहासिक स्मारकों का थ्रीडी लेजर स्कैन, वीआऱ अनुभव, डिजिटल संग्रहालय और लाइट–एंड–साउंड शो विकसित करेगी। नई पर्यटन फ़िल्में, सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर सहयोग और डिजिटल प्रचार पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। पर्यटकों को बेहतर डिजिटल सुविधा देने के लिए नया राजस्थान पर्यटन वेब पोर्टल, मोबाइल ऐप, चैटबॉट, डिजिटल मैप व गाइडबुक लॉन्च किए जाएंगे।

जिला स्तर पर प्रबंधन-

प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला पर्यटन विकास समिति (डीटीडीसी) द्वारा पर्यटन स्थलों के संचालन और प्रबंधन के लिए डेस्टिनेशन मैनेजमेंट ऑर्गेनाइजेशन (डीएमओ)  के रूप में भी कार्य किया जाएगा। पीक सीजन में समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए ये समितियाँ नियमित बैठकें आयोजित करेंगी।

पर्यटक सुविधा और कनेक्टिविटी- 

राज्य के प्रमुख पर्यटन शहरों में हॉप ऑन–हॉप ऑफ बस सेवा, एयरपोर्ट–रेलवे–बस स्टैंड पर प्रीपेड टैक्सी बूथ, ई-सेगवे, रेंटल साइकिल और गाइडेड ई–वाहन सेवाएँ शुरू की जाएँगी। पर्यटकों को सभी परिवहन साधनों में एकीकृत सुविधा देने के लिए राजस्थान ट्रैवल कार्ड भी लाया जाएगा।

थीम आधारित पर्यटन को बढ़ावा-

एस्ट्रो टूरिज्म, फूड फेस्टिवल, एडवेंचर स्पोर्ट्स, ईको–टूरिज्म, फिल्म सिटी, मल्टी–परपज़ इवेंट स्टेडियम, बर्ड–वॉचिंग सर्किट, शौर्य पर्यटन सर्किट जैसे नए क्षेत्रों को बढ़ावा देकर राज्य में पर्यटन के अवसरों का दायरा व्यापक किया जाएगा। पुष्कर, मरु महोत्सव, झील महोत्सव जैसे आयोजनों को और अधिक भव्य स्वरूप देने की तैयारी भी नीति में शामिल है।

विरासत, शिल्प और वेलनेस टूरिज्म-

विरासत संरक्षण के लिए मैन्युस्क्रिप्ट, जनजातीय संस्कृति, वस्त्र और पारंपरिक शिल्प पर आधारित क्राफ्ट म्यूज़ियम स्थापित किए जाएंगे। योग, आयुर्वेद और नेचुरोपैथी पर आधारित वेलनेस टूरिज्म हब विकसित किए जाएंगे।

पर्यटक सुरक्षा—24×7 सहायता प्रणाली-

राज्य में 24×7 टूरिज्म कॉल सेंटर, मजबूत टूरिस्ट असिस्टेंस फोर्स, पर्यटक वाहनों में पैनिक बटन, क्यूआर आधारित फीडबैक सिस्टम, सीसीटीवी और आईईसी गतिविधियों से सुरक्षा तंत्र को मजबूत किया जाएगा।

इस अवसर पर श्री झाबर सिंह खर्रा, राज्य मंत्री (नगरीय विकास एवं स्वायत्त शासन), श्री जोराराम कुमावत, मंत्री (पशुपालन, डेयरी, गोपालन एवं देवस्थान), श्रीमती मुग्धा सिन्हा, एमडी आईटीडीसी, श्री प्रवीन गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव (पर्यटन), श्रीमती रुक्मणी रियार, पर्यटन आयुक्त तथा देश–विदेश से जुड़े अनेक पर्यटन उद्यमी, विशेषज्ञ एवं प्रवासी राजस्थानी प्रतिनिधि उपस्थित थे

अवैध खनन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
खान एवं पेट्रोलियम विभाग की समीक्षा बैठक- राजस्थान को खनन में अग्रणी बनाना हमारी प्राथमिकता

जयपुर, 09 दिसम्बर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि प्रदेश में प्रचुर मात्रा में खनिज संसाधन उपलब्ध होने से यह क्षेत्र राज्य के विकास में महती भूमिका निभाता है। साथ ही, यह क्षेत्र स्थानीय रोजगार एवं क्षेत्रीय विकास की भी अहम कड़ी है। हमारी सरकार प्रदेश को खनन क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि खनिज संसाधनों का समुचित दोहन करते हुए समयबद्ध राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति की जाए। साथ ही, प्रदेश में हो रहे अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि अवैध खनन में संलिप्त किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाए।

शर्मा मंगलवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में खान एवं पेट्रोलियम विभाग की समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य में असीम खनिज संपदा की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए नए खनिज ब्लॉक्स की पहचान की जाए। साथ ही, अत्याधुनिक नवाचार एवं एआई का उपयोग करते हुए नए खनिज ब्लॉक्स की संख्या बढ़ाई जाए। उन्होंने कहा कि खनिज संपन्न राज्यों में खान क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों एवं राजस्व वृद्धि के लिए किए जा रहे कार्यों का अध्ययन किया जाए जिससे राजस्व में वृद्धि की जा सके।

नीलामी प्रक्रिया में लाएं पूर्ण पारदर्शिता-

मुख्यमंत्री ने कहा कि खनन क्षेत्र में बड़ी संख्या में कुशल एवं अकुशल श्रमिकों को रोजगार प्राप्त हो रहा है। राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि रोजगार को बढ़ावा देते हुए प्रदेश में वैध खनन को बढ़ावा दिया जाए, अवैध खनन पर अंकुश लगे। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र में नीलामी प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता बरती जाए तथा पुलिस, परिवहन एवं खान विभाग आपसी समन्वय कर अवैध खनन की रोकथाम के लिए कार्ययोजना बनाएं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अवैध खनन निर्धारण के लिए क्षेत्र में ड्रोन सर्वे को बढ़ाया जाए। साथ ही, खनन पट्टा क्षेत्रों एवं अवैध खनन स्थलों की जियो फैन्सिग को और प्रभावी बनाया जाए।

एम-सेण्ड को दिया जा रहा प्रोत्साहन-

शर्मा ने कहा कि प्रदेश में बजरी के विकल्प के रूप में एम-सेण्ड के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए एम-सेण्ड नीति 2024 जारी की गई है। इस नीति के माध्यम से एम सैंड यूनिट लगाने वाले उद्यमियों को प्रोत्साहन दिया गया है जिससे एम-सेण्ड के लिए प्रदेश में अनेक प्लांट्स संचालित हैं। उन्होंने अधिकारियों को इन सभी प्लांट्स की प्रगति की नियमित मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को प्रदेश में खनिज संसाधनों की संभावनाओं को जानने के लिए भी प्रभावी कार्ययोजना बनाए जाने के भी निर्देश दिए। 

बैठक में बताया गया कि खान विभाग द्वारा एम-सेण्ड पॉलिसी, मिनरल डवलपमेंट, एनवायरनमेंट प्रोटेक्शन और अवैध माइनिंग मॉनिटरिंग कमेटी का गठन, ई-रवन्ना, ई-टीपी के गलत इस्तेमाल के लिए टीम का गठन तथा अवैध खनन संवेदनशील क्षेत्रों में बॉर्डर होम गार्ड की तैनाती जैसे कार्य किए गए हैं। साथ ही, प्रदेश में खनन से रॉयल्टी वृद्धि हेतु खनिज परिवहन के लिए जीपीएस एवं आरएफआईडी युक्त वाहनों की बाध्यता की जा रही है। समस्त विभागीय एमपैनल्ड वे-ब्रिज पर स्टेण्डर्ड सॉफ्टवेयर का उपयोग, तुलायंत्रो पर सैंसर्स, ए.आई. कैमरा सहित विभिन्न नवाचार किए गए हैं।

इससे पहले प्रमुख शासन सचिव खान टी. रविकांत ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से खान एवं पेट्रोलियम विभाग के नवाचारों, कार्यक्रमों तथा योजनाओं के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर पुलिस महानिदेशक श्री राजीव कुमार शर्मा सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित रहे।

सीडीटीआई जयपुर में ‘सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट’ प्रशिक्षण शुरू
एसीएस गृह और डीजीपी की उपस्थिति में कार्यक्रम का शुभारंभ; एनएफएसयू-बीपीआरडी-एफएसएल का संयुक्त प्रयास

जयपुर, 8 दिसंबर। राजस्थान पुलिस के चयनित कांस्टेबलों के लिए वैज्ञानिक जांच कौशल को मजबूत करने के उद्देश्य से सेंट्रल डिटेक्टिव ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट (सीडीटीआई) जयपुर में सोमवार को ‘सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ हुआ।

यह महत्वपूर्ण प्रशिक्षण नेशनल फोरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (एनएफएसयू) गांधीनगर, ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट (बीपीआरडी) के सीडीटीआई और राजस्थान एफएसएल के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है। इसका मुख्य लक्ष्य अपराध स्थल प्रबंधन, फोरेंसिक साक्ष्य संग्रह और वैज्ञानिक जांच कौशल को मजबूत बनाना है।

कार्यक्रम का शुभारंभ सीडीटीआई के निदेशक डॉ. अमनदीप सिंह कपूर के स्वागत एवं पाठ्यक्रम परिचय के साथ हुआ। उन्होंने स्पष्ट किया कि अपराध स्थल का सही संरक्षण और साक्ष्यों का वैज्ञानिक संग्रह सफल जांच की रीढ़ है।

कार्यक्रम में उपस्थित विशिष्ट अतिथियों के प्रमुख विचार—

मुख्य अतिथि अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह श्री भास्कर सावंत ने कहा कि अपराध जांच में वैज्ञानिक प्रक्रियाओं का उपयोग अब अनिवार्य हो चुका है। उन्होंने एक माह के इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को प्रदेश में अपराध जांच की गुणवत्ता सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम बताया और प्रतिभागियों को इस अवसर का पूरा लाभ उठाने की प्रेरणा दी।

महानिदेशक पुलिस राजीव कुमार शर्मा ने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थान पुलिस अपराध जांच को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की दिशा में लगातार प्रगति कर रही है और यह प्रशिक्षण पुलिस बल की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि करेगा।

उपमहानिरीक्षक पुलिस सीआईडी अपराध शाखा दीपक भार्गव ने कहा कि अपराध स्थल पर पहली प्रतिक्रिया पुलिसकर्मियों की पेशेवर दक्षता तय करती है, और यह प्रशिक्षण जांच प्रक्रिया को अधिक वैज्ञानिक एवं प्रभावी बनाएगा।

फोरेंसिक शिक्षा और तकनीक पर फोकस—

फोरेंसिक विशेषज्ञता वाले अतिथियों ने प्रतिभागियों को वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। निदेशक एसएसएल डॉ. अजय शर्मा ने कहा कि प्रशिक्षित ‘सीन ऑफ क्राइम मैनेजमेंट’ अधिकारियों से साक्ष्यों की गुणवत्ता बेहतर होगी, जिससे मामलों की त्वरित और सटीक जांच संभव हो सकेगी।

कैंपस डायरेक्टर एनएफएसयू जयपुर डॉ. एस. ओ. जुनारे ने फोरेंसिक शिक्षा और पुलिस प्रशिक्षण के मजबूत समन्वय को अपराध जांच के भविष्य को बदलने वाला बताया।

प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं—

सीडीटीआई डायरेक्टर श्री कपूर ने बताया कि एक माह के इस विशेष कार्यक्रम में प्रशिक्षुओं को वैज्ञानिक जांच तकनीकों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिनमे अपराध स्थल संरक्षण एवं दस्तावेज़ीकरण, फोटोग्राफी, फिंगरप्रिंट एवं डीएनए साक्ष्य संग्रह और डिजिटल फोरेंसिक शामिल है।

यह कोर्स बीपीआरडी और एनएफएसयू के संयुक्त प्रमाणन के साथ-साथ नवीन आपराधिक कानूनों के प्रावधानों के क्रियान्वयन में एक मील का पत्थर साबित होगा, जो राजस्थान को वैज्ञानिक पुलिसिंग की अग्रणी पंक्ति में प्रवेश कराएगा।

25 लाख के सीएसआर फण्ड से बनी आधुनिक गौशाला का जयपुर प्रभारी मंत्री ने किया लोकार्पण
4500 स्क्वायर फीट क्षेत्र में हुआ है आधुनिक गौशाला का निर्माण

जयपुर 8 दिसम्बर। श्री गलता तीर्थ मे 25 लाख की लागत से सीएसआर फण्ड् से बनी आधुनिक गौशाला का सोमवार को संसदीय कार्य विधि एवं न्याय मंत्री व जिले के प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल ने फीता काटकर लोकार्पण किया।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि धरती मां, गौमाता व स्वयं की मां की सेवा करना सर्वोत्तम कार्य है। श्री गलता तीर्थ मे आधुनिक गौशाला के निर्माण से श्रद्धालुओं को गौमाता की सेवा करने का पुण्य मिलेगा। उन्होने कहा कि माननीय उच्च न्यायलय के निर्णय द्वारा जबसे जिला कलेक्टर जयपुर को श्री गलता तीर्थ का प्रशासक नियुक्त किया है तबसे तीर्थ स्थल अपने पौराणिक वैभव को प्राप्त करने के लिए निरन्तर अग्रसर हो रहा है। जिला प्रशासन इसे निरन्तर बेहतर बनाकर देशी-विदेशी सैलानियो के लिए आकर्षण का केन्द्र बनाया जा रहा है।

जिला कलेक्टर व श्री गलता तीर्थ प्रशासक डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने कहा कि माननीय उच्च न्यायलय के निर्देशानुसार व राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की मंशानुरूप श्री गलता तीर्थ को स्वच्छ हरा-भरा व आकर्षक बनाने के लिए निरन्तर कार्य किए जा रहे है। जिसमें पुरानी जीर्ण-शीर्ण गौशाला के स्थान पर आधुनिक स्वच्छ व बेहतर गौशाला का निर्माण इस दिशा में किया गया महत्वपूर्ण कार्य है।

अतिरिक्त जिला कलेक्टर चतुर्थ आशीष कुमार ने बताया कि श्री गलता तीर्थ की जीर्ण-शीर्ण गौशाला के स्थान पर आधुनिक व सुविधाजनक गौशाला का निर्माण फीनोवा कैपीटल के 25 लाख के सीएसआर फण्ड से 4500 स्क्वायर फीट क्षेत्र में चार महिने में किया गया है। यहां पर 80 से 100 गाएं रखने की क्षमता है। यह गौशाला गौमाताओं के लिए न सिर्फ सुरक्षित आश्रय स्थल है बल्कि यहां चारे व देखभाल की भी उत्तम व्यवस्था है। 

इस दौरान नागरिकता अधिनियम, 1955 की धारा 5 (1)(ग) के उपबंघों के अंतर्गत उमरकोट पाकिस्तान से आए प्रकाश अमर चन्द पुत्र हाकिम चन्द को भारत की नागरिकता का प्रमाण पत्र प्रभारी मंत्री द्वारा प्रदान किया गया।

इस अवसर पर प्रभारी मंत्री ने समाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के सौजन्य से विशेष योग्यजनों को 5 श्रवण यंत्र, 2 स्मार्ट फोन, 4 व्हील चेयर और 2 बेसाखी भी प्रदान की।

इस दौरान अतिरिक्त जिला कलेक्टर प्रथम विनीता सिंह, अतिरिक्त जिला कलेक्टर जयपुर (दक्षिण) श्री युगान्तर शर्मा, देवस्थान विभाग के सहायक आयुक्त प्रथम श्री रतन लाल योगी, नगर निगम जयपुर के अतिरिक्त आयुक्त श्री प्रवीण गुगरवाल, विशिष्ट अतिथि फिनोवा कैपिटल के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मोहित साहनी सहित अन्य विभागीय अधिकारी व गौसेवक उपस्थित थे।

ओवरलोडेड वाहनों और अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई हो तेज : मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा
राज्य के सर्वांगीण विकास में राजस्व की भूमिका अहम, वृद्धि हेतु बनाएं लक्ष्य आधारित कार्ययोजना


जयपुर, 8 दिसम्बर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश के चहुंमुखी विकास और सभी वर्गों के कल्याण के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है। इस दिशा में विभिन्न विकास परियोजनाएं और जनकल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि विकास योजनाओं को मूर्त रूप देने और जनकल्याणकारी योजनाओं के निर्बाध संचालन में राजस्व अत्यधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वित्तीय वर्ष 2025-26 के राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति के लिए संबंधित विभागों के अधिकारी समर्पित होकर कार्य करें।

शर्मा सोमवार को मुख्यमंत्री कार्यालय में आबकारी, परिवहन, काॅमर्शियल टैक्स तथा पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग की समीक्षा बैठक ले रहे थे। बैठक में बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1 लाख 69 हजार 627 करोड़ रुपये के राजस्व अर्जन का लक्ष्य रखा गया था। इसे हासिल करने के क्रम में नवम्बर माह तक कुल 84 हजार 746 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हो चुका है। मुख्यमंत्री ने संबंधित अधिकारियों को आगामी तिमाही में राजस्व वृद्धि के लिए लक्ष्य आधारित कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए। 

जीएसटी की दरों में कमी का लाभ उपभोक्ता को मिलना हो सुनिश्चित —

शर्मा ने काॅमर्शियल टैक्स विभाग की समीक्षा के दौरान कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा किए गए जीएसटी सुधारों से देश और प्रदेश के आमजन को काफी राहत मिली है। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि जीएसटी की दरों में की गई कमी का सीधा लाभ उपभोक्ता तक पहुंचे। मुख्यमंत्री ने फर्जी करदाताओं के खिलाफ विशेष अभियान चलाने के निर्देश देते हुए कहा कि कर चोरी रोकने और पारदर्शी कर व्यवस्था लागू करने के लिए सख्त निगरानी तंत्र विकसित किया जाए।

सार्वजनिक परिवहन हेतु नई बसों के हो परमिट जारी —

मुख्यमंत्री ने परिवहन विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि सार्वजनिक परिवहन हेतु नई बसों के अधिक से अधिक परमिट जारी किए जाएं जिससे आमजन को आवागमन में सुविधा होने के साथ ही, राज्य सरकार को भी राजस्व की प्राप्ति हो। श्री शर्मा ने ओवरलोडिंग के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश देते हुए कहा कि ओवरलोडेड वाहन सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है। साथ ही, इनसे राज्य सरकार को राजस्व की भी हानि होती है। विभागीय अधिकारी इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई करें। 

अवैध शराब के खिलाफ हो प्रभावी कार्रवाई —

मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्थान में अन्य राज्यों से अवैध शराब के परिवहन को रोकने के लिए आबकारी विभाग पुलिस के साथ समन्वय बनाते हुए सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी कड़ी करें। उन्होंने राज्य में अवैध शराब की बिक्री पर भी प्रभावी अंकुश लगाने के निर्देश दिए। श्री शर्मा ने पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग को संपत्तियों के पंजीयन की प्रक्रिया सरल करने और आमजन को अधिक से अधिक राहत पहुंचाने के भी निर्देश दिए।

बैठक में मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

राजस्थान, प्रवासी राजस्थानियों और उद्योगपतियों में उत्साह, 8700 से अधिक ने कराया पंजीकरण
मुख्य सचिव और एसीएस उद्योग ने कार्यक्रम स्थल पहुंचकर लिया तैयारियों का जायजा, कार्यक्रम की तैयारियां अंतिम चरण में, जयपुर में सजावट का काम जारी

जयपुर, 6 दिसंबर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की पहल पर आयोजित किए जा रहे ‘प्रवासी राजस्थानी दिवस’ कार्यक्रम की तैयारियां अब अंतिम चरण में हैं।  10 दिसंबर को होने वाले इस कार्यक्रम के लिए राजधानी जयपुर में ग्रीनरी, सजावट और साफ-सफाई के कार्य किए जा रहे हैं। राजस्थान मेहमानों के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार है, वहीं देश-विदेश से आने वाले प्रवासी राजस्थानियों और उद्योगपतियों में भारी उत्साह है। अब तक करीब 8,700 से अधिक लोगों ने अपना पंजीकरण कराया है।

मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव (एसीएस) शिखर अग्रवाल ने कार्यक्रम स्थल (जेईसीसी, सीतापुरा) पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया। इस दौरान उन्होंने मुख्य समारोह, सेक्टोरल सेशन के लिए निर्धारित हॉल के साथ ही राज्य सरकार की उपलब्धियों को दर्शाने के लिए बनाए जा रहे प्रगति पथ का भी निरीक्षण किया। मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्यों को अगले 48 घंटे में पूरा कर लिया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा के अनुसार इस ऐतिहासिक आयोजन की तैयारियां की जा रही हैं। मुख्यमंत्री लगातार तैयारियों की समीक्षा कर रहे हैं, साथ ही, प्रवासी राजस्थानियों से वार्ता कर उन्हें आमंत्रित भी कर रहे हैं।

एसीएस श्री शिखर अग्रवाल ने कहा कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य प्रवासी राजस्थानियों को अपनी जड़ों से जोड़ते हुए प्रदेश के विकास में उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है। साथ ही, इस प्रक्रिया में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए एक नई नीति भी बनाई गई है। 

उद्योग एवं निवेश संवर्धन ब्यूरो के आयुक्त श्री सुरेश कुमार ओला ने बताया कि मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार आयोजन स्थल पर राजस्थान की संस्कृति और विरासत को प्रदर्शित किया गया है, ताकि प्रवासी राजस्थानी अपनापन महसूस करें और यहां से अच्छी यादें लेकर लौटें।

इस दौरान जेडीए आयुक्त श्रीमती आनन्दी, रीको एमडी श्रीमती शिवांगी स्वर्णकार, राजस्थान फाउंडेशन की आयुक्त डॉ. मनीषा अरोड़ा, नगर निगम आयुक्त डॉ. गौरव सैनी, बीआईपी के अतिरिक्त आयुक्त श्री जुगल किशोर मीणा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

पर्यटन क्षेत्रों के भ्रमण के लिए नोडल अधिकारी नियुक्त—

इस कार्यक्रम में आने वाले मेहमानों की शहर के पर्यटन क्षेत्रों के भ्रमण की संभावना को देखते हुए भी व्यापक व्यवस्था की गई है। संरक्षित स्मारकों पर आने वाले पर्यटकों के लिए पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग ने नोडल अधिकारी नियुक्त किए हैं। इसके साथ ही, वन एवं वन्यजीव पर्यटन क्षेत्रों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए वन विभाग द्वारा भी नोडल अधिकारी नियुक्त किए गए हैं।

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद पहला प्रवासी राजस्थानी दिवस—

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने पिछले साल राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट की प्रवासी राजस्थानी कॉन्क्लेव में 10 दिसंबर को हर वर्ष प्रवासी राजस्थानी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। इस कड़ी में पहला प्रवासी दिवस आगामी 10 दिसंबर को आयोजित किया जा रहा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य राजस्थानी डायस्पोरा को साथ लाना और प्रवासियों को अपनी जड़ों से जोड़ना है।

मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने ‘फिट राजस्थान फिट इंडिया’ का दिया संदेश
मॉर्निंग वॉक पर मुख्यमंत्री, जवाहर सर्किल पार्क में वॉक के साथ आमजन से की मुलाकात

जयपुर, 06 दिसंबर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने शनिवार सुबह जयपुर के जवाहर सर्किल पार्क में मॉर्निंग वॉक किया। उन्होंने ‘फिट राजस्थान-फिट इंडिया’ के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए सभी को स्वस्थ एवं सक्रिय जीवनशैली अपनाने का संदेश दिया। 

इस दौरान पार्क में मौजूद लोगों ने भी कदमताल मिलाते हुए मुख्यमंत्री के साथ मॉर्निंग वॉक की। श्री शर्मा ने आत्मीयता के साथ आमजन से मुलाकात की और सेहत, दिनचर्या तथा जीवनशैली से जुड़े विषयों पर बातचीत की। 

मुख्यमंत्री ने जवाहर सर्किल पार्क स्थित मंदिर में दर्शन कर प्रदेश की खुशहाली, समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की। इसके बाद उन्होंने जूस पीते हुए आमजन के साथ चर्चा भी की।

इस दौरान मुख्यमंत्री ने बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर के महापरिनिर्वाण दिवस पर हैप्पीनेस एवं फिटनेस गु्रप की ओर से आयोजित कार्यक्रम में डॉ. अम्बेडकर के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर नमन किया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने समता और न्याय का जो मार्ग दिखाया है, वह सदैव देश और समाज को प्रगति और सद्भाव की ओर अग्रसर करता रहेगा।

प्रदेश के 38 जिलों में 310 नए पशु चिकित्सालय भवनों का होगा निर्माण
पशुपालन मंत्री जोराराम कुमावत के प्रयासों से 144 करोड़ 15 लाख रुपए मंजूर

जयपुर, 28 नवंबर। राजस्थान को विकास के नए आयाम देने के लिए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सार्थक पहल एवं पशुपालन, गोपालन, डेयरी एवं देवस्थान मंत्री श्री जोराराम कुमावत के निर्देशन में प्रदेश की पशु चिकित्सालयों में आधारभूत संरचनाओं के साथ राज्य की पशु चिकित्सा व्यवस्था के समग्र रूप से सुदृढीकरण के लिए निरंतर रूप से प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इसी कड़़ी में राजस्थान सरकार ने राज्य के 310 पशु चिकित्सालयों के नए भवनों के निर्माण के लिए 144 करोड़ 15 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की है। इन निर्माण कार्यों को प्रारम्भ करने के आदेश जारी करते हुए प्रति पशु चिकित्सालय 46.50 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। इसके तहत अजमेर, अलवर, बालोतरा, बांसवाड़ा, बारां, बाड़मेर, ब्यावर, भरतपुर, भीलवाड़ा, बीकानेर, बूंदी, चितौड़गढ़, चूरू, दौसा, डीग-भरतपुर, डूंगरपुर, जयपुर, जैसलमेर, जालौर, झालावाड़, झुंझुंनू, जोधपुर, करौली, खैरथल-तिजारा, कोटा, कोटपूतली-बहरोड़, कुचामन सिटी, नागौर, पाली, फलौदी, प्रतापगढ़, राजसमंद, सलूंबर, सवाईमाधोपुर, सीकर, सिरौही, श्रीगंगानगर, टोंक व उदयपुर जिले में नए पशु चिकित्सा भवन निर्माण के लिए

 कुल 14415 लाख रुपए की स्वीकृति जारी की गई है। 

पशुपालन मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने बताया कि ग्रामीण विकास निधि के तहत 31 मार्च-2029 तक इन भवनों के निर्माण कार्य को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि जयपुर के 26, भीलवाड़ा, पाली और नागौर के 18-18, झुंझुनू के 17, जोधपुर के 16, चित्तौड़ के 14, कोटपूतली- बहरोड़, बीकानेर, सीकर के 11-11 अलवर, बांसवाड़ा, चुरु के 10-10, टोंक, उदयपुर के 09-09, अजमेर, दौसा, जालौर, बालोतरा के 07-07, बाड़मेर, डीग, कोटा, खैरथल- तिजारा, कुचामन के 06-06, डूंगरपुर के 05, प्रतापगढ़, सवाईमाधोपुर के 04-04, बारां, भरतपुर, बूंदी, जैसलमेर, झालावाड़, फलौदी, सिरोही के 03-03 और ब्यावर, करौली, राजसमंद सलूम्बर तथा श्रीगंगानगर के 02-02 स्थानों पर पशु चिकित्सालय भवन निर्मित करने के लिए प्रत्येक जिले को प्रति चिकित्सालय 46.50 लाख रुपये की राशि मंजूर की गई है।