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अरब सागर से सीधे जुड़ेगा राजस्थान, जालोर में बनेगा इनलैंड पोर्ट 
राजस्थान बनेगा इंडस्ट्रियल पावर कॉरिडोर - 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि से होगी ड्रेजिंग - लगभग 262 किलोमीटर लम्बाई में बनेगा जलमार्ग - 50 हजार से अधिक रोजगार...

जयपुर, 18 नवम्बर। मरु प्रदेश राजस्थान अब समुद्री रास्ते से भी औद्योगिक विकास, व्यापार और आर्थिक समृद्धि का सफर तय करेगा। इसमें जालोर जिला कच्छ की खाड़ी के जरिए अरब सागर से सीधे जुड़ेगा। इसके लिए जालोर में इनलैंड पोर्ट (वाटर-वे) तैयार करने की कवायद  शुरू हो गई है। 

केंद्र और राज्य सरकार के मध्य बेहतर समन्वय से प्रदेश की अर्थव्यवस्था में यह निर्माण एक ऐतिहासिक परिवर्तनकारी साबित हो सकेगा। यहां से उद्योग, लॉजिस्टिक्स, रोजगार और जलमार्ग कनेक्टिविटी के नए युग की शुरुआत होगी। राजस्थान समुद्री राज्यों में शामिल होते हुए लॉजिस्टिक पावरहाउस बनने की दिशा में आगे बढ़ेगा। 

इनलैंड पोर्ट निर्माण को लेकर गत माह मुम्बई में राजस्थान रिवर बेसिन एवं जल संसाधन आयोजना प्राधिकरण और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, केन्द्र सरकार के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू हस्ताक्षर किया गया। इसके तहत गुजरात और राजस्थान में ड्रेजिंग से अरब सागर से जालोर को जोड़ा जाएगा। इसके जरिए राजस्थान समुद्री कनेक्टिविटी के नए युग में प्रवेश करेगा। जवाई-लूनी-रन ऑफ कच्छ नदी प्रणाली को राष्ट्रीय जलमार्ग-48 घोषित होने के बाद जालोर में इनलैंड पोर्ट (वाटर-वे) विकसित करने की दिशा में यह सबसे बड़ा कदम है। 

कांडला पोर्ट से होगी कनेक्टिविटी—

इस महत्वाकांक्षी परियोजना में राजस्थान प्रत्यक्ष रूप से कांडला पोर्ट (कच्छ) से जुड़ जाएगा। अभी जालोर तक जलमार्ग बनाने के लिए रास्तों पर अध्ययन किया जा रहा है। इसमें भवातरा-नवलखी मार्ग कांडला क्रिक (लगभग 262 कि.मी.) मार्ग भी शामिल है। एमओयू के अनुसार, ड्रेजिंग में 10 हजार करोड़ रुपए से अधिक राशि व्यय होगी। 

आईआईटी मद्रास कर रहा है सर्वे- 

जल संसाधन मंत्री श्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि जलमार्ग की डीपीआर पर भारतीय अन्तर्देशीय जलमार्ग विकास प्राधिकरण, नेशनल टेक्नोलॉजी फॉर पोर्ट, वाटर-वे एंड कोस्ट, आईआईटी मद्रास और जल संसाधन विभाग द्वारा सर्वे किया जा रहा है। इसमें वर्षभर जल की उपलब्धता, परियोजना के लिए जमीन और अनुमानित लागत पर गहन अध्ययन हो रहा है। फील्ड स्टडी के लिए आईआईटी मद्रास से विशेषज्ञ जल्द ही राजस्थान आएंगे। वहीं, जल संसाधन विभाग राजस्थान, भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और आईआईटी मद्रास के बीच नियमित संवाद के जरिए परियोजना की प्रक्रिया को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है।

जालोर बनेगा लॉजिस्टिक हब, स्थापित होंगे नए आयाम—

श्री रावत ने बताया कि लूनी-जवाई बेसिन और जालोर-बाड़मेर क्षेत्र में कपड़ा, पत्थर, कृषि उत्पाद, ऑयलशीड, ग्वार, दालें व बाजरा जैसी बड़ी ट्रेडिंग गतिविधियां होती हैं। साथ ही, रिफाइनरी परियोजना भी नजदीक ही है। समुद्री कनेक्टिविटी मिलने से उद्योगों का विस्तार तेजी से बढ़ेगा। कार्गो का बड़ा हिस्सा जलमार्ग से होने से सड़क और रेल पर भार कम होगा। श्री रावत ने बताया कि माल ढुलाई क्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। भारी एवं बड़े आकार के माल की आवाजाही सरल होगी, जिससे नई इंडस्ट्री स्थापित होने के रास्ते खुलेंगे। साथ ही, वेयर हाउसिंग, पोर्ट सेवाएं, कोल्ड स्टोरेज और इंडस्ट्रियल क्लस्टर विकसित होंगे। 

वाटर एंड पावर कंसल्टेंसी सर्विसेज की एक प्री फिजीबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान एवं गुजरात सहित आसपास के क्षेत्रों में 50 हजार से अधिक रोजगार के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे। इनलैंड पोर्ट से अब निवेशकों की नजरें भी प्रदेश की ओर से हैं। 

मुम्बई में 28 अक्टूबर को इंडिया मैरीटाइम वीक, 2025 आयोजित हुआ। इसमें राजस्थान रिवर बेसिन एवं जल संसाधन आयोजना प्राधिकरण के मुख्य अभियंता श्री राजपाल सिंह और भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण, वित्त (सदस्य) के श्री के.के. नाथ के मध्य एमओयू हस्ताक्षर हुए। 

“मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा की दूरदर्शी और मजबूत औद्योगिक विकास की सोच से परियोजना सरकार की प्राथमिकता में रही है। श्री शर्मा द्वारा केन्द्र सरकार स्तर पर उच्चस्तरीय बैठकें कर आगे बढ़ाया गया। औद्योगिक विकास की दृष्टि से यह परियोजना संकल्प से सिद्धि की ओर बढ़ता कदम है। जल संसाधन विभाग की प्राथमिकता सूची में परियोजना हमेशा शीर्ष पर है। नियमित निगरानी के लिए भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण और केंद्र सरकार से निरंतर संवाद कर समन्वय स्थापित किए जा रहे हैं। राज्य सरकार के इन्हीं प्रयासों का परिणाम है कि राजस्थान भी समुद्री राज्यों में शामिल हो सकेगा।” – श्री सुरेश सिंह रावत, जल संसाधन मंत्री 

घूमर फेस्टिवल–2025 – बुधवार को सातों संभागों में भव्य आयोजन
उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने विद्याधर नगर स्टेडियम फुटबॉल ग्राउण्ड में बुधवार शाम आयोजित होने वाले घूमर महोत्सव की तैयारियों का किया निरीक्षण

जयपुर, 18 नवम्बर। उपमुख्यमंत्री पर्यटन और कला एवं संस्कृति मंत्री दिया कुमारी ने जयपुर के  विद्याधर नगर स्टेडियम फुटबॉल ग्राउण्ड में बुधवार शाम 4.30 बजे आयोजित होने जा रहे  राज्य स्तरीय घूमर समारोह की तैयारियों का मंगलवार को निरीक्षण किया।

दिया कुमारी ने बताया कि राजस्थान की लोक- संस्कृति, पारंपरिक कलाओं और जनभागीदारी आधारित सांस्कृतिक मॉडल को नई दिशा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा घूमर फेस्टिवल–2025 का बुधवार को प्रदेश के सातों संभागीय मुख्यालयों पर एक साथ भव्य आयोजन किया जाएगा।

उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी मंगलवार शाम को जयपुर  विद्याधर नगर स्टेडियम के फुटबॉल ग्राउण्ड पर पहुंची और वहां उन्होंने राज्य स्तरीय कार्यक्रम की तैयारियों का गहन अवलोकन किया। 

दिया कुमारी ने मंच व्यवस्था, प्रवेश मार्ग, सुरक्षा प्रबंधन, रिहर्सल, तकनीकी समन्वय और दर्शक सुविधा सहित सभी आवश्यक पहलुओं की विस्तृत समीक्षा की। 

उपमुख्यमंत्री ने सम्बंधित अधिकारियों और टीम को निर्देश दिए  कि पूरे कार्यक्रम को सुगठित, समयबद्ध और राजस्थान की सांस्कृतिक गरिमा के अनुरूप संपादित किया जाए।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि “घूमर नृत्य राजस्थान की आत्मा है। यह उत्सव हमारी लोक-संस्कृति को नई ऊर्जा देगा और भविष्य में पर्यटन से जुड़ी व्यापक संभावनाओं को भी सशक्त करेगा। ”

दिया कुमारी ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता है कि सांस्कृतिक परंपराओं को जनभागीदारी और नवाचारों के साथ जोड़कर एक स्थायी मॉडल तैयार किया जाए।

पर्यटन आयुक्त रुक्मणि रियाड़ ने बताया कि पर्यटन विभाग ने कार्यक्रम की सभी तैयारियाँ पूरी कर ली हैं। घूमर महोत्सव के लिए प्रतिभागियों के साथ स्थानीय समुदाय में भी उत्साह का माहौल है।

पर्यटन आयुक्त ने बताया कि इस वर्ष कार्यक्रम का दायरा उल्लेखनीय रूप से बढ़ाया गया है। जयपुर, जोधपुर, अजमेर, उदयपुर, बीकानेर, कोटा और भरतपुर सातों संभागों में बुधवार शाम एक ही समय पर महोत्सव का शुभारंभ होगा। विभाग के अनुसार कई क्षेत्रों में पंजीकरण संख्या अपेक्षा से काफी अधिक रही है, जिससे प्रतिभागियों का उत्साह स्पष्ट झलकता है।

जयपुर और जोधपुर में 1500 से अधिक पंजीकरण प्राप्त होने पर इन दोनों शहरों को उच्च श्रेणी पुरस्कार श्रेणी में शामिल किया गया है।

—इन दोनों संभागों में—बेस्ट ग्रुप डांस, बेस्ट कॉस्ट्यूम, बेस्ट ज्वेलरी, बेस्ट सिंक्रोनाइजिंग और बेस्ट कोरियोग्राफी—श्रेणियों में कुल ₹2,34,000 के पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

—अन्य पाँच संभागों के लिए कुल ₹1,04,000 की पुरस्कार राशि निर्धारित की गई है।

सातों संभागों में आयोजन स्थल इस प्रकार हैं—

•जयपुर – फुटबॉल ग्राउंड, विद्याधर नगर स्टेडियम 

•अजमेर – खेल स्टेडियम, सम्राट पृथ्वीराज राजकीय महाविद्यालय

•भरतपुर – विश्वप्रिय शास्त्री पार्क

•बीकानेर – डॉ. करणी सिंह स्टेडियम

•जोधपुर – राजकीय उम्मेद स्टेडियम

•कोटा – शौर्य घाट, चम्बल नदी तट

•उदयपुर – भंडारी दर्शक मंडप

बाड़मेर जिला कलक्टर टीना डाबी को जल संचय जन भागीदारी में प्रथम पुरस्कार
विज्ञान भवन में आयोजित कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बाड़मेर जिला कलक्टर टीना डाबी को जल संचय जन भागीदारी में प्रथम पुरस्कार से किया सम्मानित

जयपुर,18 नवंबर। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने  जल संचय—जन भागीदारी में बाड़मेर के प्रथम स्थान पर रहने पर जिला कलेक्टर टीना डाबी को पुरस्कृत किया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने नई दिल्ली के विज्ञान भवन में मंगलवार को आयोजित कार्यक्रम में छठे राष्ट्रीय जल पुरस्कार व जल संचय—जन भागीदारी पुरस्कार में उन्हें यह सम्मान प्रदान किया।

   कार्यक्रम में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि सभ्यता और जल में सीधा सम्बंध है। दु​नियाभर की सभ्यताएं नदियों, बांधों के किनारे वि​कसित हुई। जल का महत्व इससे आंका जा सकता है कि वंदे मातरम का पहला शब्द सुजलाम है। सरकार के साथ ही व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक प्रयास और समन्वय से ही जल संरक्षण की योजनाओं को सफल बनाया जा सकता है। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने केंद्र और राज्य सरकारों, जिला प्रशासनों, ग्राम पंचायतों और नगर निकायों के स्तर पर जल संरक्षण और उसके सुसंगत प्रबंधन को प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने किसानों और उद्यमियों को जल का उपभोग कम करते हुए उत्पादन को अधिकतम करने के नवोन्मेषी तरीके अपनाने की सलाह दी।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के महत्वपूर्ण अभियान ”कैच द रेन” को बाड़मेर जिले में अपार सफलता मिली है। इसे जन आन्दोलन बनाकर धरातल पर लागू करने के लिए जिला कलेक्टर टीना डाबी ने मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के निर्देशन में अभूतपूर्व प्रयास किए हैं। इस नवावार को केन्द्र सरकार ने  जल संचय जन भागीदारी अभियान में प्रथम  पुरस्कार के लिए चुना। टांका निर्माण के जरिए बारिश के पानी को सहेजने की अभिनव पहल के तहत प्रथम श्रेणी में चयनित बाड़मेर जिले को 2 करोड़ रुपए के पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।

 बाड़मेर जिला कलक्टर टीना डाबी ने इस सफलता का श्रेय बाड़मेर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों एवं कार्मिकों की टीम को देते हुए बताया कि टीम वर्क के चलते यह कामयाबी मिल पाई। आगामी समय में बेहतरीन कार्य करने का प्रयास किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि बाड़मेर जिले में बारिश के पानी को सहेजने के लिए वृहद स्तर पर टांकों का निर्माण कराया गया है। इसकी बदौलत अब तक व्यर्थ में बहने वाला बारिश के पानी को ग्रामीण पेयजल के बतौर इस्तेमाल कर रहे है। इस अभियान के तहत जल संरक्षण के लिए जल संरचनाओं में भवनों की छतों पर वर्षा जल संचयन के साथ झीलों, तालाबों और बावड़ियों का पुनरुद्धार किया जाता  है। प्रथम जल संचय जन भागीदारी (जेएसजेबी) सम्मान के अंतर्गत इस वर्ष कुल 100 पुरस्कारों की घोषणा की गई। इनमें तीन शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य, 67 जिले, छह नगर निगम एक शहरी स्थानीय निकाय, दो सहयोगी मंत्रालय, विभाग, दो उद्योग, तीन गैर सरकारी संगठन, दो परोपकारी और 14 नोडल अधिकारी शामिल हैं।

भ्रामक प्रचार रोकने के लिए मीडिया फैक्ट चेक और तकनीक का प्रयोग करें – डीजीपी राजीव शर्मा
फेक न्यूज़ व डीप फेक पर लगाम : आईएसबी और राजस्थान पुलिस की विशेष कार्यशाला

जयपुर, 18 नवंबर। इंटरनेट पर तेज़ी से बढ़ रहे डीप फेक और फ़ेक न्यूज़ की चुनौती से निपटने के लिए इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस (आईएसबी) हैदराबाद और राजस्थान पुलिस के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को राजस्थान पुलिस अकादमी के नालंदा सभागार में मीडियाकर्मियों के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यशाला का आयोजन किया। इस कार्यशाला का उद्देश्य मीडिया और पुलिस को एआई टूल्स की मदद से ऑनलाइन प्रसारित भ्रामक सामग्री को पहचानने और रोकने के तरीकों से अवगत कराना था।

डीजीपी ने फेक न्यूज़ को इनफॉर्मेशन वॉर का टूल बताया—

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए महानिदेशक पुलिस श्री राजीव शर्मा ने कहा कि आज के दौर में पुरानी घटनाओं को नई के रूप में प्रस्तुत कर चंद सेकंडों में लाखों लोगों तक पहुँचाया जाता है। उन्होंने इनफॉर्मेशन वॉर के टूल के रूप में फ़ेक न्यूज़ के कारण क़ानून और व्यवस्था बिगड़ने, मानसिक प्रताड़ना और फ़ाइनेंशियल फ्रॉड जैसी घटनाओं पर चिंता व्यक्त की।

डीजीपी श्री शर्मा ने बताया कि देश में 9 मिलियन से अधिक इंटरनेट यूज़र हैं, जिनमें से 34 प्रतिशत सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं और अक्सर झूठी ख़बरों पर निर्भर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि 18 से 24 वर्ष के युवाओं को इस संबंध में जनजागरूकता की सबसे अधिक ज़रूरत है।

मीडिया से अपेक्षा और सुझाव—

डीजीपी ने मीडिया से ब्रेकिंग न्यूज़ देने की जल्दबाज़ी में फैक्ट चेक (तथ्य जाँच) करने की अपील की, क्योंकि एक ग़लत न्यूज से बड़ा नुक़सान हो सकता है।

उन्होंने मीडिया को भी तकनीक का इस्तेमाल करने और किसी भी स्तर पर शंका होने पर पुलिस के साथ मिलकर प्रयास करने का आह्वान किया। उनका ज़ोर था कि मीडिया और पुलिस अलर्ट रहे और भ्रामक प्रचार को रोकने के लिए मिलकर प्रयास करे ताकि सच्चाई ही आम जन तक पहुंचे और आईटी का इस्तेमाल अच्छे कामों में हो सके।

इस कार्यशाला का आयोजन राजस्थान पुलिस अकादमी के ऑडिटोरियम भवन में किया गया। इसमें मीडियाकर्मियों और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसरों ने भाग लिया। इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस की तरफ़ से वरिष्ठ फैकल्टी प्रोफेसर मनीष गंगवार, मेजर विनीत कुमार समेत लगभग 10 सदस्यों की टीम ने मीडियाकर्मियों को डीप फेक की पहचान के लिए एआई टूल्स के उपयोग पर प्रशिक्षित किया।

इस अवसर पर डीजी साइबर क्राइम व लॉ एंड आर्डर श्री संजय अग्रवाल, राजस्थान पुलिस अकादमी के निदेशक एवं अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस श्री संजीब नार्जारी, अतिरिक्त महानिदेशक (साइबर क्राइम) पुलिस श्री वीके सिंह, महानिरीक्षक पुलिस श्री अजय पाल लांबा, डीआईजी श्री कुंवर राष्ट्रदीप, एसपी राशि डोगरा, श्री शांतनु सिंह सहित बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारी उपस्थित रहे।

जयपुर में 47 लाख परिगणना परिपत्रों का हुआ वितरण, निर्वाचन विभाग ने दी ऑनलाइन भरने की सुविधा
जयपुर में 47 लाख से ज्यादा परिगणना परिपत्रों का हुआ वितरण - 11 लाख से अधिक प्रपत्रों का किया जा चुका है डिजिटलीकरण - निर्वाचन विभाग ने मतदाताओं को दी...

जयपुर, 17 नवंबर। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम के तहत जयपुर जिले में परिगणना कार्य प्रगति पर है। जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी निरंतर कार्यक्रम की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। उप जिला निर्वाचन अधिकारी श्री मेघराज मीणा ने बताया कि 17 नवंबर तक जयपुर जिले में कुल 47 लाख 4 हजार 549 परिगणना प्रपत्र वितरित किए जा चुके हैं वहीं 11 लाख 90 हजार 611 प्रपत्रों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है।

उन्होंने बताया कि भारत निर्वाचन आयोग द्वारा विशेष गहन पुनरीक्षण कार्यक्रम घोषित किया गया है। इसके तहत जिले में 04 नवंबर से 04 दिसंबर तक परिगणना चरण का संचालन किया जा रहा है। इस चरण में परिगणना प्रपत्रों का वितरण, संग्रहण एवं डिजिटलीकरण सतत रूप से किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि निर्वाचन विभाग द्वारा मतदाताओं को सुविधा प्रदान करने हेतु ऑनलाइन विकल्प भी उपलब्ध कराया गया है। मतदाता स्वयं अपना परिगणना प्रपत्र https://voters.eci.gov.in/ पर जाकर अथवा प्रदान किए गए QR Code को स्कैन कर ऑनलाइन भर सकते हैं।

जिला निर्वाचन अधिकारी डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी ने सभी मतदाताओं से अपील है कि वे अपने तथा अपने परिवारजनों के परिगणना प्रपत्र अधिक से अधिक संख्या में ऑनलाइन भरकर अभियान को सफल बनाने में सहयोग करें। जिले में परिगणना प्रपत्रों के डिजिटलीकरण की प्रगति के अनुसार विधानसभा क्षेत्र बस्सी ने सर्वाधिक 37.65 फीसदी प्रपत्रों के डिजिटलीकरण के साथ प्रथम स्थान प्राप्त किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 19 नवम्बर को जारी करेंगे पीएम किसान सम्मान निधि की 21वीं किश्त
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 नवम्बर को ''पीएम-किसान उत्सव दिवस'' के अवसर पर कोयम्बटूर में आयोजित होने वाले कार्यक्रम में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किश्त के रूप में...


जयपुर, 17 नवम्बर 2025। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी 19 नवम्बर को ‘पीएम-किसान उत्सव दिवस’ के अवसर पर कोयम्बटूर में आयोजित कार्यक्रम में पीएम किसान सम्मान निधि योजना की 21वीं किश्त जारी करेंगे। इस दौरान देशभर के लगभग 9 करोड़ किसानों को 18 हजार करोड़ रुपये की राशि उनके बैंक खातों में हस्तांतरित की जाएगी।

राजस्थान के 66.62 लाख किसानों को मिलेगा लाभ

सहकारिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री गौतम कुमार दक ने बताया कि राजस्थान के 66.62 लाख किसानों को 1332.40 करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की जाएगी। प्रत्येक पात्र किसान के खाते में 2 हजार रुपये की राशि सीधे ट्रांसफर की जाएगी।

राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शामिल होंगे

इस अवसर पर जयपुर में राज्य स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा जिसमें मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा शामिल होंगे। साथ ही प्रदेश के सभी जिलों में स्थानीय स्तर पर भी आयोजन किए जाएंगे ताकि किसान इस अवसर से जुड़ सकें।

पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत पात्र किसानों को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये की सहायता तीन समान किश्तों में दी जाती है। अब तक 20 किश्तों के माध्यम से देशभर के किसानों को कुल 3.91 लाख करोड़ रुपये की राशि हस्तांतरित की जा चुकी है।

राजस्थान सरकार ने राज्य के किसानों को अतिरिक्त राहत देने के लिए मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि योजना लागू की है। इसके अंतर्गत पीएम किसान योजना के पात्र किसानों को प्रति वर्ष 3 हजार रुपये की अतिरिक्त सहायता राशि प्रदान की जाती है।

जयपुर में खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स – उद्घाटन समारोह और पूर्ण विवरण
युवाओं में खेलों के प्रति रुचि बढ़ाने तथा उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का आयोजन 24...

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 (केआईयूजी) का आयोजन राजस्थान के विभिन्न शहरों में 24 नवम्बर से 5 दिसम्बर 2025 तक किया जा रहा है। यह देश का सबसे बड़ा विश्वविद्यालय स्तरीय खेल आयोजन है, जिसमें 200 से अधिक विश्वविद्यालयों के 7000+ एथलीट भाग लेंगे और 240 से अधिक स्वर्ण पदकों के लिए प्रतिस्पर्धा करेंगे। जयपुर में एसएमएस स्टेडियम, उदयपुर, कोटा, अजमेर, भरतपुर, जोधपुर, बीकानेर जैसे शहरों में यह आयोजन भव्य रूप में होगा.


  • स्थान: एसएमएस स्टेडियम, जयपुर
  • दिनांक: 24 नवम्बर 2025
  • विशेषताएँ:
    • देशभक्ति और राजस्थानी लोक गीत-नृत्य
    • पुलिस बैंड, सेल्फी पॉइंट, ड्रोन शो
    • मशहूर कलाकारों की प्रस्तुतियां
    • खेल मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की उपस्थिति

Mascot, Logo, Anthem, Torch

  • खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स का लोगो, मैस्कॉट “खम्मा” और “घणी” का अनावरण आमेर फोर्ट में हुआ।
  • लोगो में राजस्थान की संस्कृति जैसे हवा महल, रणथंभौर किला, विंडमिल्स, रेतीले टीलें दर्शाए गए हैं.
  • एंथम “चलो आगे बढ़ो राजस्थान, जीत लो सारा हिन्दुस्तान” गायक स्वरूप खान द्वारा प्रस्तुत.

प्रतिभागी एवं दर्शक

  • देशभर के 200 विश्वविद्यालय
  • कुल 7000+ एथलीट
  • उद्घाटन समारोह में 23,000+ दर्शक
  • सात शहरों में 24 खेल स्पर्धाएँ आयोजित होंगी

खेलजिलें
एथलेटिक्सजयपुर
तीरंदाजीजयपुर
बैडमिंटनउदयपुर
बास्केटबॉलकोटा
मुक्केबाजीअजमेर
तलवारबाजीभरतपुर
फुटबॉलजोधपुर
हॉकीबीकानेर
कॅनोइंग/कायकिंगजयपुर
टेबल टेनिसजयपुर
वॉलीबॉलजयपुर
योगासनजयपुर
कुश्तीजयपुर
निशानेबाजीजयपुर
तैराकीजयपुर
कबड्डीजयपुर
मल्लखंभजयपुर
रग्बीजयपुर
भारोत्तोलनजयपुर
साइकिलिंगजयपुर
बीच वॉलीबॉलजयपुर
टेनिसजयपुर
जूडोजयपुर
अन्यविविध

आयोजन की तैयारियाँ

  • आवास, भोजन, चिकित्सा, परिवहन व्यवस्था सुदृढ़
  • खिलाड़ियों के लिए त्वरित चेक-इन, होटल सुविधाएँ विशेष रूप से उपलब्ध
  • नगर निगम और अन्य संस्थाओं के साथ समन्वय
  • मीडिया और अतिथियों के लिए विशेष बैठक व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, सभी मूलभूत सुविधाएँ

ग्राफिक्स और इन्फोग्राफिक्स के विचार

  • इवेंट कैलेंडर: दिन-प्रतिदिन के खेल और स्थान तालिका
  • मानचित्र: राजस्थान के सात प्रमुख शहर, स्थान और खेल स्पॉट
  • एथलीट प्रोफाइल: चुने हुए 8-10 शीर्ष खिलाड़ियों की फोटो एवं विवरण
  • मेडल टैली: पदक तालिका (रियल टाइम अपडेट के स्थान)
  • स्पोर्ट्स पिक्टोग्राम: प्रत्येक खेल का चित्रात्मक प्रदर्शन

आयोजन का उद्देश्य

  • उभरती खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर अवसर
  • युवाओं में खेल के प्रति रुचि बढ़ाना
  • राजस्थान के खेल एवं पर्यटन उद्योग को बढ़ावा देना

योजनाएं और सुझाव (Key Points)

  • खिलाड़ियों, कोचेस के लिए उत्कृष्ट प्रशिक्षण सह सुविधाएँ
  • सभी कार्यक्रमों का लाइव प्रसारण प्रसार भारती के माध्यम से
  • अतिथि देवो भव: की भावना का प्रचार
  • स्वच्छता एवं सुरक्षा के लिए विशेष योजना

समापन

खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025 ने पूरे राज्य के खेल जगत को एकजुट किया है। राजस्थान पहली बार ऐसे आयोजन का केंद्र बन रहा है, जिससे राज्य के युवाओं, खिलाड़ियों और जनता को नई प्रेरणा, उत्साह और अवसर मिलेंगे। यह आयोजन देश भर के एथलीटों के लिए सपना सच होने जैसा है।


मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास ने संभाला पदभार
मुख्य सचिव श्री वी. श्रीनिवास ने संभाला पदभार- हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही - मुख्य सचिव

राजस्थान प्रशासन में 17 नवंबर 2025 का दिन ऐतिहासिक रहा, जब राज्य के मुख्य सचिव पद की जिम्मेदारी वरिष्ठ आईएएस अधिकारी श्री वी. श्रीनिवास को सौंप दी गई। इस अवसर पर राज्य के शीर्ष प्रशासनिक पद पर बदलाव के साथ-साथ “विकसित राजस्थान @2047” के विजन को साकार करने की दिशा में प्रशासनिक प्रतिबद्धताओं को नए आयाम मिलने की उम्मीद जताई गई।

इस अवसर पर मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास का राजस्थान आईएएस ऑफिसर्स एसोसिएशन ने स्वागत किया तथा पूर्व मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत को भावभीनी विदाई दी। इस अवसर पर मुख्य सचिव श्री श्रीनिवास ने कहा कि उनका प्रशासनिक सेवा का कार्यकाल राजस्थान से ही प्रारम्भ हुआ था। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त की कि वर्षों बाद उन्हें एक बार फिर अपनी कर्मभूमि में लौटकर सेवा का अवसर प्राप्त हो रहा है। श्री श्रीनिवास ने कहा कि वे प्रदेश में सुशासन, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे और मुख्य सचिव के रूप में उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों को पूरी मेहनत, ईमानदारी और निष्ठा के साथ निभाएंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के विकसित राजस्थान@ 2047 के विजन को साकार करने के लिए सभी अधिकारी मिलकर काम करेंगे। उन्होंने कहा कि राजस्थान ने हाल के वर्षों में तकनीक आधारित सुशासन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बढ़ाए हैं। डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से शासन में पारदर्शिता बढ़ी है। उन्होंने कहा कि किसान, श्रमिक, महिला और युवाओं को विकास में सहभागी बनाकर प्रदेश की अर्थव्यवस्था को वर्ष 2047 तक 4.3 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए किये जा रहे प्रयासों को और गति देंगे। 

उन्होंने कहा कि ‘मिनिमम गवर्नमेंट -मैक्सिमम गवर्ननेंस’ के विजन के साथ प्रदेश में जनकल्याणकारी योजनाओं की सफल क्रियान्विति सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही, प्रदेश में अधिकतम निवेश आकर्षित करने तथा राजस्थान को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शामिल करने के लिए सभी सार्थक प्रयास किए जाएंगे। 

इस अवसर पर विभिन्न विभागों के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रमुख शासन सचिव, शासन सचिव तथा विभिन्न पदों पर कार्यरत भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी उपस्थित रहे। जिले में कार्यरत अधिकारियों ने वीसी के माध्यम से कार्यक्रम में भाग लिया।

वी. श्रीनिवास: प्रशासनिक जीवन, योग्यता और उपलब्धियाँ

वी. श्रीनिवास 1989 बैच के राजस्थान कैडर के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी हैं। उन्होंने ओस्मानिया विश्वविद्यालय से केमिकल इंजीनियरिंग में डिस्टिंक्शन के साथ अध्ययन किया। राजस्थान में जिला प्रशासन से विभागीय सचिव तक, उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में प्रशासनिक सेवा दी। केंद्र सरकार में प्रशासनिक सुधार, ई-गवर्नेंस, पेंशन प्रबंधन और सांस्कृतिक विरासत संरक्षण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे अंतरराष्ट्रीय प्रशासनिक विज्ञान संस्थान (IIAS) के अध्यक्ष हैं, जो वैश्विक स्तर पर उनकी प्रतिष्ठा को दर्शाता है।


मुख्य सचिव का भूमिका और कार्य

मुख्य सचिव राज्य प्रशासन का सबसे वरिष्ठ अधिकारी होता है। अपनी भूमिका में वह:

  • मंत्री के प्रमुख सलाहकार होते हैं; विभागीय नीति निर्धारण और प्रशासनिक निर्णयों में उनका अग्रणी योगदान रहता है।
  • राज्य सिविल सेवा के प्रमुख होते है, नियुक्ति, स्थानांतरण, पदोन्नति और अनुशासनात्मक कार्यवाही में उनकी अंतिम मंजूरी होती है।
  • शासन के विभिन्न विभागों के समन्वयक होते हैं तथा नीतिगत एवं वित्तीय मामलों की समीक्षा, समन्वयन और आंतरिक निरीक्षण की जिम्मेदारियां निभाते हैं।
  • राजकीय योजनाओं, बजट स्वीकृति, सर्विस रूल्स, और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों की प्रभावी क्रियान्विति सुनिश्चित करते हैं।

विकसित राजस्थान @2047: राज्य का विजन

राज्य सरकार द्वारा जारी “विकसित राजस्थान-2047” विजन दस्तावेज़ में राज्य की अर्थव्यवस्था को 2047 तक $4.3 ट्रिलियन तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस विजन के मुख्य स्तंभ हैं:

  • समावेशी व सतत विकास: खासतौर पर युवा, महिलाएं, किसान और कमजोर वर्गों को प्राथमिकता देना।
  • आर्थिक, औद्योगिक और सामाजिक सशक्तिकरण: कृषि, पर्यटन, उद्योग और अक्षय ऊर्जा की मजबूती।
  • शासन में पारदर्शिता: डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए नीति और प्रशासन में पारदर्शिता लाना।

सुशासन के लिए तकनीकी नवाचार

राजस्थान सरकार ने हाल ही में ई-गवर्नेंस, डेटा एनालिटिक्स, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकी पहल शुरू की हैं। इससे राज्य के प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनसुविधा में वृद्धि हुई है। इन तकनीकों के उपयोग से सरकारी सेवाएं तेज़, सरल और प्रभावी हुई हैं, जिससे राज्य के नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार संभव हुआ है।


राज्य की आर्थिक नीति एवं सामाजिक सरोकार

मुख्य सचिव श्री श्रीनिवास ने शासन की जिम्मेदारियों को पूरी ईमानदारी और निष्ठा से निभाने का संकल्प लिया। उनका कहना है कि अधिकतम निवेश आकर्षित कर राजस्थान को अग्रणी राज्यों में शुमार करना, जनकल्याणकारी योजनाओं का सफल क्रियान्वयन और “मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस” के सिद्धांत को लागू करना उनकी प्राथमिकता रहेगी।


प्रशासनिक परिवर्तन, भविष्य की दिशा

राज्य के प्रशासनिक तंत्र में इस बदलाव से नवाचार, कर्मठता और प्रशासनिक उत्कृष्टता की नई मिसाल कायम होने की उम्मीद है। श्री वी. श्रीनिवास की नेतृत्व क्षमताओं और अनुभव से राज्य की राजनीतिक, सामाजिक एवं आर्थिक दिशा में गतिशीलता आएगी। युवाओं, महिलाओं, किसानों व श्रमिकों के सशक्तिकरण की योजनाओं में नई जान आ सकती है।


निष्कर्ष

राजस्थान के मुख्य सचिव के रूप में श्री वी. श्रीनिवास का कार्यकाल प्रशासनिक नवाचार, पारदर्शita, सुशासन और राज्य के सतत विकास की नई दिशा देगा। “विकसित राजस्थान @2047” के लक्ष्य को साकार करने की ओर राज्य ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।

बिहार चुनाव के बाद RSS का बढ़ता प्रभाव: 2025 में भारत की राजनीति पर गहरा असर
बिहार चुनाव में NDA के शाब्दिक बहुमत और BJP की मजबूत वृद्धि से RSS की चुनावी और सामाजिक पकड़ मजबूत हुई है

भारत में बिहार चुनाव 2025 के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रभाव में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। RSS की सक्रिय भूमिका और उसकी रणनीतियाँ चुनाव परिणामों में स्पष्टरूप से दिखाई दीं, जिसने भाजपा और उसके सहयोगी दलों को बड़ी सफलता दिलाई है। बिहार चुनाव में NDA के शाब्दिक बहुमत और BJP की मजबूत वृद्धि से RSS की चुनावी और सामाजिक पकड़ मजबूत हुई है। RSS ने इस चुनाव को अपने वैचारिक विस्तार के लिए एक मंच के रूप में उपयोग किया, जहां उन्होंने ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में हिंदुत्व और राष्ट्रीयता के संदेश को विस्तृत किया।

RSS की बिहार चुनाव में भूमिका

RSS ने बिहार में 20,000 से अधिक स्वयंसेवकों के माध्यम से ‘मिशन त्रिशूल’ अभियान चलाया, जिसमें गांव-गांव जाकर स्थानीय मुद्दों को राष्ट्रीय एजेंडे से जोड़ने का रणनीति अपनाई गई। इसके तहत जाति आधारित राजनीति के बजाय हिंदू एकता और विकास के विषय को प्रमुखता दी गई। विश्लेषकों के अनुसार, RSS की इस रणनीति ने पारंपरिक मुस्लिम और यादव वोट बैंक को प्रभावित किया, जिससे NDA को बिहार में बड़ा लाभ मिला।

भारत में RSS का बढ़ता प्रभाव

बिहार के अलावा, RSS पूरे भारत में अपनी पहुंच बढ़ा रहा है। UP में 2027 के चुनावों के लिए RSS ने ‘गृह संपर्क अभियान’ शुरू किया है, जिसके तहत करोड़ों घरों में संदेश पहुंचाने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त, पश्चिम बंगाल जैसे पूर्वी राज्यों में भी RSS की गतिविधियां तेज हो गई हैं, जहां वह तृणमूल कांग्रेस के प्रभाव को चुनौती देने की योजना बना रहा है।

नीति निर्माण, शिक्षा, और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से RSS का प्रभाव विभिन्न राज्यों में दिख रहा है, खासतौर पर उन राज्यों में जहां भाजपा सरकार है या उसका प्रभाव बढ़ रहा है। यह एक लंबी अवधि की रणनीति है जिससे RSS भारत के राजनीतिक और सामाजिक ताने-बाने में गहरी पैठ बना सके।

भारत के राज्यों का राजनीतिक स्वरूप 2025 में

नीचे दिए गए मानचित्र में भारतीय राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में वर्तमान जनता दल (BJP), कांग्रेस (INC), आम आदमी पार्टी (AAP), जनता दल (यूनाइटेड), और अन्य प्रमुख पार्टियों के शासन को दर्शाया गया है। इससे साफ़ होता है कि भाजपा 14 राज्यों और कई केंद्र शासित प्रदेशों में सत्ता में है, जबकि अन्य क्षेत्रीय दल और कांग्रेस कुछ राज्यों में राज कर रहे हैं।

यह मानचित्र विभिन्न पार्टियों के शासनों को रंगों के माध्यम से दिखाता है:

  • बीजेपी (BJP) – केसरिया (#FF9933)
  • कांग्रेस (INC) – नीला
  • आम आदमी पार्टी (AAP) – सायकन (#009999)
  • जनता दल (यूनाइटेड) – हरा (#008000)
  • अन्य क्षेत्रीय दलों के अपने विशिष्ट रंग

निष्कर्ष

बिहार चुनाव के परिणामों ने स्पष्ट किया कि RSS का प्रभाव भारत के राजनीतिक परिदृश्य में मजबूती से स्थापित हो चुका है। इसके सक्रिय संगठन और चुनावी रणनीतियाँ भाजपा की सफलता के प्रमुख कारण हैं। आगे के वर्षों में RSS की भूमिका और अधिक निर्णायक साबित हो सकती है, विशेषकर उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे संवेदनशील राज्यों में। इस प्रकार, RSS का प्रभाव केवल चुनाव तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि यह भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक दिशा भी निर्धारित कर रहा है।

RSS प्रमुख मोहन भागवत का बयान: भारत की तेज़ प्रगति से विश्व प्रभावित, राष्ट्रवाद पर घबराहट
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जयपुर दौरे के दौरान कहा कि भारत अब वैश्विक समस्याओं के समाधान के लिए एक भरोसेमंद शक्ति बन चुका है। उन्होंने राष्ट्रवाद से जुड़े खतरों...

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने जयपुर में आयोजित एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित दीनदयाल स्मृति व्याख्यान में कहा कि आज पूरी दुनिया वैश्विक चुनौतियों के समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने भारत की तेज़ प्रगति, वर्तमान वैश्विक अस्थिरता और राष्ट्रवाद के कारण बढ़ते संघर्षों पर भी विशद चिंता जाहिर की। भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि भारत अब मील-दर-मील आगे बढ़ रहा है और विश्व मंच पर एक नई शक्ति के रूप में उभर चुका है.

भारत पर वैश्विक भरोसा

मोहन भागवत ने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान दुनिया तलाश रही है, उनका जवाब भारत के पास है। भारत में वह विचार शक्ति है, जो विश्व की समस्याओं का समाधान देने में सक्षम है। उन्होंने कहा, “दुनिया आज भारत की ओर देख रही है। जिन समस्याओं का समाधान दुनिया खोज रही है, उनका उत्तर भारत के पास है।” उन्होंने आगे कहा कि भारत की तेज़ प्रगति के पीछे उसकी सांस्कृतिक और पारिवारिक व्यवस्था की ताकत है, जिसने उसे वैश्विक अस्थिरताओं से अपेक्षाकृत कम प्रभावित किया है.

राष्ट्रवाद और वैश्विक अस्थिरता पर चिंता

भागवत ने अपने संबोधन में कहा कि आज वैश्विक स्तर पर संघर्ष के पीछे राष्ट्रवाद की अति और शक्ति के संतुलन का बिगड़ना मुख्य कारण है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रहित आक्रामक हो जाता है, तो उसके परिणाम विनाशकारी युद्ध के रूप में सामने आते हैं। इतिहास में दोनों विश्व युद्ध राष्ट्रवाद की एक आक्रामक धारा के कारण हुए, इसलिए अंतरराष्ट्रीयवाद की आवश्यकता और भारतीय दृष्टिकोण, जैसे “वसुधैव कुटुंबकम”, आज के समय की जरूरत बन चुके हैं.

उन्होंने जोर देकर कहा कि जब भी शक्तिशाली देशों के हितों की टकराहट होती है, उसका सीधा असर कमजोर देशों पर पड़ता है। उन्होंने यह भी कहा कि युद्ध का बोझ सबसे अधिक ऐसे देशों को झेलना पड़ता है, जिनके पास बहुत अधिक साधन नहीं होते.

गोविंद देव जी मंदिर में दर्शन और युवाओं को संदेश

अपनी जयपुर यात्रा के दौरान मोहन भागवत ने गोविंद देव जी मंदिर में विधिविधान से दर्शन किए और पूजा-अर्चना की। उन्होंने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की आवश्यकता पर बल देते हुए युवाओं को समाज में सकारात्मक भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आस्था और भारतीय संस्कृति को संरक्षित करना युवा पीढ़ी की जिम्मेदारी भी है, क्योंकि यही सामाजिक स्थायित्व और सामूहिक विकास का आधार है.​​

भागवत ने गोविंद देव जी मंदिर की व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए कहा कि सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संस्थाएं समाज को एक दिशा और मजबूती देने का काम करती हैं। ऐसे धार्मिक स्थलों पर आस्था और संस्कृति का सजीव रूप देखने को मिलता है, जिसे युवाओं तक पहुंचाना बेहद जरूरी है.

निष्कर्ष

जयपुर में मोहन भागवत का यह स्पष्ट संदेश था कि भारत की सांस्कृतिक, बौद्धिक और नैतिक शक्ति के कारण पूरी दुनिया अब समाधान के लिए भारत की ओर देख रही है। उन्होंने राष्ट्रीय अस्मिता, वैश्विक दृष्टिकोण, युवा जिम्मेदारी और आस्था के संगम को ही शांति, स्थिरता और प्रगति का आधार बताया.